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बंगाल चुनाव: कांग्रेस के लिए मुसीबत बने पीरजादा, गठबंधन पर पार्टी में छिड़ी जंग

पहले एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी आईएसएफ के साथ गठबंधन करके बंगाल की चुनावी जंग में उतरने की कोशिश कर रहे थे मगर पीरजादा ने कांग्रेस-वाम के साथ चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा करके ओवैसी को जबर्दस्त झटका दिया था।

Roshni Khan

Roshni KhanBy Roshni Khan

Published on 2 March 2021 3:59 AM GMT

बंगाल चुनाव: कांग्रेस के लिए मुसीबत बने पीरजादा, गठबंधन पर पार्टी में छिड़ी जंग
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बंगाल चुनाव: कांग्रेस के लिए मुसीबत बने पीरजादा, गठबंधन पर पार्टी में छिड़ी जंग (PC: social media)
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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सियासी जंग में उतरने से पहले ही गठबंधन को लेकर कांग्रेस में तकरार शुरू हो गई है। फुरफुरा शरीफ के मौलाना अब्बास सिद्दीकी पीरजादा की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस में ही सवाल उठने लगे हैं।

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पहले एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी आईएसएफ के साथ गठबंधन करके बंगाल की चुनावी जंग में उतरने की कोशिश कर रहे थे मगर पीरजादा ने कांग्रेस-वाम के साथ चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा करके ओवैसी को जबर्दस्त झटका दिया था। अब पीरजादा को साथ लेना कांग्रेस के लिए मुसीबत का बड़ा कारण बन गया है।

मुस्लिम वोटों के लिए जंग

दरअसल पश्चिम बंगाल की सियासी जंग में मुस्लिम वोटों को काफी अहम माना जा रहा है। राज्य की सौ से अधिक विधानसभा सीटें ऐसी हैं जिन पर यदि मुस्लिम एकजुट होकर मतदान करते हैं तो वे किसी भी प्रत्याशी की हार-जीत का कारण बन सकते हैं। ऐसे में सियासी दलों के बीच मुस्लिम वोटों के लिए जंग छिड़ी हुई है।

elections elections (PC: social media)

पीरजादा के फैसले से झटका

तृणमूल कांग्रेस के लिए मुस्लिम वोट बैंक बड़ी ताकत रहा है मगर इस चुनाव में फुरफुरा शरीफ के मौलाना अब्बास सिद्दीकी पीरजादा ने कांग्रेस-वाम गठबंधन को समर्थन देकर तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका दिया था। उनके इस कदम से ओवैसी को भी जबर्दस्त झटका लगा था जो पीरजादा के साथ गठबंधन बनाने की कोशिश में जुटे हुए थे।

आनंद शर्मा ने खड़े किए सवाल

अब पीरजादा को साथ लेना कांग्रेस के लिए ही बड़ी मुसीबत बन गया है क्योंकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में पार्टी के उपनेता आनंद शर्मा ने पीरजादा के साथ गठबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने इसे पार्टी की विचारधारा के खिलाफ बताया है।

कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं के समूह जी-23 के सदस्य आनंद शर्मा ने अपने ट्वीट में कहा कि आईएसएफ और ऐसे अन्य दलों के साथ कांग्रेस का गठबंधन पार्टी की मूल विचारधारा, गांधीवाद और नेहरूवादी धर्मनिरपेक्षता के पूरी तरह खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह सिद्धांत कांग्रेस पार्टी की आत्मा है। शर्मा के मुताबिक इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर पार्टी की कार्यसमिति में चर्चा होनी चाहिए थी।

शर्मा ने चौधरी को भी घेरा

अपने एक अन्य ट्वीट में शर्मा ने नसीहत भरे अंदाज में कहा कि सांप्रदायिकता के खिलाफ संघर्ष में कांग्रेस चयनात्मक नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि हमें सांप्रदायिकता के हर रूप से लड़ाई लड़नी होगी।

पश्चिम बंगाल के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में पार्टी के राज नेता अधीर रंजन चौधरी को घेरते हुए शर्मा ने कहा कि उनकी उपस्थिति और समर्थन शर्मनाक है। उन्हें अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।

आनंद शर्मा असंतुष्ट नेताओं के ग्रुप जी-23 के प्रमुख सदस्य हैं और उन्होंने पिछले दिनों वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद की ओर से जम्मू में बुलाए गए सम्मेलन में भी हिस्सा लिया था। इस सम्मेलन में कांग्रेस नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए गए थे।

नेतृत्व की मंजूरी पर ही गठबंधन

आनंद शर्मा की ओर से आईएसएफ को साथ लेने पर खड़े किए गए सवाल का अधीर रंजन ने जवाब भी दिया है। अपने जवाब में अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि हम एक राज्य के प्रभारी हैं और कोई भी फैसला बिना अनुमति के नहीं करते। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन पार्टी नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही हुआ है। इसलिए इस पर सवाल उठाने का कोई मतलब नहीं है।

कांग्रेश-वामदलों के साथ पीरजादा

फुरफुरा शरीफ दरगाह के इमाम पीरजादा ने पिछले चुनावों में तृणमूल कांग्रेस का समर्थन किया था। मुस्लिम वोटों के लिए पीरजादा का समर्थन काफी महत्वपूर्ण माना जाता रहा है और इस कारण इस बार भी टीएमसी उनका समर्थन चाहती थी मगर उन्होंने हाल में टीएमसी को करारा झटका दिया था।

congress-left congress-left (PC: social media)

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उन्होंने इंडियन सेकुलर फ्रंट के नाम से नया राजनीतिक मोर्चा बनाते हुए कांग्रेस और वामदलों के साथ गठबंधन करने का एलान किया था। पश्चिम बंगाल की कई विधानसभा सीटों पर पीरजादा का काफी असर माना जाता है। ऐसे में कांग्रेस उनके साथ गठबंधन करके काफी खुश नजर आ रही थी मगर अब पार्टी में ही इस गठबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इससे कांग्रेस की मुसीबत बढ़ गई है।

रिपोर्ट- अंशुमान तिवारी

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