Passport Power: पासपोर्ट की 'पावर' किसने तय की, किस देश का पासपोर्ट सबसे ताकतवर, जानें सबकुछ

Passport Power: हेनले पासपोर्ट इंडेक्स और अन्य वैश्विक रैंकिंग के आधार पर जानिए पासपोर्ट की ताकत कैसे तय होती है, 2026 में कौन सा देश सबसे आगे है और भारत की स्थिति क्या है।

Update:2026-08-04 22:30 IST

 पासपोर्ट की 'पावर' किसने तय की, किस देश का पासपोर्ट सबसे ताकतवर, जानें सबकुछ (Photo- Social Media)

Passport Power: पासपोर्ट सिर्फ एक दस्तावेज नहीं बल्कि एक पावरफुल चीज होता है। 'पासपोर्ट की पावर' कई फायदे करा सकती है। ये अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण और दिलचस्प चीज है। पासपोर्ट की पावर शब्द सुनने में दिलचस्प तो है, फिर भी ये सवाल उठता है कि यह पावर तय कौन करता है, नापने का पैमाना क्या है, और भारत का पासपोर्ट इस लिस्ट में कहां ठहरता है?

पासपोर्ट रैंकिंग किसने शुरू की

पासपोर्ट पावर की सबसे भरोसेमंद और सबसे पुरानी रैंकिंग हेनले पासपोर्ट इंडेक्स (Henley Passport Index) है। इसे लंदन स्थित ग्लोबल सिटीजनशिप और रेजिडेंस एडवाइजरी फर्म हेनले एंड पार्टनर्स ने तैयार किया है, और 2005 में लॉन्च हुई यह लिस्ट लगभग 200 देशों को इस आधार पर परखती है कि उनके पासपोर्ट धारक बिना वीज़ा के कितने देशों में यात्रा कर सकते हैं। 2026 में इस इंडेक्स ने अपनी 20वीं वर्षगांठ मनाई।

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इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण इंडेक्स है - आर्टन कैपिटल का पासपोर्ट इंडेक्स। यह 193 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों के साथ-साथ ताइवान, मकाऊ, हॉन्ग कॉन्ग, कोसोवो, फिलिस्तीनी क्षेत्र और वेटिकन जैसे छह क्षेत्रों के पासपोर्ट को भी शामिल करता है, और यह अलग-अलग सरकारों के पोर्टल्स से मिलने वाले डेटा के आधार पर साल भर रियल-टाइम में अपडेट होता है।

रैंकिंग का गणित

रैंकिंग का तरीका बेहद सरल है, लेकिन डेटा का स्रोत भरोसेमंद और विशाल होना जरूरी है। हेनले इंडेक्स इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के एक्सक्लूसिव डेटा के आधार पर 199 पासपोर्ट को 227 यात्रा गंतव्यों के मुकाबले रैंक करता है। इसका गणित कुछ ऐसा है:

* अगर किसी देश के पासपोर्ट धारक को किसी गंतव्य पर बिना वीज़ा या वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा मिलती है, तो 1 अंक मिलता है

* अगर वहां जाने के लिए पहले से वीज़ा लेना अनिवार्य है, तो 0 अंक मिलता है

* हर देश के कुल अंक जोड़कर उसकी रैंक तय होती है। जितने ज्यादा देशों में बिना पूर्व-वीज़ा एंट्री मिलती है, पासपोर्ट उतना ही 'ताकतवर' माना जाता है

यह इंडेक्स हर तिमाही (साल में 4 बार) अपडेट होता है, इसलिए किसी देश की रैंक साल के अलग-अलग महीनों में बदलती रहती है। यही वजह है कि आपको कभी भारत का रैंक 75वां तो कभी 80वां या 81वां दिखाई दे सकता है, दोनों ही सही हो सकते हैं, बस अलग-अलग तिमाही के आंकड़े हैं।

2026 में दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट कौन सा

जुलाई 2026 की 20वीं वर्षगांठ रिपोर्ट में सिंगापुर का पासपोर्ट दुनिया में सबसे ताकतवर घोषित हुआ, जिसके धारक दुनिया भर के 192 गंतव्यों में बिना वीज़ा या वीज़ा-ऑन-अराइवल के प्रवेश कर सकते हैं। टॉप की पूरी लिस्ट कुछ इस तरह है:

