Sonbhadra : वार्ता गायब, कार्रवाई जारी, प्रबंधन की जिद से बिगड़ी बिजली सप्लाई, खमियाजा उपभोक्ता पर

Sonbhadra में बिजली संकट गहराया, कर्मचारियों ने प्रबंधन पर संवादहीनता और उत्पीड़न के आरोप लगाए, उपभोक्ता झेल रहे कटौती और लो वोल्टेज की मार।

Update:2026-05-05 17:29 IST

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Sonbhadra: प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले एक वर्ष से कर्मचारियों के साथ किसी भी प्रकार की सार्थक वार्ता नहीं की गई है। इसके उलट कर्मचारियों पर उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों का सिलसिला लगातार जारी है, जिससे कार्यस्थल का वातावरण तनावपूर्ण हो गया है और इसका सीधा असर बिजली आपूर्ति पर पड़ रहा है। नतीजतन आम उपभोक्ताओं को भी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समय-समय पर कर्मचारी संगठनों से संवाद बनाए रखने पर जोर दिया जाता रहा है। मुख्य सचिव स्तर से भी नियमित वार्ता के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन का रवैया न केवल उदासीन बल्कि विरोधाभासी नजर आ रहा है। समिति के अनुसार, संवादहीनता की यह स्थिति पूरे तंत्र को प्रभावित कर रही है।

समिति ने एक वर्ष पूर्व की घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि 05 मई 2025 को क्रमिक अनशन के दौरान संयोजक शैलेन्द्र दुबे की हालत बेहद गंभीर हो गई थी। इस घटना के बाद प्रबंधन को वार्ता के लिए आगे आना पड़ा और 12 मई 2025 को विस्तृत बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में संघर्ष समिति ने बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए एक विस्तृत और ठोस प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया था। उस समय प्रबंधन की ओर से सुझावों का अध्ययन कर आगे चर्चा करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक उस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई।

संघर्ष समिति का कहना है कि यदि उस समय दिए गए सुझावों पर गंभीरता से अमल किया गया होता, तो आज बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं काफी हद तक कम हो सकती थीं। वर्तमान हालात में उपभोक्ताओं को बार-बार बिजली कटौती, लो वोल्टेज और अनियमित सप्लाई जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

समिति ने यह भी आरोप लगाया कि प्रबंधन संवाद के बजाय दमनात्मक नीति अपनाकर कर्मचारियों में भय का वातावरण बनाना चाहता है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्यप्रणाली न तो व्यवहारिक है और न ही इससे दीर्घकालिक समाधान निकल सकता है।

भीषण गर्मी के बीच बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए संघर्ष समिति ने प्रबंधन से तत्काल सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस लेने और सम्मानजनक वार्ता शुरू करने की मांग की है। साथ ही पूर्व में दिए गए सुझावों के आधार पर बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना बनाने की जरूरत बताई गई है।

उत्पीड़न के विरोध में 16 अप्रैल से चल रहे जन-जागरण अभियान के तहत आज चित्रकूट और बांदा में सभाएं आयोजित की गईं। इन सभाओं को केंद्रीय पदाधिकारी जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित करते हुए कर्मचारियों से एकजुट होकर संघर्ष को और तेज करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही वार्ता शुरू नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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