कुंडली का योग बनाता है चरित्रहीन, इस कारण बाप-बेटी, भाई-बहन में होते हैं अवैध संबंध

आज के समय में लोगों का रिलेशनशिप पर ज्यादा विश्वास नहीं रहा है, लेकिन ये आज की ही सिर्फ बात नहीं है, जब से सभ्यता पनपी है लोगों के अवैध संबंध भी बने है । ये अलग बात है कि आज आसानी से किसी के अवैध रिलेशनशिप की जानकारी हो जाती है।  यदि शुक्र मेष,सिंह, धनु, वृश्चिक में हो या नीच का हो

Published by suman Published: January 19, 2020 | 7:59 am
Modified: January 19, 2020 | 10:06 am

जयपुर : आज के समय में लोगों का रिलेशनशिप पर ज्यादा विश्वास नहीं रहा है, लेकिन ये आज की ही सिर्फ बात नहीं है, जब से सभ्यता पनपी है लोगों के अवैध संबंध भी बने है । ये अलग बात है कि आज आसानी से किसी के अवैध रिलेशनशिप की जानकारी हो जाती है।  यदि शुक्र मेष,सिंह, धनु, वृश्चिक में हो या नीच का हो और मंगल राहु केतु या शनि के साथ हो तो यह व्यक्ति में अवैध संबंध की ओर आकर्षण पैदा होता है। विवाह के बाद अवैध संबंध होते है यह सब व्यक्ति के कुंडली के भावों से पता चलता है। वैसे  यदि  कुंडली में पंचम भाव पर मंगल, शनि, राहु का प्रभाव है और चंद्रमा भी पीड़ित है तो अवैध संबंध बनते हैं। यही योग यदि नवांश में बन जाए तो अवैध संबंध की ओर व्यक्ति जाता है। जानते हैं कि लोग अवैध संबंध क्यों बनाते हैं ।

नवांश भी बताते हैं अवैध संबंध

*नवांश कुंडली में शनि शुक्र की राशि में और शुक्र शनि की राशि में हो तो महिला का अवैध संबंध होता है।

*नवांश कुंडली में शुक्र मंगल की राशि में हो और मंगल शुक्र की राशि में तो व्यक्ति अपने जीवनसाथी के अलावा भी अन्य से संबंध बनाता हैं।

*शुक्र मंगल नवांश राशि से बारहवें भाव में हो तो व्यक्ति चरित्रहीन होता है।

*केतु नवांश राशि से नवम भाव में हो तो वृद्धावस्था तक भी व्यक्ति पर पुरुष या पर स्त्री के बारे में सोचता रहता है।

*शुक्र सभी वर्गों में केवल मंगल या शनि की राशियों में हो तो व्यक्ति चरित्रहीन होता है।

*यदि शुक्र पर मंगल की द्रष्टि हो , तो व्यक्ति का अपनी बहन या भाई या रक्त सम्बन्धियों से यौन सम्बन्ध होता है ।

*साथ ही यदि शुक्र के साथ चन्द्रमा हो तो पुरुष की कुंडली में , तो वह अपनी बहन या अन्य निकट सम्बन्धियों से यौन सम्बन्ध स्थापित करता है।

*नवांश कुंडली में चंद्रमा के दोनों ओर शनि और मंगल हो तो पति-पत्नी दोनों ही व्याभिचार करते हैं।

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इस युक्ति से भी बनते हैं अवैध संबंध

विवाहित या अविवाहित कोई भी पुरूष अथवा स्त्री हो, जो अपने जीवनसाथी के अलावा किसी अन्य से यौन संबंध स्थापित करें तो उसकी गिनती अवैध संबंधों में होती है ।इसके लिए स्त्री-पुरुष दोनों जिम्मेदार होते हैं।ज्योतिष शास्त्र में अवैध संबंध की भी स्पष्टता मिलती है चन्द्रमा मन का कारक होता है और कामवासना मन से जागती है। पंचम भाव प्रेमिका और सप्तम भाव पत्नी का होता है एवं शुक्र भोग विलास का कारक है, शनि, राहू, मंगल और पंचम भाव, पंचमेश, द्वादश और द्वादशेश का आपस में संबंध होना जातक के विवाह पूर्व एवं पश्चात् अवैध संबंध स्थापित करवाते हैं।

 

 इन भावों से पता चलेगा अवैध संंबंध

*पंचम भाव में शनि, शुक्र और मंगल की युति अवैध संबंध का निर्माण करती है। मेष या वृश्चिक राशि में मंगल के साथ शुक्र के होने से पराई स्त्री से घनिष्ठा बनती है।जन्म कुंडली में चन्द्रमा से द्वितीय स्थान में शुक्र हो तो ऐसा जातक भौतिक सुखों की प्राप्ति करता हैं उसका सौन्दर्य आकर्षक होता है अन्य स्त्रियों से शारीरिक संबंध भी बनाता है।

