नेशनल पीजी कॉलेज में स्वच्छता सेवा पखवाड़ा: एनएसएस कार्यक्रम में 310 छात्रों ने दिखाया उत्साह
नेशनल पीजी कॉलेज में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक आयोजित स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई ने स्वच्छोत्सव थीम पर राष्ट्रीय सेवा योजना स्थापना दिवस का आयोजन किया।
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Lucknow Today News: नेशनल पीजी कॉलेज में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक आयोजित स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई ने स्वच्छोत्सव थीम पर राष्ट्रीय सेवा योजना स्थापना दिवस का आयोजन किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह और एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारियों प्रो. पीके सिंह, डॉ. अर्चना सिंह, और डॉ. कीर्ति श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में एक भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ।
प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों की उत्साही भागीदारी
इस आयोजन में छात्राओं ने विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग क्विज में सक्रिय भागीदारी की। साथ ही स्वयंसेवकों के व्यक्तित्व और सृजनात्मक क्षमताओं के विकास हेतु पोस्टर निर्माण, गायन, नृत्य, और क्विज प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया। प्राचार्य महोदय ने प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र और पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।
अनुभव साझा करतीं पूर्व एनएसएस स्वयंसेविका
कार्यक्रम के दौरान गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने वाली पूर्व एनएसएस स्वयंसेविका अनुष्का ने अपने प्रेरणादायक अनुभव साझा किए और उपस्थित स्वयंसेवकों को राष्ट्रीय सेवा योजना की गतिविधियों एवं उपलब्धियों से अवगत कराया। उनका संदेश स्वयंसेवकों में देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने वाला था।
कार्यक्रम का संचालन और संयोजन
कार्यक्रम का संचालन स्वयंसेविका अंकिता रस्तोगी ने किया, जबकि आयोजन का सफल संयोजन कार्तिकेय दीक्षित, अनुज, सुकृति, सार्थक, विदुषी, मानवी, मुस्कान और अर्पित द्वारा किया गया। कार्यक्रम में 310 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इस आयोजन ने न केवल स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद की, बल्कि स्वयंसेवकों के सामाजिक उत्तरदायित्व बोध और नेतृत्व क्षमता को भी निखारा।
निर्णायक मंडल में इन विशेषज्ञों का योगदान
कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं में डॉ. निशी रस्तोगी, डॉ. रीना श्रीवास्तव, डॉ. गौरवी और डॉ. कीर्ति श्रीवास्तव ने निर्णायक मंडल के रूप में कार्य किया, जिनके निष्पक्ष मूल्यांकन से कार्यक्रम की गुणवत्ता और समृद्ध हुई। वहीं यह कार्यक्रम न केवल स्वच्छता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, बल्कि यह स्वयंसेवकों के लिए एक सीखने और प्रेरणा का स्रोत भी बन गया।