Kawadiya Pahad Dewas: करोड़ों साल पुरानी चट्टानों का अनोखा कमाल, देवास में पत्थर बजते हैं घंटी की तरह
MP News: मध्य प्रदेश के देवास स्थित कावड़िया पहाड़ के पत्थरों से चोट करने पर घंटी जैसी आवाज निकलती है। जानें इस अनोखी प्राकृतिक संरचना के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य।
Kawadiya Pahad Dewas (Image Credit-Social Media)
देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले के उदयनगर वन क्षेत्र में स्थित कावड़िया पहाड़ प्रकृति का एक ऐसा अद्भुत रहस्य समेटे हुए है, जो पहली बार देखने और सुनने वालों को हैरान कर देता है। यहां मौजूद कुछ विशाल पत्थरों पर यदि हल्की सी चोट की जाए तो उनमें से धातु या घंटी जैसी स्पष्ट गूंज सुनाई देती है। दूर से यह आवाज किसी लोहे के खंभे पर हथौड़ा मारने जैसी प्रतीत होती है, लेकिन पास पहुंचने पर पता चलता है कि यह ध्वनि साधारण दिखने वाले पत्थरों से निकल रही है।
भूगर्भ वैज्ञानिकों के अनुसार यह क्षेत्र बेसाल्ट चट्टानों की एक अत्यंत दुर्लभ प्राकृतिक संरचना का उदाहरण है, जिसका निर्माण करोड़ों वर्ष पहले ज्वालामुखीय गतिविधियों के दौरान हुआ था।
उस समय निकला लावा धीरे-धीरे ठंडा हुआ और सिकुड़ने की प्रक्रिया में उसमें प्राकृतिक दरारें विकसित हो गईं। परिणामस्वरूप पांच, छह और कहीं-कहीं आठ कोणों वाले लंबे स्तंभाकार पत्थर बन गए, जिन्हें आज भी इस क्षेत्र में देखा जा सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इन चट्टानों के भीतर की आंतरिक संरचना, घनत्व और प्राकृतिक रिक्त स्थान उन्हें कंपन करने की क्षमता प्रदान करते हैं। जब किसी विशेष पत्थर पर हल्की चोट की जाती है, तो उसके भीतर उत्पन्न कंपन कुछ क्षण तक घूमता रहता है और उसी के कारण घंटी जैसी धात्विक ध्वनि सुनाई देती है। यही वजह है कि इन्हें स्थानीय लोग ‘बजने वाले पत्थर’ भी कहते हैं।
भूवैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रकार की प्राकृतिक संरचनाएं दुनिया में बहुत कम स्थानों पर देखने को मिलती हैं। यदि इस क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन, संरक्षण और पर्यटन की दृष्टि से व्यवस्थित विकास किया जाए तो यह भू-पर्यटन (Geotourism) का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। प्रकृति, भूविज्ञान और पृथ्वी के करोड़ों वर्षों के इतिहास को समझने के इच्छुक लोगों के लिए कावड़िया पहाड़ किसी खुली प्रयोगशाला से कम नहीं है।