* द्वितीय, छठे और सप्तम भाव के किसी भी स्वामी के साथ शुक्र की युति लग्न में होने से जातक  चरित्र संदेहप्रस्त होता है। सूर्य और शुक्र की युति मीन लग्न में होने से जातक को अत्यंत कामुक बनाती है उसका अवैध  संबंध बनता है बुध और शुक्र की युति यदि सप्तम भाव में हो तो जातक अवैध संबंधों के लिए नए तरीके  अपनाता हैं।

 

 

*शनि, मंगल और शुक्र का काम वासना से घनिष्ठ संबंध है यदि जन्म कुंडली में शनि और मंगल  की युति सप्तम भाव पर हो तो जातक समलिंगी होता है। मंगल और राहू की युति अथवा दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक कामुक होता है एवम् अवैध संबंध बनाने के लिए उसका मन भटकता है। लग्न, चतुर्थ, सप्तम, दशम भाव में गुरू पर मंगल शुक्र का प्रभाव और चन्द्रमा पर राहू का प्रभाव हो तो व्यक्ति अवैध संबंध बनाने के लिए सभी सीमाओं का उल्लघंन कर देता है।

*लग्न में शनि का होना जातक को कामवासना अधिक देता है, पंचम भाव में शनि होने से अपने से बड़ी स्त्रियाें के प्रति अवैध संबंध बनाने के लिए जातक को आकर्षित करता है। शनि का सप्तम भाव में चन्द्रमा के साथ होना और मंगल की दृष्टि पड़ने से जातक वेश्यागामी होता है इसी योग में अगर शुक्र का संबंध दृष्टि अथवा युति से बन जाये तो अवैध संबंध निश्चित हो जाता है।

 

सर्वेंट से भी रहता है अवैध संंबंध

*चन्द्रमा जन्म कुंडली में कहीं पर भी नीच को होकर बैठा हो और उस पर पाप प्रभाव हो तो जातक अपने नौकर/नौकरानी से अवैध संबंध बनवाता है ।मंगल रक्त को दर्शता है जन्म कुंडली में किसी पाप ग्रह के साथ मंगल की युति सप्तम भाव में हो या सूर्य सप्तम में और मंगल चतुर्थ स्थान में हो अथवा चतुर्थ भाव में राहू हो तो व्यक्ति कामुकता में अंधा होकर पशु समान कार्य करता है।

*राहू का अष्टम भाव में होना जातक का अवैध संबंध कराता है।शनि का दशम भाव में होना जातक के मन में शुक्र और मंगल की युति जन्म कुंडली में कहीं पर भी हो एवं शनि दशम भाव में हो तो जातक ज्ञानवान भी होता है एवं काम वासना और अवैध संबंधों को गंभीरता से लेता है उसका मन स्थिर नहीं रह पाता।

 

 

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* बुध और शनि का संबंध सप्तम भाव से हो तो ऐसे जातक यौनक्रियाओं में नीरस एवं अयोग्य होते हैं।

*सूर्य का सप्तम भाव में होना जातक के वैवाहिक जीवन में कलेश उत्पन्न करता है, इससे परेशान होकर जातक अवैध संबंध बनाता है।

*सप्तम भाव में राहू और शुक्र हो अथवा राहू और चन्द्रमा की युति हो तथा गुरू द्वादश भाव में स्थित हो तो विवाह पश्चात ऑफिस या जहां नौकरी करते है , वहां अवैध-संबंध बनते हैं।

*बुध और शनि की युति यदि द्वादश भाव में हो तो जातक शीघ्रपतन का रोगी बन जाता है और इसी योग में यदि लग्न, सप्तम और अष्टम भाव में राहू हो तो व्यक्ति अपनी जवानी को स्वयं नष्ट करता है एवं उसका जीवनसाथी किसी अन्य से शरीरिक तृप्ति लेता है।

 

*मंगल जोश और शुक्र भोग एवं द्वादश भाव अवैध संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है यदि मंगल, शुक्र और द्वादश भाव का स्वामी का संबंध सप्तम भाव से हो तो व्यक्ति लंपट होता है एवं कई स्त्रियों से उसका अवैध संबंध होता है।

* लग्नेश एकादश में स्थित हो और उस पर पाप प्रभाव हो तो जातक अप्राकृतिक यौनक्रियाएं की तृप्ति हेतु अवैध संबंध बनाता है।जन्म कुंडली में चन्द्रमा, मंगल, शुक्र, राहू, सप्तम भाव, पंचम भाव और द्वादश भाव अवैध संबंध का निर्माण करते है।