पाकिस्तान में तख्तापलट का काउंटडाउन शुरू! कंटेनरों से सील इस्लामाबाद, सैन्य हलचल तेज
Pakistan Islamabad Sealed: पाकिस्तान में तख्तापलट की अटकलों के बीच इस्लामाबाद को कंटेनरों से सील किए जाने की खबरों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। सेना प्रमुख असीम मुनीर, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और गृह मंत्री मोहसिन नक़वी को लेकर कई तरह की चर्चाएं जारी हैं।
Pakistan Islamabad Sealed: पड़ोसी देश पाकिस्तान के सियासी गलियारों से इस वक्त बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज खबर आ रही है। राजधानी इस्लामाबाद की चारों तरफ मजबूत कंटेनर लगाकर पूरे शहर को सील कर दिया गया है। इस अप्रत्याशित कदम के बाद प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की सरकार के तख्तापलट की अटकलें बेहद तेज हो गई हैं।
सैन्य मामलों के जानकारों का मानना है कि इस पूरे राजनीतिक उलटफेर की स्क्रिप्ट रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय में लिखी जा चुकी है। इस पूरे मास्टरप्लान की कमान पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के पास बताई जा रही है। शहबाज़ शरीफ की सरकार इसलिए भी खतरे में है क्योंकि उनके अपने ही गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने अपनी सरकार के खिलाफ बगावती रुख अपना लिया है।
21 साल पुराना काला चिट्ठा और 'स्कैम बम' का धमाका
हाल ही में पाकिस्तान की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह 'तबाह' करार देने वाले गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने एक और राजनीतिक धमाका कर दिया है। उन्होंने दावा किया है कि देश के इतिहास के सबसे बड़े भ्रष्टाचार और घोटाले की परतें खुलने वाली हैं। नक़वी का आरोप है कि पिछले 21 वर्षों से राजनेता, वरिष्ठ नौकरशाह, जज और बड़े बैंकर मिलकर रिश्वतखोरी का घिनौना खेल खेल रहे थे।
हालांकि नक़वी ने अभी तक किसी का नाम सीधे तौर पर उजागर नहीं किया है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि इस 21 साल पुराने मामले में शामिल किसी भी ताकतवर चेहरे को बख्शा नहीं जाएगा। गृह मंत्री द्वारा अपनी ही सरकार के सिस्टम को नाकाम बताना शहबाज़ शरीफ के नेतृत्व पर सीधा हमला माना जा रहा है।
जनरल मुनीर का खास मोहरा और मुशर्रफ मॉडल की आहट
राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि मोहसिन नक़वी केवल एक मंत्री के रूप में काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे आर्मी चीफ असीम मुनीर की शतरंज के सबसे अहम प्यादे हैं। चर्चा यह भी है कि सेना प्रमुख नक़वी को देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में तैयार कर रहे हैं। रावलपिंडी में ठीक वैसा ही खाका तैयार किया जा रहा है, जैसा सालों पहले जनरल परवेज मुशर्रफ के दौर में देखा गया था। मकसद साफ है- असीम मुनीर को राष्ट्रपति पद सौंपकर उन्हें सैन्य और प्रशासनिक मोर्चे पर असीमित शक्तियां देना। इस अंदरूनी पटकथा ने लंदन में बैठे नवाज़ शरीफ से लेकर लाहौर के सत्ता पक्ष तक हड़कंप मचा दिया है।
ख्वाजा आसिफ का तीखा वार
सरकार के भीतर मचे इस घमासान पर शहबाज़ शरीफ के बेहद करीबी और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अब मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने गृह मंत्री नक़वी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें एक ऐसा 'पावरहाउस' करार दिया, जो खुद को वज़ीर-ए-आज़म के प्रति भी जवाबदेह नहीं समझता। ख्वाजा आसिफ ने तंज कसते हुए कहा कि जो मंत्री कैबिनेट बैठकों से गायब रहता हो और सबसे ज्यादा शक्तियां होने के बावजूद रोना रो रहा हो, तो ऐसे में बाकी मंत्रियों को इस्तीफा देकर अपने घर लौट जाना चाहिए। ख्वाजा के इस कड़े बयान से साफ हो गया है कि शरीफ खेमे और सैन्य समर्थित गुट के बीच अब जुबानी जंग सीमा लांघ चुकी है।
क्या फिर से शुरू होने वाला है तानाशाही का दौर?
पाकिस्तान की संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक ढांचे में आई यह दरार अब किसी से छिपी नहीं है। जनरल असीम मुनीर इस समय विदेश नीति से लेकर देश के आर्थिक फैसलों तक में सीधा दखल दे रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नक़वी के जरिए सेना प्रमुख ने शरीफ सरकार को यह संदेश दे दिया है कि देश का असली नियंत्रण किसके हाथों में है। एक पूर्व मीडिया मालिक से देश के सबसे असरदार नेताओं की कतार में शामिल हुए मोहसिन नक़वी की महत्वाकांक्षाएं किसी से छिपी नहीं हैं। सेना प्रमुख के साथ उनके पारिवारिक और करीबी रिश्तों की बदौलत ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी अहम ज़िम्मेदारियाँ दी गई थीं। अब देखना यह होगा कि रावलपिंडी की इस चाल के बाद शहबाज़ शरीफ अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या पाकिस्तान एक बार फिर सैन्य तानाशाही के साये में चला जाता है।