Auraiya News: किसानों को प्राकृतिक खेती का मंत्र, कम लागत में आय बढ़ाने के बताए आसान तरीके

Auraiya News: औरैया में किसानों को प्राकृतिक खेती से लागत घटाने, फसल विविधीकरण और प्रसंस्करण के जरिए आमदनी बढ़ाने के व्यावहारिक टिप्स दिए गए।

Update:2026-08-09 10:23 IST

Auraiya Natural Farming News

Auraiya News: औरैया में अपेक्षा महिला एवं बाल विकास समिति की ओर से किसानों के लिए जैविक एवं प्राकृतिक कृषि विषय पर दो दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का शुभारंभ समिति की सचिव रीना पाण्डेय ने किया। उन्होंने प्रतिभागी किसानों का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रशिक्षण में कानपुर से आए संदर्भ व्यक्ति जितेंद्र कुमार ने किसानों से परिचय प्राप्त किया और खेती से जुड़ी उनकी समस्याओं, अपेक्षाओं एवं चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि खेती को केवल उत्पादन बढ़ाने के नजरिए से नहीं देखना चाहिए, बल्कि प्रकृति, उपलब्ध संसाधनों, लागत और आमदनी के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना जरूरी है।

जितेंद्र कुमार ने किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि धरती, जल, जंगल, हवा, सूर्य का प्रकाश और बारिश जैसे संसाधन प्रकृति से पहले से ही उपलब्ध हैं। किसान का सबसे महत्वपूर्ण योगदान उसकी बुद्धि और मेहनत है। ऐसे में स्थानीय एवं प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर खेती की लागत कम की जा सकती है।

प्रशिक्षण के दौरान रासायनिक खाद और बाहरी कृषि इनपुट पर अत्यधिक निर्भरता से होने वाले नुकसान पर भी चर्चा हुई। किसानों को बताया गया कि लगातार रासायनिक संसाधनों के इस्तेमाल से मिट्टी के स्वास्थ्य, खेती की लागत और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके स्थान पर प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया गया।

किसानों को फसल विविधीकरण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के जरिए अतिरिक्त आय बढ़ाने के तरीके भी बताए गए। उदाहरण के तौर पर गन्ने से रस और गुड़ तैयार करने के साथ उसमें सोंठ, मूंगफली और मोरिंगा जैसे फ्लेवर जोड़कर उत्पाद का मूल्य बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसके लिए गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ से प्रशिक्षण प्राप्त करने की जानकारी भी दी गई।

इसके अलावा किसानों को खेत की मेड़ और छोटे क्षेत्रों में परवल, सेम, हल्दी, सूरन, विभिन्न सब्जियां और पपीता जैसी फसलें लगाने के सुझाव दिए गए। इससे मुख्य फसल के साथ अतिरिक्त आमदनी अर्जित की जा सकती है।

प्रशिक्षक ने कहा कि “मोटिवेशन नहीं, ट्रांसफॉर्मेशन जरूरी है।” उन्होंने किसानों से छोटे-छोटे प्रयोग करने और उनके परिणामों के आधार पर खेती में बदलाव लाने का आह्वान किया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों की लागत घटाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और कृषि आय बढ़ाने के व्यावहारिक उपायों से जोड़ना रहा।

Tags:    

Similar News