Chitrakoot News: चंदेलकालीन सोमनाथ मंदिर का होगा कायाकल्प, पहले चरण में 50 लाख रुपये मंजूर
Chitrakoot News: चित्रकूट के चर गांव स्थित चंदेलकालीन ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए पहले चरण में 50 लाख रुपये मंजूर हुए हैं। राज्य पुरातत्व विभाग जल्द काम शुरू करेगा।
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Chitrakoot News: भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। मानिकपुर तहसील क्षेत्र के चर गांव में बाल्मीकि नदी के किनारे स्थित चंदेलकालीन ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए शासन स्तर से 50 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। अनुरक्षण योजना के तहत स्वीकृत इस राशि से मंदिर के संरक्षण का पहला चरण पूरा कराया जाएगा।राज्य पुरातत्व विभाग जल्द ही मंदिर परिसर में संरक्षण कार्य शुरू करेगा। प्रथम चरण में मंदिर परिसर की वैज्ञानिक तरीके से साफ-सफाई कराई जाएगी। इसके साथ ही पुरातात्विक महत्व के दबे हुए अवशेषों की जानकारी जुटाने के लिए निर्धारित स्थानों पर खुदाई कराई जाएगी। प्राप्त अवशेषों की साफ-सफाई के साथ उनका अभिलेखीकरण भी किया जाएगा, जिससे मंदिर के ऐतिहासिक स्वरूप और पुरातात्विक महत्व को सुरक्षित रखा जा सके।
ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर चंदेलकाल में निर्मित माना जाता है। मंदिर परिसर में कई छोटे देवालयों के अवशेष आज भी मौजूद हैं, जो इसके प्राचीन और धार्मिक महत्व को दर्शाते हैं। मंदिर में स्थापित अद्भुत शिवलिंग श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। सावन माह में प्रत्येक सोमवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।बताया जाता है कि मंदिर की स्थापत्य शैली गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर से मिलती-जुलती है। यही वजह है कि यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ इतिहास और पुरातत्व की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
अगले चरण में होगा व्यापक विकास
मंदिर के प्रथम चरण के कार्य के बाद अगले चरण में व्यापक जीर्णोद्धार और स्थलीय विकास की योजना प्रस्तावित है। इसमें मंदिर परिसर के संरक्षण के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जाएगा।जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने मंदिर के व्यापक जीर्णोद्धार को लेकर संबंधित अधिकारियों को भूभाग की पैमाइश और सीमांकन कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि संरक्षण और निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ कराया जाए। साथ ही मंदिर परिसर के स्थलीय विकास के लिए भी प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखते हुए चित्रकूट के धार्मिक और पर्यटन महत्व को और बढ़ाया जा सके।