विवादों में IAS रिंकू सिंह राही: भगत सिंह पर कथित टिप्पणी से बवाल, उठक-बैठक से इस्तीफे तक रहा विवादो से नाता

IAS रिंकू सिंह राही एक बार फिर विवादों में हैं। उरई में भगत सिंह पर कथित टिप्पणी का वीडियो वायरल होने के बाद बवाल मचा है। जानिए उनके पुराने विवादों और प्रशासनिक कार्रवाई का पूरा मामला।

Update:2026-08-17 20:42 IST

IAS Rinku Singh Rahi (Image Credit-Social Media)

उरई (जालौन): उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही अपने बयानों और अनोखे तौर-तरीकों के चलते एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उरई कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमर शहीद भगत सिंह को लेकर की गई उनकी कथित टिप्पणी का वीडियो वायरल होते ही नया बखेड़ा खड़ा हो गया है। वीडियो में वह शहीद-ए-आजम भगत सिंह को लेकर विवादित बातें कहते सुनाई दे रहे हैं, जिस पर सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब रिंकू सिंह राही अपनी कार्यशैली या टकरावों को लेकर चर्चा में आए हों। पिछले एक साल के दौरान उनके नाम से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल विवाद सामने आए हैं, जिसके चलते उनका प्रशासनिक सफर लगातार उतार-चढ़ाव भरा रहा है।

ब्लॉक प्रमुख से धक्का-मुक्की और छिना था एसडीएम का चार्ज

जालौन में एसडीएम पद पर तैनाती के दौरान उनका स्थानीय भाजपा ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन से टकराव हो गया था। 'बेतवा आइस एंड कोल्ड स्टोरेज' के निरीक्षण के दौरान दोनों पक्षों में तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई थी, जिसका सीसीटीवी फुटेज काफी चर्चा में रहा। ब्लॉक प्रमुख ने अधिकारी पर दुर्व्यवहार और हाथापाई के आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। इस विवाद के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें एसडीएम पद से हटाकर न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर स्थानांतरित कर दिया था।

जब वकीलों के सामने लगानी पड़ी थी उठक-बैठक

इससे पहले शाहजहांपुर के पुवायां में एसडीएम पद पर रहते हुए भी उनका एक वीडियो खूब वायरल हुआ था। तहसील परिसर में खुले में पेशाब करने वाले एक व्यक्ति को एसडीएम द्वारा सजा के तौर पर उठक-बैठक लगवाने के बाद स्थानीय अधिवक्ता भड़क गए थे। वकीलों के उग्र विरोध और बढ़ते दबाव के बीच रिंकू सिंह राही ने स्वयं वकीलों के सामने कान पकड़कर उठक-बैठक लगाई और माफी मांगी थी। इस घटना के तुरंत बाद शासन ने उन्हें पद से हटाकर राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया था।

इस्तीफे की पेशकश और साइडलाइन किए जाने का आरोप

लगातार विवादों और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच अधिकारी ने शासन द्वारा खुद को लंबे समय तक साइडलाइन किए जाने और उपेक्षा का आरोप लगाते हुए सेवा से इस्तीफे की पेशकश कर दी थी। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया था।

अब स्वतंत्रता दिवस जैसे गरिमामयी अवसर पर देश के महानायक भगत सिंह पर दिए गए कथित बयान ने उनकी मुश्किलें फिर बढ़ा दी हैं। जहां एक वर्ग इसे उनकी लीक से हटकर बात करने की आदत से जोड़कर देख रहा है, वहीं राष्ट्रीय नायक पर की गई इस टिप्पणी को लेकर जनता और बुद्धिजीवियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। फिलहाल इस पूरे मामले पर शासन और जिला प्रशासन के आधिकारिक रुख का इंतजार किया जा रहा है।

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