School Bus Fee Hike 2026: स्कूल बस फीस बढ़ी तो बिगड़ेगा बजट? महाराष्ट्र के बाद दूसरे राज्यों में भी बढ़ सकती हैं दरें
School Bus Fee Hike 2026: महाराष्ट्र में जून 2026 से स्कूल बस फीस में 15 फीसदी तक बढ़ोतरी की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य राज्यों में भी ऐसी मांग उठ सकती है।
School Bus Fee Hike 2026
School Bus Fee Hike 2026: डीजल-पैट्रोल की रफ्तार पकड़ती कीमतों के बीच अब एक और खर्च लोगों की जेब पर बोझ बढ़ाने को तैयार खड़ा है। गर्मी की छुट्टियों के बाद नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले लाखों अभिभावकों के लिए एक और महंगाई भरी खबर सामने आई है। महाराष्ट्र में स्कूल बस संचालकों ने जून 2026 से बस फीस में 15 फीसदी तक बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। इस फैसले का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जिनके बच्चे रोजाना स्कूल बस से सफर करते हैं। खास बात यह है कि बस ऑपरेटरों का कहना है कि केवल डीजल की बढ़ती कीमतें ही नहीं, बल्कि ड्राइवरों की सैलरी, बीमा, वाहन रखरखाव और अन्य खर्चों में लगातार बढ़ोतरी ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया है। ऐसे में संभावना है कि आने वाले महीनों में दूसरे राज्यों में भी स्कूल बसों का किराया तेजी पकड़ सकता है।
महाराष्ट्र में क्यों बढ़ाया गया स्कूल बस का किराया?
महाराष्ट्र स्कूल बस ओनर्स एसोसिएशन के अनुसार, जून 2026 से स्कूल बस फीस में 15 फीसदी तक वृद्धि लागू की जाएगी। एसोसिएशन का कहना है कि पिछले कई वर्षों से परिचालन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि किराए में उसी अनुपात में संशोधन नहीं किया गया था।
बस संचालकों ने दावा किया है कि उन्होंने राज्य सरकार, परिवहन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के सामने कई बार अपनी समस्याएं रखीं। इसके लिए ज्ञापन और प्रस्ताव भी सौंपे गए, लेकिन कोई ठोस राहत नहीं मिली। इसके बाद फीस बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
केवल पेट्रोल-डीजल नहीं, कई और खर्च में भी इजाफा
आमतौर पर किराया बढ़ने की वजह ईंधन की कीमतों को माना जाता है, लेकिन इस बार स्कूल बस ऑपरेटरों ने कई अन्य कारण भी गिनाए हैं।
उनके मुताबिक डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के अलावा ड्राइवर और हेल्पर के वेतन, वाहन बीमा, फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट फीस, टोल टैक्स, स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस पर होने वाला खर्च भी काफी बढ़ चुका है। इसके साथ ही ई-चालान और नियमों के उल्लंघन पर लगने वाले जुर्मानों ने भी परिचालन लागत बढ़ा दी है।
पैरेंट्स के बजट पर कितना पड़ेगा असर?
यदि किसी अभिभावक का बच्चा वर्तमान में 2,000 रुपये मासिक बस फीस देता है, तो 15 फीसदी बढ़ोतरी के बाद यह राशि लगभग 2,300 रुपये हो जाएगी। इसी तरह 3,000 रुपये मासिक फीस देने वाले परिवारों को करीब 450 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं।
एक बच्चे वाले परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी बड़ी समस्या नहीं लग सकती है, लेकिन जिन परिवारों के दो या तीन बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं, उनके मासिक शिक्षा खर्च में बड़ा इजाफा हो सकता है।
क्या दूसरे राज्यों में भी बढ़ सकता है स्कूल बस किराया?
परिवहन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि महाराष्ट्र की स्थिति केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है। देश के कई राज्यों में स्कूल बस ऑपरेटर लंबे समय से बढ़ती लागत की शिकायत कर रहे हैं।
दिल्ली, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी पिछले कुछ वर्षों में परिवहन लागत में लगातार वृद्धि हुई है। यदि ईंधन की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और परिचालन खर्च बढ़ता रहता है, तो अन्य राज्यों के स्कूल बस संचालक भी किराया संशोधन की मांग कर सकते हैं। किसी भी राज्य में किराया बढ़ाने का फैसला स्थानीय नियमों, स्कूल प्रबंधन और परिवहन विभाग की नीतियों पर निर्भर करता है।
स्कूलों और अभिभावकों के सामने क्या हैं विकल्प?
कई शहरों में अभिभावक अब कार-पूलिंग, साझा परिवहन और निजी वैन जैसी सेवाओं का विकल्प तलाश रहे हैं। वहीं कुछ स्कूल अपनी स्वयं की परिवहन सेवाएं संचालित करते हैं, जिससे फीस वृद्धि का असर सीमित रह सकता है। इस बारे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्कूलों, अभिभावकों और परिवहन संचालकों के बीच संवाद बढ़ाने की जरूरत है ताकि बढ़ती लागत और परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के बीच संतुलन बनाया जा सके।
शिक्षा खर्च पर लगातार बढ़ रहा दबाव
पिछले कुछ वर्षों में स्कूल फीस, किताबों, यूनिफॉर्म, स्टेशनरी और परिवहन जैसे लगभग सभी शिक्षा संबंधी खर्चों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। ऐसे में स्कूल बस किराए में 15 फीसदी वृद्धि उन परिवारों के लिए नई चुनौती बन सकती है जो पहले से ही बढ़ती महंगाई का सामना कर रहे हैं।
महाराष्ट्र में स्कूल बस किराया बढ़ाने का फैसला मौजूदा समय में चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि ईंधन और परिचालन लागत में राहत नहीं मिलती है, तो आने वाले महीनों में अन्य राज्यों के बस ऑपरेटर भी इसी तरह की मांग उठा सकते हैं। ऐसे में नया शैक्षणिक सत्र अभिभावकों के लिए चुनौती भरा साबित हो सकता है।