UP Cabinet में 10 मई तक ‘बड़ा फेरबदल’, पुराने मंत्रियों पर लटकी तलवार, नये चेहरों को मौका
UP Cabinet Expansion: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी अब पूरी तरह से उत्तर प्रदेश की राजनीति पर फोकस कर रही है।
Yogi Government
UP Cabinet Expansion: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी अब पूरी तरह से उत्तर प्रदेश की राजनीति पर फोकस कर रही है। वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने प्रदेश में दो बड़े लंबित काम मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बदलाव को जल्द पूरा करने की रणनीति बना ली है। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी होते ही उत्तर प्रदेश में इन दोनों अहम फैसलों को अमल में लाया जाएगा।
10 मई से पहले हो सकता है कैबिनेट विस्तार
संभावना जताई जा रही है कि 10 मई से पहले प्रदेश मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है, जबकि 15 मई तक संगठन के नए प्रदेश और क्षेत्रीय पदाधिकारियों की सूची भी जारी हो सकती है। इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार की खास बात यह हो सकती है कि कुछ वरिष्ठ और उम्रदराज मंत्रियों की जगह नए और युवा चेहरों को मौका दिया जाएगा। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि युवा नेतृत्व को आगे लाकर चुनावी समीकरण को और मजबूत किया जा सकता है।
आगामी चुनावों को ध्यान में रख किया जाएगा मंत्रिमंडल विस्तार
पार्टी के विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि 10 से 15 मई के बीच मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बदलाव दोनों ही कार्यों को पूरा करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में लखनऊ से लेकर दिल्ली तक कई दौर की बैठकों और मंथन के बाद रणनीति को अंतिम रूप दिया गया है। मंत्रिमंडल विस्तार पूरी तरह से आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर किया जाएगा, जिसमें जातीय समीकरण को साधने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दरअसल, पार्टी नेतृत्व इन दिनों अन्य राज्यों में भी व्यस्त है। 7 मई को बिहार में नए मंत्रिमंडल का विस्तार, 8 मई को असम और 9 मई को पश्चिम बंगाल में सरकार गठन की प्रक्रिया के चलते शीर्ष नेतृत्व व्यस्त रहेगा। इसी कारण यूपी से जुड़े फैसले इन कार्यक्रमों के बाद लिए जाने की संभावना है।
कुछ मंत्रियों को संगठन में जिम्मेदारी देने पर भी विचार
अप्रैल महीने में मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक बदलाव को लेकर लखनऊ और दिल्ली में कई महत्वपूर्ण बैठकों का दौर चला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ पार्टी के केंद्रीय नेताओं ने भी इस पर गहन चर्चा की। 12 और 13 अप्रैल को राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने लखनऊ में रहकर पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और मंत्रियों से फीडबैक लिया था, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तैयार की गई। सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार में खाली पदों को भरने के साथ ही कुछ मौजूदा मंत्रियों के प्रदर्शन के आधार पर बदलाव भी किया जा सकता है। साथ ही, कुछ मंत्रियों को संगठन में जिम्मेदारी देने पर भी विचार हुआ है।
एक दर्जन से अधिक संभावित नामों पर चर्चा हुई है, हालांकि अंतिम निर्णय अभी बाकी है। जातीय संतुलन को साधने के लिए ओबीसी और दलित वर्ग को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि ब्राह्मण और क्षत्रिय समुदाय से भी एक-दो चेहरों को मौका मिल सकता है। इसके अलावा, सहयोगी दलों अपना दल, सुभासपा और निषाद पार्टी को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। इन दलों के मंत्री पद के लिए चेहरों का चयन संबंधित दलों के प्रमुख करेंगे। इस बार महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। विशेष रूप से दलित और ओबीसी वर्ग की महिला विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। तीन से चार महिला विधायकों के नामों पर गंभीरता से विचार किया गया है। साथ ही, कुछ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल और कुछ राज्यमंत्रियों को पदोन्नति देने की भी संभावना है।