प्रतापगढ़ हत्याकांड: मृतक के परिवार की मदद के लिए योगी सरकार ने किए कई अहम फैसले

प्रतापगढ़ में सौरभ विश्वकर्मा हत्या मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार होकर जेल भेजे गए। योगी सरकार ने मृतक के परिवार की मदद और सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए।

Update:2026-08-16 23:02 IST

Saurabh Vishwakarma Murder Pratapgarh: प्रतापगढ़ में नागरिक आपूर्ति विभाग में संविदा पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर सौरभ विश्वकर्मा उर्फ मोनू की 13 अगस्त को आपसी विवाद और रंजिश के चलते हुई हत्या के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। सौरभ अपने पीछे पत्नी और एक बच्ची समेत परिवार छोड़ गए हैं। घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

मृतक के परिवार को न्याय दिलाने के साथ-साथ उसकी पत्नी और बच्ची के भविष्य को देखते हुए प्रदेश सरकार ने आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई कदम उठाए हैं। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि पीड़ित परिवार को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के साथ मामले में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

तीन आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी

मृतक के पिता मोतीलाल विश्वकर्मा की तहरीर के आधार पर लीलापुर थाने में मुकदमा संख्या 279/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक मामले में अब तक तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी को न्यायालय के समक्ष पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।

घटना में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी है और उनकी गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ भी नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पीड़ित के पिता मोतीलाल विश्वकर्मा की तहरीर के आधार पर थाना लीलापुर में मु.अ.सं. 279/2026 के अंतर्गत संबंधित धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर घटना में अब तक कुल 03 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर जेल भेजा जा चुका है। घटना में संलिप्त अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीमों का गठन किया गया है तथा उनकी शीघ्र गिरफ्तारी के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। शेष अभियुक्तों के विरुद्ध भी नियमानुसार आवश्यक एवं कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रकरण में संबंधित अभियुक्तों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए जाने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।

योगी सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार जिला प्रशासन ने दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ित परिवार की वर्तमान परिस्थितियों और भविष्य की आवश्यकताओं को भी प्राथमिकता दी है। परिजनों से संवाद कर उनकी आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं को समझते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।

बच्ची की शिक्षा की दीर्घकालिक व्यवस्था

पीड़ित परिवार की इच्छा के अनुसार मृतक की बच्ची जिस विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करना चाहती है, उस विद्यालय के खाते में 05 वर्षों की एकमुश्त फीस जिला प्रशासन द्वारा जमा कराई जाएगी। इससे परिवार पर आई आकस्मिक विपदा का प्रभाव बच्ची की शिक्षा पर नहीं पड़ेगा और उसकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रह सकेगी।

मृतक की पत्नी को रोजगार

पीड़ित परिवार की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मृतक की पत्नी को संविदा पर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे परिवार को नियमित आय का एक साधन प्राप्त होगा और भविष्य में उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

बच्ची के भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा

जिला प्रशासन के निर्देशानुसार जनपद के राज्य कर्मचारियों के एक दिन के वेतन से प्राप्त धनराशि को मृतक की बच्ची के नाम फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में सुरक्षित किया जाएगा। यह पहल बच्ची के दीर्घकालिक भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

परिवार के लिए कृषि भूमि

पीड़ित परिवार की दीर्घकालिक आजीविका एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता को ध्यान में रखते हुए उनके नाम कृषि भूमि का पट्टा किए जाने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। योगी सरकार मानती है कि इस घटना में पीड़िक परिवार को हुई क्षति की भरपाई संभव नहीं है। लेकिन, जिला प्रशासन का दायित्व है कि पीड़ित परिवार को अकेला महसूस न होने दिया जाए और यथासंभव मदद के जरिये उन्हें यह विश्वास दिलाया जाए कि राज्य उनके साथ खड़ा है।

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