Oil and Gas Supply Crisis: तेल-गैस संकट से भारत के सामने बढ़ी ऊर्जा चुनौती
Oil and Gas Supply Crisis: होर्मुज क्षेत्र में तनाव और आपूर्ति बाधा से भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और रोजगार पर गहराने लगी चिंता।
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Oil and Gas Supply Crisis: अमेरिका द्वारा होर्मुज क्षेत्र की नाकेबंदी किए जाने के परिणामस्वरूप सम्पूर्ण विश्व में तेल व गैस की आपूर्ति बाधित हो गई है। भारत भी इस समस्या से प्रभावित है। वह अपने तेल की खपत का केवल 11-12 प्रतिशत का ही स्वयं उत्पादन कर पाता है और 89 प्रतिशत तेल विश्व के अन्य देशों से क्रय कर, अपनी मांग की पूर्ति कर पाता है। इसी प्रकार गैस का भी 50 प्रतिशत उत्पादन हम स्वयं कर पाते हैं और इतनी ही तरल गैस का आयात विदेशों से करते हैं। यदि हम तेल और गैस का आयात विदेशों से करने में असमर्थ रहते हैं तो हमारे देश में इन दोनों की आपूर्ति पूर्ण रूप से प्रभावित हो जाएगी।
वैश्विक संकट जिम्मेदार कौन
पश्चिम एशिया संघर्ष से यदि कोई देश सबसे अधिक प्रभावित है, तो वह भारत है। यदि इस समस्या का समाधान अतिशीघ्र नहीं खोजा गया तो निश्चितः जुलाई माह से भारत को उपरोक्त दोनों की पूर्ति हेतु विकट समस्या का सामना करना पड़ सकता है। निकट भविष्य में इस समस्या की त्रासदी को दूर करने का एकमात्र उपाय यही है कि होर्मुज जलडमरुमध्य को निर्बाध रूप से खोल दिया जाए। भारत के साथ-साथ, विश्व के अन्य कई देशों में भी तेल व गैस के भंडार समाप्तप्राय होते जा रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार विश्व के अनेक देशों में भंडारण केवल मात्र 20 प्रतिशत ही रह गया है क्यांेकि सभी देश अपनी दैनिक आवश्यकता की पूर्ति पर अपना ध्यान केन्द्रित किए हुए हैं और इसकी कमी को अपने भंडारण से पूर्ति कर रहे हैं। अर्थात् यदि प्रतिदिन की पूर्ति बाधित हो जाए तो अधिक से अधिक 1 माह में सभी देशों का तेल भंडारण समाप्त हो जायेगा और भारत जैसे देश में भी चक्का जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। भारत के कुछ स्थानों पर लोग अभी भी तेल और गैस की आपूर्ति के लिए पंक्तिबद्ध होकर प्रतीक्षारत हो रहे हैं। विश्व की वर्तमान विकट स्थिति के लिए एक ही व्यक्ति उत्तरदायी है, जिसे सम्पूर्ण विश्व डोनाल्ड ट्रम्प के नाम से जानता है, उसकी विस्तारवादी नीति ने सम्पूर्ण विश्व को गम्भीर स्थिति में पहुँचा दिया है।
अमेरिकी आक्रमण कितना सही
यदि वर्तमान स्थिति के कारणों पर दृष्टिपात करें तो ईरान पर अमेरिका द्वारा किया गया आक्रमण किसी भी दृष्टि से बुद्धिपूर्ण कृत्य नहीं था। मुस्लिम जाति अपने देश के रक्षार्थ कुर्बान होने के लिए तत्पर रहती है। मुसलमानों में जहाँ एक ओर अपने धर्म के प्रति कट्टरता का भाव होता हैं, वहीं दूसरी ओर उनमें देशभक्ति का भाव भी समाहित होता है, उन्होंने अपने इस देशभक्ति के भाव को ट्रम्प के साथ युद्ध में प्रमाणित भी कर दिया है। यही कारण है कि आज ट्रम्प, ईरान के समक्ष अपना वर्चस्व सिद्ध नहीं कर पा रहें हैं अपितु शनै-शनै नतमस्तक होते जा रहे हैं।
पीएम की अपील पर दिखावा ज्यादा
अब भारत के समक्ष चिंतन का प्रमुख विषय यह है कि यदि वर्तमान स्थिति हमारे अनुकूल नहीं हुई तो भावी परिस्थिति का सामना कैसे होगा। प्रधानमंत्री मोदी जी के तेल की खपत को कम करने की अपील का कितना प्रभाव जनता पर हुआ, यह तो निश्चित रूप से स्पष्ट नहीं किया जा सकता। परन्तु इस अपील के पश्चात् नेतागणों के अत्यधिक दिखावटी मुखौटे अर्थात् आडम्बर देखने को मिले। उन्होंने एक दिन साईकिल, स्कूटर व रिक्शा में बैठकर तथा फोटो खिचवाकर उन्हें वायरल किया और अपनी मिथयापूर्ण देश के प्रति निष्ठा से प्रधानमंत्री जी को प्रभावित करने का प्रयास किया। परन्तु सत्यता यह है कि निष्ठा आडम्बर से प्रमाणित नहीं होती है। देश के लिए समर्पण, त्याग तथा श्रृद्धा का भाव ही श्रेष्ठ राजनीति कहलाता है।
दो करोड़ भारतीय विदेशों में
भारत की लगभग 2 करोड़ जनता विदेशों में कार्यरत हैं। उनमें से लगभग आधे खाड़ी देशों में कार्यरत् हैं तथा अन्य शेष देशों में हैं। उन देशों की स्थिति अनियत्रित होने के कारण भारतीयों को स्वदेश लौटना पड़ रहा है। इसका दुष्परिणाम यह होगा कि भारत में बेरोजगारी और कानून व्यवस्था भी प्रभावित होगी, साथ-साथ विदेशी मुद्रा का आयात भी कम हो जायेगा। लेखक का अमेरिकी जनता से विनम्र आग्रह यह है कि वे स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर युद्ध को रोकने तथा होर्मुज को पुनः निर्बाध रूप से संचालित करने हेतु उन्हें विवश करें, ताकि विश्व में तेल व गैस की आपूर्ति पुनः प्रारम्भ हो जाए।