Sonbhadra News: शोषण की चपेट में बिजली व्यवस्था, संविदाकर्मियों की मौत पर संघर्ष समिति का बड़ा हमला
Sonbhadra News: बिजली विभाग में संविदाकर्मियों के शोषण और मौत के मामलों को लेकर संघर्ष समिति ने गंभीर सवाल उठाए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।
Sonbhadra News(Photo-Social Media)
Sonbhadra News: प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग के बीच बिजली व्यवस्था संभाल रहे संविदाकर्मियों की लगातार हो रही मौतों को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समिति का दावा है कि पिछले लगभग दो माह में कार्य के दौरान करीब 36 संविदाकर्मियों की मौत हो चुकी है। इसे महज हादसा नहीं, बल्कि कर्मचारियों पर बढ़ते कार्यभार, लगातार हो रही छंटनी और शोषण का परिणाम बताया गया है।
कार्यभार बढ़ा, सुरक्षा घटी
संघर्ष समिति के अनुसार निजीकरण और वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर बड़ी संख्या में संविदाकर्मियों को हटाया गया है। कर्मचारियों की कमी के कारण पहले जहां किसी फॉल्ट पर चार कर्मचारियों की टीम भेजी जाती थी, अब अकेले संविदाकर्मी से पूरा काम कराया जा रहा है। समिति का कहना है कि यह व्यवस्था सीधे तौर पर कर्मचारियों की जान जोखिम में डाल रही है और दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री के निर्देशों की भी अनदेखी का आरोप
समिति ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा संविदाकर्मियों के हितों की रक्षा के लिए आउटसोर्स निगम के गठन का निर्णय लिया गया था, लेकिन ऊर्जा निगमों के प्रबंधन ने आज तक इसे पूरी तरह लागू नहीं किया। अधिकांश संविदाकर्मियों को न तो घोषित 18 हजार रुपये प्रतिमाह का भुगतान मिल रहा है और न ही अन्य वैधानिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उत्पीड़न से बढ़ रहा आक्रोश
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में संविदाकर्मियों के साथ मारपीट और उत्पीड़न की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे माहौल में कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा है और निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना कठिन होता जा रहा है। समिति ने चेतावनी दी कि जुलाई और अगस्त में बिजली की मांग अपने चरम पर होगी। यदि कर्मचारियों की कमी, शोषण और उत्पीड़न पर तत्काल रोक नहीं लगी तो प्रदेश की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। संघर्ष समिति ने मांग की है कि हटाए गए सभी संविदाकर्मियों को तत्काल सेवा में वापस लिया जाए, आउटसोर्स निगम की व्यवस्था लागू की जाए, प्रत्येक संविदाकर्मी को 18 हजार रुपये प्रतिमाह सहित सभी वैधानिक सुविधाएं दी जाएं, फॉल्ट पर पर्याप्त कर्मचारियों की टीम भेजी जाए तथा अकेले कर्मचारी से जोखिमपूर्ण कार्य कराना बंद किया जाए।
समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन ने अपनी नीतियों में तत्काल बदलाव नहीं किया और समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष समिति से वार्ता शुरू नहीं की, तो इसका प्रतिकूल असर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन की होगी।