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रोजगार का मुद्दाः बिहार चुनाव, भाई की सियासी जमीन की तलाश में बड़े भय्या सोरेन

बिहार विधानसभा चुनाव में रोज़गार के मुद्दे पर सियासत हो रही है। राजद के 10 लाख नौकरी के सामने भाजपा ने 19 लाख रोज़गार देने का वादा किया है। हालांकि, झारखंड में होने वाले दुमका और बेरमो उप चुनाव में रोज़गार कोई मुद्दा नहीं बन पाया है।

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MonikaBy Monika

Published on 28 Oct 2020 4:44 PM GMT

रोजगार का मुद्दाः बिहार चुनाव, भाई की सियासी जमीन की तलाश में बड़े भय्या सोरेन
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छोटे भाई की सियासी ज़मीन तलाशते बड़े भय्या हेमंत सोरेन। और सड़क पर बेरोज़गारों का मजमा।
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बिहार विधानसभा चुनाव में रोज़गार के मुद्दे पर सियासत हो रही है। राजद के 10 लाख नौकरी के सामने भाजपा ने 19 लाख रोज़गार देने का वादा किया है। हालांकि, झारखंड में होने वाले दुमका और बेरमो उप चुनाव में रोज़गार कोई मुद्दा नहीं बन पाया है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने छोटे भाई एवं दुमका से झामुमो प्रत्याशी बसंत सोरेन के लिए राजनीतिक ज़मीन की तलाश कर रहे हैं। भाई के चुनावी प्रचार में हेमंत सोरेन मोर्चा संभाले हुए हैं। विपक्ष के हर सवाल का जवाब बसंत सोरेन की जगह हेमंत सोरेन दे रहे हैं। इस बीच राज्यभर से बेरोज़गारों का दल दुमका में बसंत सोरेन को हराने में जुट गया है। झारखंड लोकसेवा आयोग के अभ्यर्थी हेमंत सरकार पर वादाख़िलाफ़ी का इल्ज़ाम लगा रहे हैं।

 हेमंत सोरेन

दुमका में हेमंत सोरेन और बेरोज़गारों का दल

राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पिछले कई दिनों से दुमका में छोटे भाई के चुनाव प्रचार में जुटे हैं। इस बीच वे बेरमो में कांग्रेस प्रत्याशी के प्रचार के लिए भी गए। हालांकि, हेमंत सोरेन का ज्यादातर समय दुमका में बीत रहा है। इस बीच छठी जेपीएससी प्रतियोगी परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले बेरोज़गार छात्र दुमका पहुंच गए हैं। छात्रों का आरोप है कि, हेमंत सोरेन ने पांच लाख रोज़गार देने का वादा किया था। साथ ही विपक्ष के नेता के तौर पर उन्होने छठी जेपीएससी परीक्षा रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद हेमंत सोरेन अपने वादे से मुकर गए हैं। इतना ही नहीं कोरोना वायरस महामारी के दौरान जेपीएससी का रिजल्ट घोषित कर नियुक्ति भी दे दी गई है। लिहाज़ा, ऐसी सरकार के ख़िलाफ़ बेरोज़गार नौजवान सड़कों पर उतर आए हैं।

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 Employment

परिवारवाद से छात्र भी नाराज़

झारखंड के बेरोज़गार छात्रों का इल्जाम है कि, सिर्फ एक ही परिवार के पास सारे संसाधन रहेंगे और पढ़े-लिखे नौजवान सड़कों पर आंदोलन करेंगे। जेपीएससी के परीक्षार्थी रहे इमाम शफी कहते हैं कि, नई हेमंत सोरेन सरकार से काफी उम्मीदें थी। खासकर रोज़गार के मुद्दे पर सरकार ने जो वादा किया था उसे पूरा करना चाहिए था। विपक्ष के नेता के तौर पर हेमंत सोरेन ने छठी जेपीएससी परीक्षा रद्द करने की बात कही थी लेकिन अब मुख्यमंत्री उससे मुकर गए हैं। इतना ही नहीं दुमका से टिकट भी एक ही परिवार के व्यक्ति को दिया गया है। ऐसे में छात्र आक्रोशित हैं।

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सरकार के पास कोविड-19 का बहाना

हेमंत सरकार रोज़गार के वादे के साथ सत्ता पर काबिज हुई। सरकार गठन के कुछ दिनों बाद बेरोज़गारी भत्ता देने की विभागीय प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन उसे अबतक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। नई सरकार आने के बाद से राज्यभर के क़रीब 65 हज़ार पारा शिक्षकों के स्थायीकरण का मुद्दा भी ठंडे बस्ते में है। स्थायीकरण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सहायक पुलिसकर्मियों को डंडे मारकर रांची से भगाया गया है। होमगार्ड, पंचायत सचिव और जेटेट के परीक्षार्थी भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। ऐसे में सरकार को रोज़गार के मुद्दे पर गंभीर पहल करने की ज़रूरत है। उप चुनाव में जिस तरह कोरोना वायरस रूकावट नहीं बना उसी तरह कोविड-19 को रोज़गार देने के रास्ते में रोड़ा के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता है।

रांची से शाहनवाज़ की रिपोर्ट

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