Sonbhadra News: 533 दिन से आंदोलनरत बिजली कर्मियों का सरकार पर बड़ा हमला, आर-पार की चेतावनी

Sonbhadra News: सोनभद्र में बिजली कर्मियों ने निजीकरण और कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। आंदोलन तेज करने और आर-पार की लड़ाई की चेतावनी दी।

Update:2026-05-14 18:46 IST

 533 दिन से आंदोलनरत बिजली कर्मियों का सरकार पर बड़ा हमला, आर-पार की चेतावनी (Photo- Newstrack)

Sonbhadra News: सोनभद्र। निजीकरण और कर्मचारियों पर हो रही कार्रवाई के विरोध में बिजली कर्मियों का आक्रोश गुरुवार को मध्यांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय पर खुलकर सामने आया। गोखले मार्ग स्थित मुख्यालय पर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पहुंचे बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रबंधन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में कर्मचारियों ने साफ कहा कि यदि आंदोलन से जुड़ी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई वापस नहीं ली गई तो प्रदेशभर में आंदोलन और उग्र किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने निजीकरण के फैसले को बिजली विभाग और उपभोक्ताओं दोनों के हितों के खिलाफ बताया।

तीन साल बाद भी नहीं पूरी हुई घोषणा

संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि मार्च 2023 के आंदोलन के बाद ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भरोसा दिलाया था कि आंदोलन से जुड़े कर्मचारियों पर की गई सभी कार्रवाई समाप्त कर दी जाएगी, लेकिन तीन वर्ष से अधिक समय गुजरने के बावजूद अब तक आदेश लागू नहीं हुआ। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी और असंतोष व्याप्त है।

नेताओं ने आरोप लगाया कि शासन स्तर पर आश्वासन मिलने के बाद भी कर्मचारियों का उत्पीड़न जारी है, जिससे ऊर्जा निगमों में लगातार तनाव का माहौल बना हुआ है।


533 दिनों से जारी है आंदोलन

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि पिछले 533 दिनों से कर्मचारी लगातार शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन चला रहे हैं। उपभोक्ताओं को किसी तरह की दिक्कत न हो, इसलिए कार्यालय समय समाप्त होने के बाद ही धरना, सभा और प्रदर्शन किए गए।

इसके बावजूद बिजली कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई, दबाव और प्रताड़ना का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

निजीकरण से बढ़ेगा संकट

सभा को संबोधित करते हुए शैलेन्द्र दुबे, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, पी.के. दीक्षित, सुहेल आबिद, चंद, मोहम्मद इलियास, सनाउल्लाह, सरजू त्रिवेदी, के.एस. रावत, आर.सी. पाल और जय गोविन्द ने कहा कि बिजली निगमों के निजीकरण से कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडराएगा और आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ भी बढ़ सकता है।

वक्ताओं ने कहा कि बिजली व्यवस्था जैसी महत्वपूर्ण सेवा को निजी हाथों में सौंपना जनहित के खिलाफ है। संघर्ष समिति ने सरकार से तत्काल निजीकरण की प्रक्रिया रोकने और कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई वापस लेने की मांग की।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शन के अंत में संघर्ष समिति ने साफ चेतावनी दी कि यदि सरकार और निगम प्रबंधन ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो आने वाले दिनों में प्रदेशव्यापी आंदोलन और तेज किया जाएगा। कर्मचारियों ने कहा कि इसके लिए पूरी जिम्मेदारी शासन और ऊर्जा निगम प्रबंधन की होगी।

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