Nitish-RCP Meeting: आरसीपी सिंह की JDU में होगी वापसी? 4 साल बाद नीतीश से मुलाकात पर गरमाई बिहार की सियासत

Nitish-RCP Meeting: पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने 4 साल बाद सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात की है। इससे उनके जेडीयू में वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं, हालांकि पार्टी के अंदर इसका कड़ा विरोध हो रहा है।

Update:2026-06-27 21:30 IST

Nitish-RCP Singh Meeting: पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात खूब सुर्खियां बटोर रही है। करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद हुई इस आमने-सामने की बातचीत ने आरसीपी की जनता दल यूनाइटेड में फिर से वापसी की सुगबुगाहट को तेज कर दिया है। पटना के 7 सर्कुलर रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस मीटिंग के बाद आरसीपी सिंह बेहद सकारात्मक नजर आए। उन्होंने नीतीश कुमार के साथ अपने पच्चीस साल पुराने संबंधों का हवाला देते हुए इसे एक नई शुरुआत बताया।

आरसीपी का दावा है कि मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री काफी प्रसन्न दिख रहे थे और उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार ही हमेशा उनके सर्वमान्य नेता रहेंगे। जब उनसे जेडीयू में वापसी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बड़ी ही बेबाकी से जवाब दिया कि वह तो अपने घर में ही हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के रूप में नीतीश के बेटे निशांत के कामकाज की भी जमकर सराहना की और भविष्य में मुख्यमंत्री से दोबारा मिलने की इच्छा जताई।

जेडीयू नेताओं की नाराजगी और कड़ा विरोध

एक तरफ जहां आरसीपी सिंह इस मुलाकात को नई पारी बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जेडीयू के अंदरूनी खेमे में इसे लेकर भारी असंतोष है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने आरसीपी की वापसी की सभी अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह गैर-भरोसेमंद करार दिया है। उनका साफ कहना है कि आरसीपी सिंह के साथ पार्टी का पुराना तजुर्बा बेहद कड़वा रहा है।

नीरज कुमार ने याद दिलाया कि जब आरसीपी सिंह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तब 2020 के विधानसभा चुनावों में जेडीयू को भारी नुकसान उठाना पड़ा था और पार्टी का ग्राफ गिरकर महज 43 सीटों पर आ गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरसीपी ने पिछले चुनावों के दौरान नीतीश कुमार की राजनीतिक समझ पर भी सवाल खड़े किए थे, इसलिए उन पर दोबारा विश्वास करना किसी भी लिहाज से सही नहीं है।

अफसरशाही से सियासत तक का सफर और बढ़ती दूरियां

मूल रूप से नालंदा के रहने वाले आरसीपी सिंह उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं। उनकी और नीतीश कुमार की करीबी उस दौर से है जब नीतीश रेल मंत्री हुआ करते थे और आरसीपी उनके विशेष सचिव थे। बाद में जब नीतीश बिहार के मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने आरसीपी को अपना प्रधान सचिव नियुक्त कर लिया। साल 2010 में उन्होंने प्रशासनिक सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली और पूरी तरह राजनीति में कदम रखते हुए जेडीयू का दामन थाम लिया। पार्टी में उनका राजनीतिक कद बहुत तेजी से बढ़ा। उन्हें दो बार राज्यसभा भेजा गया और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

विवाद की असल शुरुआत 2021 में हुई जब वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बने। जेडीयू नेताओं का मानना था कि उन्होंने यह पद नीतीश कुमार की सहमति के बिना हासिल किया था। इसी नाराजगी के चलते उन्हें अध्यक्ष पद से हटाया गया और 2022 में जेडीयू ने उन्हें तीसरी बार राज्यसभा भेजने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही उनकी मंत्री की कुर्सी भी छिन गई और धीरे-धीरे वह पार्टी में पूरी तरह किनारे लगा दिए गए।

नई पार्टी का गठन, जन सुराज में विलय और अब आगे की राह

पार्टी से दूरियां बढ़ने के बाद जेडीयू ने उन पर वित्तीय अनियमिताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कारण बताओ नोटिस थमा दिया था। इसके कुछ ही दिनों बाद आरसीपी ने खुद ही जेडीयू से इस्तीफा दे दिया। कुछ समय तक राजनीतिक रूप से शांत रहने के बाद 2024 में उन्होंने 'आप सबकी आवाज' नाम से अपनी एक नई पार्टी का गठन किया। हालांकि, 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उन्होंने अपनी इस पार्टी का प्रशांत किशोर की 'जन सुराज पार्टी' में विलय कर दिया था।

इस चुनाव में उनकी बेटी लता सिंह ने जन सुराज के टिकट पर नालंदा की अस्थावां विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन उन्हें करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। इस चुनावी झटके और बदले हुए सियासी समीकरणों के बीच अब ऐसा लग रहा है कि आरसीपी सिंह अपनी राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए एक बार फिर से नीतीश कुमार की शरण में जाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

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