लिफ्ट कांड केस में तरुण तेजपाल को बड़ा झटका, बॉम्बे HC ने पलटा फैसला, सुनाई 10 साल की कैद और...

Tarun Tejpal Convicted: तहलका के पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल को यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए 10 साल की कठोर कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने 2021 में गोवा की निचली अदालत द्वारा दिए गए बरी करने के फैसले को पलट दिया।

Update:2026-08-06 15:21 IST

Tarun Tejpal Convicted: पत्रकारिता जगत के चर्चित नाम और तहलका के पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में दोषी पाते हुए 10 साल की कठोर जेल की सजा सुनाई है। इस फैसले के साथ ही उच्च न्यायालय ने वर्ष 2021 के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें गोवा की निचली अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था। अदालत ने सजा सुनाने के साथ ही उन पर भारी अर्थदंड भी लगाया है।

अदालत में तेजपाल और अभियोजन की तीखी बहस

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई। तेजपाल के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और यह उनका पहला अपराध है। वर्ष 2013 की घटना के बाद से वे जमानत पर हैं। उन्होंने कम से कम सजा देने और सरेंडर के लिए 8 हफ्ते का समय मांगा। दूसरी तरफ, सॉलिसिटर जनरल ने अधिकतम सजा की मांग की। उन्होंने दलील दी कि तेजपाल पीड़िता के लिए पिता समान थे। मना करने पर भी अपराध दोहराया गया और उनके आचरण में कोई पछतावा नहीं दिखा।

हाई कोर्ट की अहम टिप्पणियां और रुख

सजा तय करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि इस घटना को पूरे 13 साल बीत चुके हैं। इस दौरान तेजपाल के खिलाफ किसी अन्य गलत व्यवहार या शिकायत की बात सामने नहीं आई है। अदालत ने यह टिप्पणी भी की कि दोनों पक्षों को अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाना चाहिए था। इसके बावजूद, कानून के तहत अपराध की गंभीरता को देखते हुए सजा दी गई।

विभिन्न धाराओं के तहत मिली सजा

अदालत ने भारतीय दंड संहिता के तहत सजा का निर्धारण किया। धारा 376(2)(f) के अंतर्गत तेजपाल को 10 वर्ष की सख्त जेल तथा 5 लाख रुपये जुर्माना सुनाया। धारा 376(2)(k) में भी 10 साल की कठोर कैद और 5 लाख जुर्माना दिया। धारा 354 के तहत 1 वर्ष की कैद एवं 10 हजार जुर्माना लगाया गया। धारा 354A में भी 1 साल की कठोर कैद व जुर्माना तथा धारा 354B के तहत 3 वर्ष की कड़ाके की सजा तय की गई।

लिफ्ट कांड से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर

यह विवाद साल 2013 का है, जब तहलका की एक जूनियर महिला कर्मी ने गोवा के एक होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल पर यौन उत्पीड़न के संगीन आरोप जड़े थे। हालांकि, तेजपाल ने इन दावों का लगातार खंडन किया। मई 2021 में निचली सेशंस कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था, जिसे राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया। अब तेजपाल पक्ष इस फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती देने की बात कह रहा है। इस फैसले के बाद कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा और दशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण तथा अत्यंत निर्णायक साबित होने वाली एक बड़ी कड़ी है।

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