रैंक 1 : सिंगापुर - 192 देशों में वीसा फ्री एंट्री

रैंक 2 : जापान, यूएई, साउथ कोरिया : 190 देशों में वीसा फ्री

रैंक 3 : स्वीडन- 186 देशों में वीसा फ्री

रैंक 4 : बेल्जियम, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, लक्ज़मबर्ग, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्पेन, स्विट्ज़रलैंड - 185 देशों में वीसा फ्री

इस रिपोर्ट में यूएई को पिछले 20 सालों का सबसे बड़ा 'उछाल' मारने वाला देश बताया गया, जिसने 2006 से अब तक 149 नए वीज़ा-फ्री गंतव्य जोड़े और रैंकिंग में 57 पायदान ऊपर चढ़ा। यह उपलब्धि यूएई की लगातार कूटनीतिक सक्रियता और वीज़ा नीतियों में उदारीकरण की वजह से मिली।

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अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश फिसले क्यों

यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। अमेरिका का पासपोर्ट, जो 2006 में दुनिया के टॉप तीन में शुमार था, अब खिसककर 10वें स्थान पर आ गया है, और उससे ऊपर अब 36 देश हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि पासपोर्ट की ताकत जरूरी नहीं कि किसी देश की शांति या सुरक्षा दर्शाती हो। अमेरिका और इज़राइल ग्लोबल पीस इंडेक्स पर क्रमशः 134वें और 149वें स्थान पर होने के बावजूद पासपोर्ट रैंकिंग में 10वें और 18वें स्थान पर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इसकी वजह है इन देशों की संचित कूटनीतिक पूंजी और वैश्विक संस्थाओं में उनकी साख, न कि सिर्फ शांतिपूर्ण छवि।

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भारत का पासपोर्ट कहां ठहरता है

2026 के दौरान भारत की रैंकिंग हर तिमाही में उतार-चढ़ाव के साथ बदलती रही:

* साल की शुरुआत (फरवरी 2026) में भारत 75वें स्थान पर पहुंचा था, जो 2025 के 85वें स्थान से 10 पायदान का बड़ा सुधार था

* बाद में मई 2026 में यह फिसलकर 78वें स्थान पर आ गया, हालांकि तब भी भारतीय पासपोर्ट धारकों को 56 देशों में वीज़ा-फ्री या सरल एंट्री मिल रही थी

* भारत ने 2006 में जब यह इंडेक्स शुरू हुआ था, तब 71वां स्थान हासिल किया था यानी बीते 20 सालों में रैंक असल में 10 पायदान नीचे खिसकी है, जो दिखाता है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहना कितना चुनौतीपूर्ण है। भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए ज्यादातर वीज़ा-फ्री गंतव्य एशिया, अफ्रीका और छोटे द्वीप देशों में हैं, जबकि अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के ज्यादातर देशों के लिए अब भी पहले से वीज़ा लेना अनिवार्य है।

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पासपोर्ट की ताकत तय करने वाले असली कारण

किसी देश के पासपोर्ट की मजबूती कई चीज़ों पर निर्भर करती है जैसे कि दूसरे देशों के साथ मजबूत कूटनीतिक रिश्ते, जो वीज़ा-फ्री समझौतों में मदद करते हैं; वैश्विक स्तर पर देश की सुरक्षा को लेकर अन्य देशों की धारणा, जो नागरिकों की आवाजाही को प्रभावित करती है; और एक स्थिर अर्थव्यवस्था, जो बेहतर यात्रा-संबंधी समझौते करने में मदद करती है। यानी पासपोर्ट की ताकत सीधे तौर पर उस देश की वैश्विक साख, आर्थिक स्थिरता और कूटनीतिक पहुंच का आईना होती है।

अगली बार जब कोई खबर पढ़ें कि फलां देश का पासपोर्ट सबसे ताकतवर बना, तो समझ लीजिए कि इसके पीछे कोई जटिल फॉर्मूला नहीं बल्कि एक सीधा हिसाब है: कितने देशों में बिना पहले से वीज़ा लिए घुसा जा सकता है, उतने ही अंक। लेकिन इस साधारण से गणित के पीछे छिपी है किसी देश की दशकों की कूटनीति, आर्थिक ताकत और वैश्विक भरोसे की पूरी कहानी।

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