Hapur News :हापुड़ में कार बेची, पर जिम्मेदारी नहीं छूटी! हादसे के बाद अधिवक्ता फंसे
Hapur News : हापुड़ में कार बिक्री के बाद नामांतरण न होने से हादसे में मौत, कोर्ट आदेश पर Car24 और अन्य पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज।
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Hapur News: ऑनलाइन वाहन बिक्री के बाद भी कार का नामांतरण न कराने और उसी वाहन से हुए एक घातक सड़क हादसे में मौत होने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जनपद के एक अधिवक्ता की शिकायत पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के आदेश के बाद कोतवाली नगर पुलिस ने वाहन खरीद-बिक्री से जुड़ी नामी कंपनी, उसके अधिकारियों और चैनल पार्टनर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला केवल वाहन ट्रांसफर में देरी का नहीं, बल्कि उस कथित लापरवाही का है जिसके चलते एक सड़क दुर्घटना में जान जाने के बाद कानूनी जिम्मेदारी का बोझ उस व्यक्ति पर आ गया, जिसने महीनों पहले ही अपनी कार बेच दी थी।
ऑनलाइन बेची थी कार, कंपनी ने दिया था सुरक्षा का भरोसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आवास विकास कॉलोनी निवासी अधिवक्ता विकास कुमार त्यागी के अनुसार उन्होंने 26 सितंबर 2025 को अपनी कार एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बेची थी। वाहन की सुपुर्दगी हापुड़ में कंपनी को सौंप दी गई थी। 28 सितंबर 2025 को कंपनी द्वारा जारी वाहन प्राप्ति रसीद में स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया गया था कि जब तक वाहन का पंजीकरण (आरसी) नए खरीदार के नाम स्थानांतरित नहीं हो जाता, तब तक वाहन से जुड़े सभी दायित्व कंपनी के होंगे। अधिवक्ता का कहना है कि कंपनी की "सेलर प्रोटेक्शन पॉलिसी" के तहत कानूनी सुरक्षा, मुकदमेबाजी में सहायता और वाहन से संबंधित जोखिमों से संरक्षण का भी भरोसा दिया गया था। वाहन सौंपने के बाद उनका उस पर किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं रहा।
छह महीने बाद आया पुलिस का फोन, हादसे में हो चुकी थी मौत
मामले ने उस समय गंभीर रूप ले लिया जब एक मई 2026 को शाहजहांपुर जिले के थाना कटरा पुलिस की ओर से अधिवक्ता से संपर्क किया गया। पुलिस ने बताया कि उनकी पुरानी कार 18 मार्च 2026 को हुए एक सड़क हादसे में शामिल थी।इस दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ था। चौंकाने वाली बात यह रही कि वाहन का पंजीकरण रिकॉर्ड अभी भी अधिवक्ता विकास कुमार त्यागी के नाम पर दर्ज था। ऐसे में जांच एजेंसियों ने वाहन स्वामी के रूप में उनसे संपर्क किया।
कंपनी ने माना, चैनल पार्टनर को सौंप दी गई थी कार
शिकायत के अनुसार बाद में कंपनी ने ईमेल के माध्यम से स्वीकार किया कि वाहन उसके चैनल पार्टनर अफसरून उर्फ जेनिब कार को सौंप दिया गया था। इसके बावजूद न तो वाहन का नामांतरण कराया गया और न ही आरसी में स्वामित्व परिवर्तन दर्ज कराया गया।आरोप है कि वाहन को तीसरे पक्ष के कब्जे में देने के बाद भी उसे पुराने मालिक के नाम पर ही सड़कों पर चलाया जाता रहा। अधिवक्ता का दावा है कि इससे उन्हें न केवल कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा बल्कि एक गंभीर आपराधिक मामले में भी उनका नाम जुड़ने का खतरा पैदा हो गया।
धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का आरोप
पीड़ित अधिवक्ता ने कंपनी, उसके अधिकारियों और चैनल पार्टनर पर धोखाधड़ी, विश्वासघात और लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि लिखित आश्वासन के बावजूद कंपनी ने वाहन का नामांतरण नहीं कराया और अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया।मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर कोतवाली नगर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस ने शुरू की गहन जांच
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मनीष चौहान ने बताया कि अदालत के आदेश के अनुपालन में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच के दौरान कंपनी के रिकॉर्ड, वाहन हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज, चैनल पार्टनर से संबंधित अभिलेख, ईमेल संवाद और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाएगी।पुलिस यह भी पता लगाएगी कि वाहन का वास्तविक उपयोगकर्ता कौन था, नामांतरण में देरी क्यों हुई और दुर्घटना के समय वाहन किसके कब्जे में था।
वाहन बेचने वालों के लिए बड़ा सबक
यह मामला उन हजारों लोगों के लिए भी चेतावनी माना जा रहा है जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अपने वाहन बेचते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल वाहन की डिलीवरी देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि आरसी ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी होने तक नियमित रूप से उसकी निगरानी करना जरूरी है। क्योंकि किसी भी दुर्घटना, अपराध या कानूनी विवाद की स्थिति में वाहन रिकॉर्ड में दर्ज मालिक को ही सबसे पहले जवाब देना पड़ता है।
अब इस मामले में पुलिस जांच के निष्कर्ष और अदालत की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला ऑनलाइन वाहन कारोबार से जुड़ी जवाबदेही और उपभोक्ता सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।