सिर ढकने के पीछे है बड़ी वजह, जानकर आज से ही रखने लगेंगी पल्लू

प्राचीनकाल में सभी के सिर ढंके ही होते थे अर्थात हर प्रांत की अपनी एक वेशभूषा थी जिसमें सिर पर पगड़ी पहनने का रिवाज था। राजस्थान, मालवा व निमाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग सिर पर साफ बांधकर रखते हैं। महिलाएं सिर पर ओढ़नी या पल्लू डालकर ही रहती थीं। ऐसे में वे सभी जब मंदिर जाते थे तो सिर ढंका ही होता था।

Published by suman Published: June 18, 2020 | 10:54 pm
Modified: June 18, 2020 | 10:58 pm

लखनऊ : प्राचीनकाल में सभी के सिर ढंके ही होते थे अर्थात हर प्रांत की अपनी एक वेशभूषा थी जिसमें सिर पर पगड़ी पहनने का रिवाज था। राजस्थान, मालवा व निमाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग सिर पर साफ बांधकर रखते हैं। महिलाएं सिर पर ओढ़नी या पल्लू डालकर ही रहती थीं। ऐसे में वे सभी जब मंदिर जाते थे तो सिर ढंका ही होता था। हमारी भारतीय संस्कृति की एक खास परम्परा का पालन महिलाएं सदियों से करती हुई आ रही है वो सिर ढकने की परम्परा घर की महिलाएं अक्सर बड़े बुजुर्ग के सम्मान में सिर ढका करती है तो कुछ विशेष धार्मिक स्थानों पर सिर ढकना अनिवार्य होता है कुछ लोग इसे धार्मिक सम्मान की दृष्टि से देखते है तो कुछ लोग इसका आकलन वैज्ञानिक दृष्टि से भी करते है ।

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*सिर ढंकना  एक सम्मान का प्रतीक माना गया हैं। मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि जिसको आप आदर देते हैं, उनके आगे हमेशा सिर ढंककर जाते हैं। इसी कारण से कई महिलाएं अभी भी जब भी अपने सास-ससुर या बड़ों से मिलती हैं, तो सिर ढंक लेती हैं। यही कारण है कि जब हम मंदिर में जाते हैं, तो सिर ढंककर ही जाते हैं।

 

*हिन्दू धर्म के अनुसार सिर के बीचोबीच सहस्रार चक्र होता है जिसे ब्रह्म रन्ध्र भी कहते हैं। हमारे शरीर में 10 द्वार होते हैं- 2 नासिका, 2 आंख, 2 कान, 1 मुंह, 2 गुप्तांग और सिर के मध्य भाग में 10वां द्वार होता है। दशम द्वार के माध्यम से ही परमात्मा से साक्षात्कार कर पा सकते हैं। इसीलिए पूजा के समय या मंदिर में प्रार्थना करने के समय सिर को ढंककर रखने से मन एकाग्र बना रहता है।

 

* अगर वैज्ञानिक दृष्टिकोण की बात करें तो माना जाता है कि आकाशीय विद्युतीय तरंगे खुले सिर वाले व्यक्तियों के भीतर प्रवेश कर क्रोध, सिर दर्द, आंखों में कमजोरी आदि के कई प्रकार के रोग को उत्पन्न करती है अगर सिर ढका रहता है तो हम कई तरह के रोगों से बच जाते हैं ।

*जीवन मे सकारात्मक प्रभाव सिर ढकने की खास परम्परा को लेकर मान्यता है की जिन्‍हें आप जिन्हे श्रेष्‍ठ और आदरणीय मानते हैं उनके सामने सिर को खुला नहीं रखना महिलाएं उनके सम्मान और आदर के लिए सिर ढका करती है लाइफस्टाइल बदल रहा ऐसे में जहां शहरी निवास महिलाए इस परम्परा को कम निभाती है तो वही ग्रामीण महिलाएं आज भी समाज मे इस परम्परा का पालन करती है।

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*सिर ढकने से महिलाएं नकारात्मक ऊर्जा से खुद को बचाएं रख सकती है। सिर ढकने से नकारात्मक ऊर्जा एकदम से सिर में प्रवेश नहीं कर पाती है। कहा जाता है कि सिर के मध्‍य में एक चक्र होता है जब आप सिर को ढ़ककर पूजा करते हैं तो यह चक्र सक्रिय होता है। जो आपके ध्यान को केद्रित करता है। बस इस वजह से महिलाओं को सिर ढकने के फायदें भी है जिससे आप अनजान है। इससे खूबसूरती में भी चार-चांद लगता हैं।

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