Aban Ahmed का शव देख फफक पड़े उमर और अली, पहली बार देखी अतीक-अशरफ और असद की कब्र

Aban Ahmed Funeral Prayagraj News: अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान अहमद को प्रयागराज में पिता और भाई की कब्र के पास सुपुर्द-ए-खाक किया गया। करीब चार साल बाद जेल से पैरोल पर आए उमर और अली छोटे भाई का शव देखकर फफक पड़े।

Update:2026-08-09 08:41 IST

Aban Ahmed Funeral Prayagraj News: माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान अहमद को शनिवार शाम प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में पिता अतीक अहमद और भाई असद की कब्र के पास सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। आबान को अंतिम विदाई देने के लिए करीब चार साल बाद जेल से पैरोल पर बाहर आए उसके बड़े भाई उमर अहमद और अली अहमद भी प्रयागराज पहुंचे। छोटे भाई का शव सामने आते ही दोनों भाई भावुक हो गए और फफक-फफक कर रो पड़े।

आबान के जनाजे में शामिल होने के लिए उमर को लखनऊ और अली को झांसी जेल से कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच प्रयागराज लाया गया था। दोनों के कब्रिस्तान पहुंचने की खबर मिलते ही वहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। भीड़ बढ़ने के बाद धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी की स्थिति बनी, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा।

छोटे भाई का शव देख भावुक हुए उमर और अली

करीब चार साल बाद जेल से बाहर आए उमर और अली ने जैसे ही छोटे भाई आबान का शव देखा, दोनों खुद को संभाल नहीं सके। दोनों भाई फफक-फफक कर रो पड़े। उन्होंने परिवार के सदस्यों और भाई अहजम को गले लगाकर ढांढस बंधाया।

इसके बाद उमर, अली और अहजम ने परिवार के अन्य करीबियों के साथ आबान के शव को कंधा दिया और उसे कब्र तक लेकर पहुंचे। अंतिम संस्कार के दौरान दोनों भाइयों ने पहली बार अपने पिता अतीक अहमद, चाचा अशरफ और भाई असद की कब्र भी देखी।

दरअसल, साल 2023 में अतीक अहमद, अशरफ और असद की मौत के समय उमर और अली जेल में बंद थे। इसी वजह से दोनों पिता, चाचा और भाई के जनाजे में शामिल नहीं हो सके थे।



Ali और Umar की एक झलक पाने के लिए भीड़ बेकाबू हो गई, जिसके लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। यहाँ देखिए भीड़ और अफरातफरी का यह Video -


एक घंटे तक परिवार से हुई मुलाकात

आबान को सुपुर्द-ए-खाक करने के बाद उमर और अली ने करीब एक घंटे तक पुलिस की निगरानी में परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। इसके लिए कब्रिस्तान की मस्जिद के सामने पहले से टेंट लगाया गया था। इसी टेंट में दोनों भाइयों की मुलाकात भाई अहजम, बुआ परवीन कुरैशी और परिवार के अन्य सदस्यों से कराई गई।

पूरे टेंट को पुलिस ने चारों तरफ से घेर रखा था। परिवार के करीबियों के मुताबिक, आबान परिवार का बेहद दुलारा था। वह महीने में दो-तीन बार झांसी जेल में बंद अपने भाई अली से मिलने जाता था।

अली से मिलने जा रहा था आबान, रास्ते में हुआ हादसा

परिवार के मुताबिक, आबान बीते गुरुवार सुबह अपने भाई अली से मिलने झांसी जेल जा रहा था। इसी दौरान हाईवे पर उसकी कार सड़क हादसे का शिकार हो गई। हादसे में आबान की मौत हो गई थी। इसके बाद उसके शव को प्रयागराज लाया गया और अंतिम संस्कार के लिए परिवार को सौंपा गया।

जेल से प्रयागराज तक पुलिस की कड़ी सुरक्षा

हाईकोर्ट से पैरोल मिलने के बाद शनिवार सुबह करीब 10 बजे उमर को लखनऊ जेल और अली को झांसी जेल से प्रिजन वैन में प्रयागराज के लिए रवाना किया गया। दोनों को कड़ी सुरक्षा के बीच कसारी-मसारी कब्रिस्तान तक लाया गया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रिजन वैन से कुछ दूरी पर एक दर्जन से ज्यादा निजी गाड़ियों का काफिला भी चलता रहा। बताया गया कि काफिले में कुछ वाहनों पर नंबर प्लेट तक नहीं लगी थी। हालांकि, अलग-अलग जिलों की सीमा में स्थानीय पुलिस की फ्लीट टीम सुरक्षा व्यवस्था में शामिल होती रही।


आबान की अंतिम विदाई के साथ एक परिवार के लिए यह दिन बेहद भावुक रहा। जेल में होने के कारण वर्षों से अपने पिता, चाचा और भाई की कब्र न देख पाने वाले उमर और अली ने शनिवार को पहली बार उन कब्रों के सामने खड़े होकर अपने छोटे भाई को भी अंतिम विदाई दी।

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