नेताजी के बहाने सियासी संदेश देने की कोशिश, मोदी व ममता में दिखी जबर्दस्त तल्खी

नेताजी की जयंती पर ममता बनर्जी ने रोड शो के जरिए शक्ति प्रदर्शन किया और देश में चार राजधानी बनाने की मांग उठा दी। दूसरी ओर पीएम मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सपने को पूरा करने का दावा करते हुए कहा

Published by Roshni Khan Published: January 24, 2021 | 9:57 am
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नेताजी के बहाने सियासी संदेश देने की कोशिश, पीएम मोदी व ममता में दिखी जबर्दस्त तल्खी (PC: social media)

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के कारण भाजपा और टीएमसी के बीच बढ़ती तल्खी का असर नेताजी की जयंती पर आयोजित समारोह में भी दिखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी की मुखिया ममता बनर्जी के बीच कुछ ही फीट का फासला था मगर दोनों नेताओं के बीच कोई बातचीत नहीं हुई। बात करना तो दूर दोनों नेताओं ने नजरें मिलाने तक से परहेज किया।

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नेताजी की जयंती पर ममता बनर्जी ने रोड शो के जरिए शक्ति प्रदर्शन किया और देश में चार राजधानी बनाने की मांग उठा दी। दूसरी ओर पीएम मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सपने को पूरा करने का दावा करते हुए कहा कि उन्होंने जिस सशक्त भारत की कल्पना की थी, आज एलएसी से एलओसी तक दुनिया भारत का वही अवतार देख रही है।

बंगाली समाज से दिखाई करीबी

पश्चिम बंगाल की यह खासियत रही है कि यहां के लोगों में राज्य के इतिहास और संस्कृति से जुड़े महापुरुषों के प्रति काफी सम्मान की भावना दिखती है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस बंगाल की अस्मिता से जुड़े बड़े प्रतीक हैं और यही कारण है कि नेताजी की 125वीं जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए पीएम मोदी खुद पश्चिम बंगाल पहुंच गए।

विक्टोरिया मेमोरियल हॉल के मंच पर भी मोदी और ममता दोनों का मकसद खुद को बंगाली समाज के करीब दिखाना था और दोनों नेताओं ने इसमें कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी।

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जय श्रीराम के नारे पर भड़कीं ममता

विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद कुछ लोगों ने जब जयश्री राम का नारा बुलंद किया तो ममता बनर्जी नाराज हो गईं और उन्होंने मंच पर अपना भाषण भी पूरा नहीं किया और नाराज होकर वापस चली गईं। उन्होंने शिकायत की कि यह सरकार का कार्यक्रम है, किसी राजनीतिक दल का नहीं और ऐसे कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को बुलाकर बेइज्जत करना ठीक नहीं है।

ममता बनर्जी ने जिस समय गुस्से में अपनी यह शिकायत दर्ज कराई, उस समय मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे। अपने संक्षिप्त भाषण के अंत में ममता बनर्जी जय हिंद, जय बांग्ला कहना नहीं भूलीं।

पीएम ने बुलंद किया आत्मनिर्भर भारत का नारा

पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान नेताजी के बहाने अपनी सरकार के आत्मनिर्भर भारत के नारे को बुलंद किया। उन्होंने कहा कि आज हर भारतीय अपने दिल पर हाथ रखकर नेताजी सुभाष चंद्र को महसूस करे तो फिर उसे यह सवाल सुनाई देगा कि क्या मेरा एक काम कर सकते हो। यह काम, यह लक्ष्य आज भारत को आत्मनिर्भर बनाने का है। देश का हर क्षेत्र और हर नागरिक इससे जुड़ा हुआ है।

सरकार के काम भी याद दिलाए

उन्होंने अंडमान के द्वीप का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर रखने की भी याद दिलाई और यह भी कहा कि नेताजी से जुड़ी फाइलें भी हमारी ही सरकार ने सार्वजनिक की हैं। पीएम मोदी ने कहा कि देश ने अब तय किया है कि नेताजी की जयंती हर साल पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाएगी। नेताजी भारत के पराक्रम की प्रतिमूर्ति भी हैं और प्रेरणा भी।

दोनों नेताओं में नहीं हुआ कोई संवाद

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के कारण भाजपा और टीएमसी में बढ़ी तल्खी का असर भी समारोह में दिखा। दोनों नेताओं में राजनीतिक विचारधारा की दूरी और संवाद की कमी हर किसी के सामने झलक ही गई।

कोलकाता नेशनल लाइब्रेरी में प्रवेश से लेकर बाहर आने तक प्रधानमंत्री मोदी और ममता बनर्जी के बीच कोई संवाद नहीं हुआ। हालत ये थी कि दोनों ने एक-दूसरे से नजरें भी नहीं मिलाईं और दोनों नेता एक-दूसरे से विपरीत दिशा में देखते हुए नजर आए।

ममता ने जुलूस के जरिए दिखाई ताकत

नेताजी की जयंती को सियासी रूप से भुनाने के लिए ममता बनर्जी ने एक बड़ा जुलूस निकाला। उन्होंने पैदल चलते हुए जुलूस की अगुवाई की और बाद में सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में कोलकाता देश की राजधानी थी और मुझे लगता है कि बारी-बारी से देश की चार राजधानियां होनी चाहिए।

उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से पराक्रम दिवस मनाए जाने की घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि नेताजी की जयंती को देशनायक दिवस के रूप में क्यों न मनाया जाए।

केंद्र सरकार पर भी साधा निशाना

उन्होंने केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि वह मुझे राजनीतिक रूप से नापसंद कर सकते हैं, लेकिन मुझसे सलाह ले सकते थे। उन्होंने कहा कि टीएमसी ने नेताजी की जयंती को देशनायक दिवस के रूप में इसलिए मनाया क्योंकि इसका एक इतिहास है।
गुरुदेव टैगोर ने भी नेताजी को देशनायक कहा था और हमने बंगाल की दो महान हस्तियों को जोड़ने के लिए इस नाम का उपयोग किया है।

मोदी की सियासी संदेश देने की कोशिश

सियासी जानकारों का कहना है कि कोरोना संकट काल में भी नेताजी की जयंती के लिए कोलकाता जाकर पीएम मोदी ने बड़ा सियासी संदेश देने की कोशिश की है। हाल के दिनों में पीएम मोदी कार्यक्रमों में वर्चुअल ढंग से ही हिस्सा लेते रहे हैं मगर नेताजी की जयंती को अलग महत्व देते हुए उन्होंने कोलकाता जाने का फैसला किया।

इसके पीछे जल्द ही होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। हालांकि अपने दौरे के दौरान पीएम मोदी ने सियासी रूप से कोई हमला नहीं किया मगर उन्होंने नेताजी की जयंती के जरिए बंगाली समाज में पहुंच बनाने की कोशिश जरूर की।

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ममता भी नहीं रहीं पीछे

दूसरी और ममता बनर्जी भी पीछे नहीं रहीं और उन्होंने भी नेताजी की जयंती के जरिए अपना सियासी मकसद पूरा करने की कोशिश की। हालांकि मुख्यमंत्री होने के नाते वे प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए भी पहुंचीं मगर जय श्रीराम के नारे पर नाराजगी जताकर उन्होंने अपना राजनीतिक एजेंडा भी स्पष्ट कर दिया।

रिपोर्ट- अंशुमान तिवारी

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