बंगाल में BJP के ‘खेला’ के पीछे थे RSS का सीक्रेट प्लान! 3 साल तक डटे रहे मोहन भागवत, ऐसे पलटी पूरी बाजी!
RSS On Bengal BJP Government: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की उल्लेखनीय जीत के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने राज्य में अपने लंबे संगठनात्मक और वैचारिक योगदान को रेखांकित किया है।
RSS On Bengal BJP Government
RSS On Bengal BJP Government: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की उल्लेखनीय जीत के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने राज्य में अपने लंबे संगठनात्मक और वैचारिक योगदान को रेखांकित किया। नागपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि बंगाल संघ की कार्ययात्रा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और संगठन की जड़ें यहां बहुत गहरी हैं।
आंबेकर ने बताया कि आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी और तभी से बंगाल संगठन की गतिविधियों का प्रमुख क्षेत्र रहा है। उन्होंने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का भी बंगाल से विशेष जुड़ाव था। उन्होंने कोलकाता में मेडिकल शिक्षा प्राप्त की थी और बाद में संगठन के विस्तार के लिए भी यहां सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्होंने दावा किया कि संघ के प्रत्येक सरसंघचालक ने किसी न किसी रूप में बंगाल में काम किया है। वर्तमान सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी अपने संगठनात्मक जीवन के दौरान कोलकाता में कई वर्षों तक कार्य किया था। आंबेकर के अनुसार बंगाल में संघ के प्रचारकों और स्वयंसेवकों ने दशकों तक शांतिपूर्वक और निरंतर काम किया, जिसके परिणामस्वरूप संगठन का जनाधार मजबूत हुआ।
कई बार संघ कार्यकर्ताओं को करना पड़ा विरोध का सामना
उन्होंने कहा कि कई बार संघ कार्यकर्ताओं को हिंसा और विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने समाज के बीच अपना कार्य जारी रखा। आज बंगाल में संघ के पास जमीनी स्तर तक फैला हुआ स्वयंसेवकों का व्यापक नेटवर्क मौजूद है, जिसने सामाजिक और वैचारिक जागरूकता बढ़ाने में योगदान दिया है। देश के विभाजन के मुद्दे पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में आंबेकर ने कहा कि उस दौर में लोगों के भीतर गहरा दर्द और आक्रोश था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उस समय संघ अधिक मजबूत स्थिति में होता तो शायद विभाजन को रोका जा सकता था। हालांकि विभाजन के बाद संघ कार्यकर्ताओं ने राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय योगदान दिया था।
आंबेकर ने उन आरोपों को भी खारिज किया कि आरएसएस किसी विशेष समुदाय के प्रति विरोध या शत्रुता रखता है। उन्होंने कहा कि संघ समाज के सभी वर्गों को अपना मानता है और संवाद के माध्यम से सामाजिक एकता को मजबूत करने में विश्वास रखता है। उनका कहना था कि राजनीतिक कारणों से संगठन के बारे में कई बार गलत धारणाएं फैलायी जाती हैं। उन्होंने आरएसएस की वैचारिक सोच का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन भारत को एक हिंदू राष्ट्र के रूप में देखता है और मानता है कि एक मजबूत तथा समृद्ध समाज का लाभ सभी समुदायों को मिलेगा। साथ ही उन्होंने युवाओं, विशेषकर जेन-ज़ी पीढ़ी को लोकतंत्र, विकास और राष्ट्र निर्माण के प्रति आशावादी तथा प्रतिबद्ध बताया।