Sonbhadra News: भीषण गर्मी में बिजली संकट का खतरा, संविदाकर्मियों की छंटनी पर बवाल
Sonbhadra News: सोनभद्र में बिजली कर्मचारियों ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर दोहरी नीति का आरोप लगाया, कहा- गर्मी और बढ़ती मांग के बीच छंटनी से बिगड़ेगी व्यवस्था।
भीषण गर्मी में बिजली संकट का खतरा, संविदाकर्मियों की छंटनी पर बवाल (Photo- Newstrack)
Sonbhadra News: सोनभद्र। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी, लगातार बढ़ती बिजली मांग और हीट वेव के बीच बिजली व्यवस्था को संभालने में जुटे कर्मचारियों के बीच अब असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। शुक्रवार को विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कारपोरेशन प्रबंधन पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि एक तरफ प्रबंधन खुद यह मान रहा है कि मौजूदा हालात में अनुभवी कर्मचारियों की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ वर्टिकल सिस्टम और डाउनसाइजिंग के नाम पर संविदाकर्मियों की छंटनी और अनुभवी कर्मचारियों को हटाने की कार्रवाई तेज कर दी गई है।
संघर्ष समिति ने तीखे शब्दों में कहा कि जब प्रदेश रिकॉर्ड बिजली मांग के दौर से गुजर रहा है और छोटी-सी लापरवाही भी बड़े बिजली संकट का कारण बन सकती है, तब कर्मचारियों की संख्या घटाने का फैसला पूरी तरह जनविरोधी और अव्यवहारिक है।
समिति ने बताया कि उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने स्वयं शासन को प्रस्ताव भेजकर स्थानांतरण सत्र 2026-27 की अवधि 31 मई से बढ़ाकर 15 जुलाई 2026 तक करने की बात कही है। इसका स्पष्ट मतलब है कि प्रबंधन भी मान रहा है कि इस समय बड़े पैमाने पर तबादले होने से बिजली व्यवस्था चरमरा सकती है। फील्ड में तैनात अनुभवी कर्मचारी ही लाइन अनुरक्षण, ट्रांसफार्मर फॉल्ट, ब्रेकडाउन और आपातकालीन हालात को संभालने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
संविदाकर्मियों की छंटनी पर भड़का संघर्ष समिति
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि इसी बीच वर्टिकल सिस्टम लागू करने के नाम पर संविदा कर्मचारियों को हटाने और लगभग 45 प्रतिशत तक कर्मियों को कार्यमुक्त करने की तैयारी की जा रही है। समिति का कहना है कि यह फैसला सीधे तौर पर विद्युत व्यवस्था को कमजोर करेगा।
समिति के नेताओं ने कहा कि फील्ड में सबसे अधिक जोखिम उठाने वाले यही संविदाकर्मी हैं। तेज धूप, बारिश, तूफान और रात के अंधेरे में टूटे तार जोड़ने से लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान तक का बड़ा भार इन्हीं कर्मचारियों के कंधों पर रहता है। ऐसे कर्मचारियों को हटाना बिजली व्यवस्था को जानबूझकर संकट में धकेलने जैसा कदम होगा।
संघर्ष समिति ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि मानव संसाधन घटाया गया तो आने वाले दिनों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, जिसका खामियाजा सीधे आम जनता को भुगतना पड़ेगा।
निजीकरण विरोधी आंदोलन से जुड़ी कार्रवाई वापस लेने की मांग
समिति ने मार्च 2023 में निजीकरण के विरोध में हुए आंदोलन का भी जिक्र किया। संघर्ष समिति ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई अब तक समाप्त नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बनी हुई है।
समिति ने मांग की कि सभी दंडात्मक और उत्पीड़नात्मक कार्रवाई तत्काल वापस ली जाए ताकि बिजली कर्मी पूरी क्षमता और मनोबल के साथ काम कर सकें। समिति का कहना है कि सरकार और प्रबंधन को यह समझना होगा कि बिना कर्मचारियों के सहयोग के निर्बाध बिजली आपूर्ति संभव नहीं है।
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश की मौजूदा परिस्थितियों में कर्मचारियों की छंटनी नहीं बल्कि संख्या बढ़ाने की जरूरत है। लगातार बढ़ती बिजली खपत, हीट वेव और तकनीकी दबाव के बीच बिजली कर्मी दिन-रात फील्ड में डटे हुए हैं। ऐसे समय में अनुभवी कर्मचारियों और संविदाकर्मियों को हटाने का निर्णय पूरी तरह अव्यावहारिक साबित होगा।
समिति ने साफ कहा कि यदि कर्मचारी विरोधी नीतियों पर तत्काल रोक नहीं लगी तो इसका असर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। संघर्ष समिति ने मांग की कि संविदा कर्मियों की सेवाएं बहाल रखी जाएं, अनुभवी कर्मचारियों को हटाने के आदेश वापस लिए जाएं तथा सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई समाप्त कर बिजली व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाए।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि बिजली कर्मी हर हाल में प्रदेश को निर्बाध बिजली देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि सरकार और प्रबंधन भी कर्मचारियों का मनोबल तोड़ने के बजाय उनका सहयोग करे।