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7 जन्मों के 7 सात फेरे, इसके पीछे छिपे इतने गूढ़ रहस्य, हर परिस्थिति में करें याद

हिंदू संस्कृति में रिति रिवाजों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर काम किए जाते हैं। जिससे वह काम सफल हो सके। हिन्दू धर्म में ऐसी कई रस्में होती है, जिन्हें सही तरह से निभाकर हर कोई अपने परिवार की खुशियों को आगे ले जाते हैं। भगवान के प्रति अटूट आस्था भक्तों में देखने को मिलती है।

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sumanBy suman

Published on 10 Aug 2019 10:29 AM GMT

7 जन्मों के 7 सात फेरे, इसके पीछे छिपे इतने गूढ़ रहस्य, हर परिस्थिति में करें याद
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जयपुर:हिंदू संस्कृति में रिति रिवाजों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर काम किए जाते हैं। जिससे वह काम सफल हो सके। हिन्दू धर्म में ऐसी कई रस्में होती है, जिन्हें सही तरह से निभाकर हर कोई अपने परिवार की खुशियों को आगे ले जाते हैं। भगवान के प्रति अटूट आस्था भक्तों में देखने को मिलती है। इस तरह हिन्दू धर्म में सप्ताह के 7 दिनों का भी बहुत महत्व होता है।विवाह को लेकर भी हिन्दू धर्म मेें कई तरह की रस्में होती है जिसका हमारी संस्कृति में एक विशेष महत्व रखता है। विवाह की सभी रस्में वर और वधू को लेकर कई तरह के रीति रिवाजों को निभाने पर सम्पन्न होती है। जिन्हे उनके सुखी वैवाहिक दांपत्य जीवन के लिए पालन करना बेहद जरुरी है।

ऐसे में हर किसी ने शादियों में वर वधू की मेंहदी की रस्म से लेकर हल्दी और वरमाला जैसी कई रस्में देखी होगी,जब वर वधू फेरे लेते है तो इसको लेकर भी वर और वधू कई तरह के वचन फेरों के सामने अग्नि को साक्षी मानकर एक दूसरे को देते है। लेकिन कभी यह जानने की कोशिश की है की आखिर दुल्हा और दुल्हन अग्नि के सामने ही विवाह के समय सात फेरे लेकर वचन को क्यों निभाते है। जानते है..

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हिन्दू धर्म के सोलह संस्कारों में एक है विवाह संस्कार। इस संस्कार का एक नियम यह है कि जब दुल्हा और दुल्हन शादी के समय में मंडप में आते हैं तब पुरोहित ईश्वर को साक्षी मानकर दुल्हा और दुल्हन का विवाह संपन्न करवाते हैं। लेकिन यह विवाह तभी सहीं संपन्न माना जाता है, जब इस दौरान वर और वधू अग्नि के सामने सात फेरे लेकर वचन निभाने का वादा न करें। शादी की रस्मों के समय की आखिर अग्नि के ही चारों ओर फेरे क्यों लगाए जाए जाते हैं। यह हर कोई जानना भी चाहता है, दरअसल अग्नि को वेदों और शास्त्रों में प्रमुख देवता के रुप में स्थान मिला है।

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अग्नि को विष्णु भगवान का स्वरुप माना गया है। शास्त्रों के अनुसार कहा गया है कि अग्नि में सभी देवताओं की आत्मा बसती है, इसलिए अग्नि में हवन करने से हवन में डाली गई सामग्रियों का अंश सभी देवताओं तक पहुंचता है। अग्नि के चारों तरफ फेरे लगाकर सात वचन लेने से यह माना जाता है कि दुल्हा और दुल्हन ने सभी देवताओं को साक्षी माना है और एक दूसरे को अपना जीवनसाथी स्वीकार कर लिया है। इसी तरह विवाह की जिम्मेरियों को निभाने का वचन लिया है। जिससे उनका वैवाहिक जीवन में सुखमय व्यतीत होगा उनके जीवन में आने वाली तमाम बाधाएं आसानी से दूर होती है। अग्नि को बेहद पवित्र माना गया है, इसलिए वधू और वर अग्नि के समाने इन सात फेरों के वचनों को निभाते है।

*यदि शादी के बाद कोई व्रत-उपवास और किसी धार्मिक स्थान पर जाएं तो पति-पत्नी साथ लेकर जाएं। अगर बातों से सहमत हैं तो मैं आपके साथ जीवन यापन करने के लिए तैयार हूं।

*आप जैसे अपने माता -पिता का सम्मान करते हैं, ठीक वैसे ही आप मेरे माता-पिता का भी सम्मान करेंगे। परिवार की मर्यादा का पालन करेंगे। अगर आप इस बात को स्वीकार करते हैं तो मुझे आपके वामांग में आना स्वीकार है।

*तीसरे वचन में कन्या अपने वर से कहती हैं कि आप मुझे वचन दीजिए कि जीवन की तीनों अवस्थाओं में मेरे साथ खड़े रहेंगे। मेरे बातों का पालन करते रहेंगे, तो ही मैं आपके वामांग में आने को तैयार हूं। कन्या चौथे वचन में ये मांगती है कि अब तक आप घर-परिवार की चिंता से मुक्त थे। अब जब आप विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं तो आपको अपने परिवार की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाना होगा। अगर आप मेरे बात से सहमत है तो मैं आपके साथ आने के लिए तैयार हूं। इस वचन से यह मालूम होता है कि पुत्र का विवाह तब करे जब वह अपने पैरों पर खड़ा हो। अपने परिवार का खर्चा चलाने लगे।

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*इस वचन में कन्या अपने वर से कहती हैं कि अगर आप घर परिवार के लेन देन में मेरी भी राय हो तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूं।

*कन्या कहती है यदि मैं अपनी सखियों के साथ बैठकर कुछ समय बिता रही हूं तो उस समय आप किसी प्रकार का अपमान नहीं करेंगे। साथ ही आपको जुए के लत से खुद को दूर रखना होगा। अगर आप हमारी बातों को मानते हैं तो मैं आपके वामांग में आने को तैयार हूं।

*अंतिम वचन में कन्या कहती हैं कि आप पराई औरतों को माता और बहन के समान समझेंगे तथा पति-पत्नी के प्रेम के बीच में तीसरे किसी भी व्यक्ति को जगह नहीं देंगे।

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