Aligarh News: इजराइल से रूस तक बनाई धाक, 3639 करोड़ विदेशी मुद्रा से एक्सपोर्ट क्लस्टर बनेगा
Aligarh News: अलीगढ़ की कृषि उपज ने इजराइल से रूस तक पहचान बनाई है। 3639 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित हुई, अब आलू-चावल एक्सपोर्ट क्लस्टर बनेगा।
Aligarh News(Photo-Social Media)
Aligarh News: जिले के किसानों की मेहनत अब सात समंदर पार रंग ला रही है। मुख्य विकास अधिकारी योगेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में हुई जिलास्तरीय क्लस्टर सुविधा इकाई की बैठक में यह आंकड़ा सामने आया कि सिर्फ जुलाई 2026 तक अलीगढ़ ने 92 हजार टन से ज्यादा कृषि उत्पादों का निर्यात कर 3639.453 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा कमा ली है।
मगलवार को उत्तर प्रदेश कृषि निर्यात नीति और भौगोलिक उपदर्शन (GI) समिति एवं एपीडा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित क्षमता संवर्धन सह जागरूकता कार्यक्रम में सीडीओ ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि जिले से अधिक से अधिक कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर बनाए जाएं और किसानों को जागरूक किया जाए।
बैठक का संचालन ज्येष्ठ कृषि विपणन निरीक्षक एवं क्लस्टर इकाई के सदस्य सचिव भगवती प्रसाद ने किया। उन्होंने बताया कि शासन ने अलीगढ़ के लिए गेहूं, बाजरा, मक्का, धान, सरसों, आलू, हरी सब्जियां, आम-अमरूद और पशु-डेयरी उत्पादों को निर्यात के लिए चिन्हित किया है। किसान, FPO और FPC मिलकर एक विकास खंड में कम से कम 50 हेक्टेयर भूमि का क्लस्टर बनाकर अपनी उपज का सीधे निर्यात कर सकते हैं। इसके लिए सरकार कई तरह के प्रोत्साहन और अनुदान दे रही है।
पिछले साल 6495 करोड़ का रिकॉर्ड
भगवती प्रसाद ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले से बफेलो मीट, इंस्टेंट चिकोरी पाउडर, रोस्टेड चिकोरी पाउडर, आलू, प्रोसेस्ड आलू पाउडर और आलू फ्लेक्स का कुल 2,05,661.387 मीट्रिक टन निर्यात हुआ था। यह निर्यात इजराइल, ब्राजील, इंडोनेशिया, मलेशिया, ईरान, इराक, सऊदी अरब, दुबई, जॉर्डन, रूस और बहरीन जैसे देशों में किया गया, जिससे 6495.245 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित हुई। इस साल तो जुलाई तक ही 92253.448 मीट्रिक टन निर्यात हो चुका है।
बैठक में बताया गया कि जिले से बासमती चावल GI पंजीकृत उत्पाद है, जिसके अब तक 600 से अधिक अधिकृत उपयोगकर्ता बनाए जा चुके हैं। GI टैग अंतरराष्ट्रीय बाजार में ट्रेड मार्क की तरह काम करता है, जिससे न सिर्फ निर्यात को बढ़ावा मिलता है। बल्कि उत्पाद के अनाधिकृत इस्तेमाल पर भी रोक लगती है। अधिकृत किसानों को कानूनी संरक्षण भी मिलता है। मेसर्स अलीगढ़ सीड्स फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी का बासमती चावल क्लस्टर का आवेदन तहसील स्तर पर भौतिक सत्यापन में है, जिसे जल्द मंजूरी दिलाकर निर्यात शुरू कराया जाएगा।
सीडीओ योगेन्द्र कुमार ने निर्देश दिया कि आलू और बासमती धान के ज्यादा से ज्यादा क्लस्टर बनवाए जाएं और बासमती के अधिकृत उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि अधिकारी फील्ड में जाकर किसानों की शंकाओं को दूर करें और निर्यात नीति का लाभ हर किसान तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करें।
एपीडा के व्यवसाय विकास प्रबंधक सत्येंद्र सिंह लोधी ने डीजीएफटी पोर्टल से IEC कोड और एपीडा पंजीकरण की प्रक्रिया, निर्यात की औपचारिकताओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों, क्रेता-विक्रेता सम्मेलनों में भागीदारी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बैठक में उप निदेशक कृषि अरुण कुमार चौधरी, जिला कृषि अधिकारी धीरेन्द्र सिंह चौधरी, जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी, FPO/FPC संचालक और निर्यातक मौजूद रहे।