बुखार से तपते बच्चे स्ट्रेचर पर, एक बेड पर दो मरीज; फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य व्यवस्था पर
Firozabad Medical College में वायरल फीवर के बढ़ते मामलों के बीच बच्चों का स्ट्रेचर पर इलाज और ट्रॉमा सेंटर में एक बेड पर दो मरीजों के उपचार से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठे।
Firozabad News: बदलते मौसम के साथ वायरल फीवर और मौसमी संक्रमण का प्रकोप बढ़ने से फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ गई है। बच्चों की बढ़ती भीड़ और सीमित बेड व्यवस्था के चलते अस्पताल में इलाज की सुविधाएं दबाव में नजर आ रही हैं। कहीं बुखार से तपते बच्चों का स्ट्रेचर और बेंच पर इलाज किया जा रहा है तो कहीं ट्रॉमा सेंटर में एक ही बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। इससे मरीजों की परेशानी के साथ संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
रोजाना 450 से 500 बच्चे पहुंच रहे ओपीडी
मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में रोजाना करीब 450 से 500 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें तेज बुखार, खांसी, जुकाम, गले में खराश, सीने में जकड़न और दस्त की शिकायत वाले बच्चों की संख्या अधिक है। बुधवार को बाल रोग ओपीडी में 400 से अधिक बच्चे पहुंचे, जिनमें करीब 20 को भर्ती कराया गया। वहीं, 75 से अधिक बच्चे पहले से विभिन्न वार्डों में भर्ती थे।
सौ शैय्या अस्पताल के पांचों वार्ड फुल होने के कारण कई बच्चों को बेड के बजाय स्ट्रेचर और बेंच पर ही उपचार देना पड़ा। पीआईसीयू में तेज बुखार, झटके और सांस लेने में परेशानी से जूझ रहे नौ बच्चों का इलाज चल रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक कुछ बच्चों में निमोनिया की पुष्टि भी हुई है, जबकि कई बच्चे बलगम के कारण सांस लेने में परेशानी से जूझ रहे हैं।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एलके गुप्ता ने बताया कि वायरल फीवर और मौसमी संक्रमण से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने अभिभावकों को बच्चों की उचित देखभाल करने और लक्षण दिखाई देने पर समय से उपचार कराने की सलाह दी है।
ट्रॉमा सेंटर में एक बेड पर दो मरीज
बच्चों के वार्डों में बेड की कमी के बीच मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में भी अव्यवस्था का मामला सामने आया है। उमस भरी गर्मी के बीच जनरल वार्ड में एक ही बेड पर दो-दो मरीजों का उपचार किए जाने से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ट्रॉमा सेंटर में सड़क हादसों, मारपीट और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के अलावा मौसमी बीमारियों से प्रभावित लोगों की संख्या भी बढ़ रही है। बुधवार को डायरिया से पीड़ित एक महिला के बेड पर बाद में सांस की गंभीर समस्या वाली दूसरी महिला को भी भर्ती कर दिया गया। इसी तरह पेट दर्द और जलन से परेशान एक महिला के साथ एक पुरुष मरीज को भी एक ही बेड पर उपचार दिया गया। वार्ड के बाहर रखे बेड पर भी दो मरीजों के इलाज की स्थिति दिखाई दी।
संक्रमण का खतरा, शिकायतों के बावजूद सुधार पर सवाल
एक ही बेड पर दो मरीजों को रखने से न केवल मरीजों को असुविधा हो रही है, बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है। तीमारदारों का आरोप है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
मामले में मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. नवीन जैन ने कहा कि उन्हें एक बेड पर दो मरीजों के उपचार की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा हुआ है तो मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बढ़ते मौसमी संक्रमण के बीच अस्पताल में मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि सीमित बेड और संसाधनों के बीच मरीजों को सुरक्षित और संक्रमण-मुक्त उपचार उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।