Sonbhadra: बिजली संभालो या कुर्सी छोड़ो ,केस्को मुख्यालय पर गरजे बिजलीकर्मी, निजीकरण का खुला विरोध
कानपुर स्थित केस्को मुख्यालय पर शनिवार को बिजली कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा, जहां विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आयोजित विशाल सभा में प्रबंधन के खिलाफ तीखे तेवर देखने को मिले।
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Sonbhadra: प्रदेश की लड़खड़ाती बिजली व्यवस्था को लेकर असंतोष अब खुलकर सड़कों पर उतर आया है। कानपुर स्थित केस्को मुख्यालय पर शनिवार को बिजली कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा, जहां विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आयोजित विशाल सभा में प्रबंधन के खिलाफ तीखे तेवर देखने को मिले। कर्मचारियों और अभियंताओं ने दो टूक कहा—“जब व्यवस्था संभल नहीं रही, तो शीर्ष प्रबंधन तत्काल इस्तीफा दे।”
निजीकरण की आहट पर आंदोलन का बिगुल
सभा में संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने साफ चेतावनी दी कि यदि पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के संचालन व अनुरक्षण को आउटसोर्स करने के लिए टेंडर जारी किया गया, तो उसी क्षण बिना किसी पूर्व सूचना के पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
“नाकामी छिपाने को कर्मचारियों का उत्पीड़न”
केंद्रीय पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि बिजली व्यवस्था सुधारने में विफल प्रबंधन अब अपनी असफलताओं का ठीकरा कर्मचारियों पर फोड़ रहा है।
उनका कहना था कि दमनात्मक नीतियों से न सिर्फ कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है, बल्कि पूरी बिजली व्यवस्था भी पटरी से उतरती जा रही है।
गलत नीतियों से चरमराई व्यवस्था
सभा में यह भी कहा गया कि पावर कॉरपोरेशन में लागू की जा रही वर्टिकल व्यवस्था, संविदा कर्मियों की छंटनी, नियमित पदों में कटौती और अव्यवहारिक प्रयोगों ने हालात को और बिगाड़ दिया है।
परिणामस्वरूप राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में बिजली आपूर्ति चरमरा गई है और आम जनता परेशान है।
“अनुभवी हाथों में हो कमान”
शैलेन्द्र दुबे ने जोर देते हुए कहा कि बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने का एकमात्र उपाय है कि अनुभवी और योग्य अभियंताओं को नेतृत्व सौंपा जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कर्मचारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
आंदोलन जारी, उपभोक्ताओं को राहत देने का दावा
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के बावजूद उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। शिकायतों का तेजी से निस्तारण किया जा रहा है, लेकिन कर्मचारियों का उत्पीड़न किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन
केस्को मुख्यालय के अलावा गोविंद नगर मुख्यालय और पनकी ताप विद्युत गृह में भी विरोध सभाएं आयोजित कर प्रबंधन के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
सभा को शैलेन्द्र दुबे, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, पी.एस. बाजपेई, विजय त्रिपाठी, गौरव दीक्षित, रफीक अहमद और आर.एस. मिश्रा सहित कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया।
स्पष्ट संदेश: “निजीकरण वापस लो, तभी थमेगा आंदोलन”
अंत में संघर्ष समिति ने साफ कर दिया कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक निजीकरण का प्रस्ताव पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता और कर्मचारियों के खिलाफ की गई सभी कार्रवाई खत्म नहीं होती।