कृष्ण की बांसुरी में है शिव, जानिए कान्हा की वंशी से अद्भुत प्रेम की दास्तां

श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के अवतार है जो सोलह कलाओं से सुशोभित है। उनकी बांसुरी कला की तो पूरी दुनिया दिवानी रही है । कहते हैं कि जब कृष्ण के मुख से बांसुरी की धून निकलती थी तो जीव-निर्जीव सब झूम उठते थे। मोरपंख की तरह ही श्रीकृष्ण के हाथों में सदैव बांसुरी रहती थी।

Published by suman Published: August 22, 2019 | 10:49 pm

जयपुर : श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के अवतार है जो सोलह कलाओं से सुशोभित है। उनकी बांसुरी कला की तो पूरी दुनिया दिवानी रही है । कहते हैं कि जब कृष्ण के मुख से बांसुरी की धून निकलती थी तो जीव-निर्जीव सब झूम उठते थे। मोरपंख की तरह ही श्रीकृष्ण के हाथों में सदैव बांसुरी रहती थी। जो सिर्फ राधारानी के लिए ही बजती थी।बांसुरी को वंशी कहते हैं, वंशी को उल्टा करने पर शिव बनता है बांसुरी शिव का रूप है। शिव वो हैं जो संपूर्ण संसार को अपने प्रेम के वश में रखते है। और शिव व विष्णु के अटूट प्रेम के शास्त्र साक्षी है दोनों एक दूसरे के पूरक है। उनका व्यवहार और वाणी दोनों ही बांसुरी की तरह मधुर है।

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मान्यता
एक बार राधा ने भी बांसुरी से पूछा -हे प्रिय बांसुरी यह बताओ कि मैं कृष्ण जी को इतना प्रेम करती हूं , फिर भी कृष्ण जी मुझसे अधिक तुमसे प्रेम करते हैं, तुम्हें अपने होठों से लगाए रखते हैं, इसका क्या कारण है?बांसुरी ने कहा – मैंने अपने तन को कटवाया , फिर से काट-काट कर अलग की गई, फिर मैंने अपना मन कटवाया यानी बीच में से, बिल्कुल आर-पार पूरी खाली कर दी गई। फिर अंग-अंग छिदवाया। मतलब मुझमें अनेकों सुराख कर दिए गए। उसके बाद भी मैं वैसे ही बजी जैसे कृष्ण जी ने मुझे बजाना चाहा। मैं अपनी मर्ज़ी से कभी नहीं बजी। यही अंतर है आप में और मुझमें कृष्ण जी की मर्जी से चलती हूं और तुम कृष्ण जी को अपनी मर्ज़ी से चलाना चाहती हो।

कृष्ण के बांसुरी प्रेम के पीछे मुख्य रूप से तीन वजह है।

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 बांसुरी में 8 छेद होते हैं। जिसमें पहला मुंह के पास, जिससे हवा फूंकी जाती है और 6 छेद सरगम के होते हैं। जिन पर उंगलियां होती हैं। वहीं सबसे नीचे एक और छेद होता है, जो 8वां छेद है ।
बांसुरी बनाना केवल बांस में छेद कर देना भर नहीं है। इसमें अगर एक भी छेद गलत हो गया तो फिर वह बांसुरी बेसुरी हो जाती है।
यूं तो बांसुरी बनाने में ज्यादा वक्त नहीं लगता है, लेकिन मधुर धून के साथ बनाने में बहुत समय लगता है। साथ ही एक भी गलत जगह छेद हो जाता है तो पूरी मेहनत बर्बाद हो जाती है।

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मानसिक तनाव और पति-पत्नी के बीच अनबन को दूर करने के लिए सोते समय सिरहाने से बांसुरी रखनी चाहिए।
संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपतियों को श्रीकृष्ण के बालरूप की तस्वीर शयनकक्ष में लगानी चाहिए।
बांसुरी शांति व समृद्धि का प्रतीक है। घर के मुख्य द्वार पर बांस की बांसुरी लटकाने से समृद्धि आती है।