Sonbhadra: पैतृक संपत्ति विवाद में पुलिस की भूमिका पर हाईकोर्ट सख्त, सोनभद्र एसपी व रायपुर एसओ तलब
Sonbhadra News: सोनभद्र में पैतृक संपत्ति विवाद के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर सख्त रुख अपनाते हुए एसपी और रायपुर थाना प्रभारी को तलब किया है और अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
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Sonbhadra News: पैतृक मकान के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में पुलिस की भूमिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक और रायपुर थाना प्रभारी को 19 मई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी पूछा है कि आखिर पारिवारिक संपत्ति विवाद में पुलिस ने हस्तक्षेप क्यों किया और संबंधित पक्षों को थाने क्यों लाया गया।यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता हरि प्रसाद यादव तथा उनके पुत्र सुखपाल यादव और सत्यपाल यादव की ओर से दाखिल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
पुलिस कार्रवाई पर कोर्ट ने मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक स्वयं शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करें कि दो भाइयों के बीच संपत्ति बंटवारे के विवाद में पुलिस की क्या भूमिका रही। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि किन परिस्थितियों में संबंधित लोगों को रायपुर थाने बुलाया गया।कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए उस समय का सीसीटीवी फुटेज भी पेश करने का आदेश दिया है, जब कथित रूप से पुलिसकर्मी के घायल होने की बात कही गई थी। अदालत ने यह पूरा कार्य एक सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है।खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को बड़ी राहत देते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक हरि प्रसाद यादव, सुखपाल यादव और सत्यपाल यादव को रायपुर थाने में दर्ज केस अपराध संख्या 58/2026 में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।यह मुकदमा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 115(2), 121(1), 132 और 221 के तहत दर्ज किया गया है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के जरिए भेजा जाएगा आदेश
अदालत ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति 24 घंटे के भीतर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सोनभद्र के माध्यम से पुलिस अधीक्षक और रायपुर थाना प्रभारी तक पहुंचाई जाए।हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2026 तय करते हुए इसे फ्रेश केस के रूप में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस प्रशासन अदालत में क्या जवाब पेश करता है।