Raebareli News: अखिलेश यादव के खिलाफ लगे विवादित पोस्टर, सपा कार्यकर्ताओं में भारी उबाल, जांच में जु

Raebareli News: रायबरेली में अखिलेश यादव के खिलाफ विवादित पोस्टर लगने से सपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश, पुलिस जांच में जुटी।

Update:2026-06-22 11:28 IST

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Raebareli News: उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में उस वक्त सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब शहर के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खिलाफ रातों-रात कई विवादित पोस्टर लगा दिए गए। इन पोस्टरों में सपा और यादव समाज को लेकर कई गंभीर और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं, जिससे भड़के सपा कार्यकर्ताओं ने शहर कोतवाली में जोरदार हंगामा किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

​पोस्टरों में क्या है?

​अज्ञात लोगों द्वारा लगाए गए इन पोस्टरों में पुरानी खबरों की कटिंग्स के साथ सीधे तौर पर सपा की कार्यशैली पर निशाना साधा गया है। पोस्टरों में लिखे कुछ प्रमुख नारे इस प्रकार हैं:

​पहला पोस्टर: "लाल टोपी, साइकिल निशान, यादव वाद इनकी पहचान।" इसके साथ ही यूपीपीएससी के पूर्व चेयरमैन अनिल यादव की नियुक्ति से जुड़ी एक पुरानी खबर की कटिंग भी लगाई गई है।

​दूसरा पोस्टर: "सिपाही हो या लेखपाल, एक जाति हुई मालामाल।"

​तीसरा पोस्टर: "पीएफ है नाम का भाई, यादव वाद है अपनी कमाई।" इसमें सपा नेताओं से जुड़े पुराने विवादों और प्रशासनिक नियुक्तियों पर कटाक्ष किया गया है।

यह सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश" — सपा नेता

​पोस्टर वॉर की जानकारी मिलते ही समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी फैल गई। सपा पदाधिकारियों का कहना है कि यह विपक्षियों की एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है। ​"यह सिर्फ किसी नेता का विरोध नहीं है, बल्कि समाज में जातिवाद का जहर घोलने और आपसी सौहार्द को बिगाड़ने का घटिया प्रयास है। चुनाव या राजनीतिक मुद्दों पर बहस हो सकती है, लेकिन इस तरह की ओछी हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" — स्थानीय सपा नेता

सीसीटीवी फुटेज खंगालने की मांग

​शहर के सबसे व्यस्त और प्रमुख चौराहों पर रातों-रात इतने बड़े पैमाने पर पोस्टर किसने और किसके इशारे पर लगाए, यह अभी भी एक बड़ा रहस्य बना हुआ है। स्थानीय लोगों और सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिन जगहों पर ये पोस्टर लगे हैं, वहां पुलिस के और निजी प्रतिष्ठानों के कई सीसीटीवी कैमरे मौजूद हैं। यदि प्रशासन गंभीरता से जांच करे, तो फुटेज के जरिए आरोपियों का चेहरा बेनकाब होने में वक्त नहीं लगेगा।

मौजूदा स्थिति

​फिलहाल, इस मामले ने जिले की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल मुस्तैद है। अब देखना यह होगा कि पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कितनी जल्दी इन 'पोस्टरबाजों' को सलाखों के पीछे पहुंचाती है।

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