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इस बाहुबली को खोज रही यूपी-बिहार की पुलिस, BJP के टिकट से होना चाहते हैं पवित्र
राजन तिवारी का जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद में हुआ था। कालेज में पढ़ाई करने के दौरान ही राजन तिवारी ने अपराध की दुनिया में उतरने का मन बना लिया था।
दरभंगा: बाहुबलियों का राजनीति में उतरना और अपने बाहुबल का इस्तेमाल चुनाव जीतने के लिए करना कोई नहीं बात नहीं हैं। ये वर्षों से होता आया है।
इतिहास के पन्नों को अगर पलटकर देखें तो पूर्व में कई ऐसे राजनेता दिखाई देंगे जिन्होंने अपने बाहुबल के दम पर सत्ता का सुख भोगा है।
बात चाहें चुनाव जीतने की हो या फिर जेल जाने से बचने की हो। हर मौकों पर उनका बाहुबल उनके लिए एक हथियार की तरह काम आया है।
बिहार में कोरोना काल में विधान सभा चुनाव होने हैं। इसलिए एक बार फिर से बाहुबलियों की चर्चा शुरू हो गई है।बाहुबलियों की राजनीति, गुनाहों की गलियों से निकले उन सियासतदानों का सच है, जिनके दामन पर यूं तो गुनाहों के दाग हैं, लेकिन सियासत के रसूख से उन्हें अलग पहचान मिलती है।
राजन तिवारी की फोटो(सोशल मीडिया)
ऐसे लोग खुद को आवाम का रहनुमा कहते हैं, लेकिन जनता की जुबान में उन्हें कभी अपराधी तो कभी बाहुबली कहा जाता है। बिहार की राजनीति में सक्रिय ऐसे ही लोगों की फेहरिस्त में एक नाम राजन तिवारी का भी हैं। राजन तिवारी ऐसे बाहुबली हैं जिनका जलवा दो राज्यों यूपी और बिहार दोनों जगह रहा है।
उन्हें यूपी और बिहार दोनों जगहों की पुलिस तलाश रही है। सूत्रों के हवाले ऐसी खबर आ रही है कि वे बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़कर खुद को पवित्र करना चाहते हैं। तो आइये जानते हैं कौन हैं राजन तिवारी और उनके उपर किस तरह के आरोप हैं।
राजन तिवारी ने कॉलेज लाइफ में ही पकड़ ली थी अपराध की राह
राजन तिवारी का जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद में हुआ था। कालेज में पढ़ाई करने के दौरान ही राजन तिवारी ने अपराध की दुनिया में उतरने का मन बना लिया था।
उसने आगे चलकर यूपी के कुख्यात गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला का गिरोह ज्वाइन कर लिया था। यही से उनके जुर्म करने का सिलसिला बढ़ता ही चला गया।
राजन तिवारी की फोटो(सोशल मीडिया)
हत्या में आया था नाम
वह पहली बार लाइम लाइट में तब आए जब यूपी सरकार के विधायक रहे वीरेंद्र प्रताप शाही पर हमले में उनका नाम आया और पुलिस उनके पीछे पड़ गई।
वीरेंद्र प्रताप शाही गोरखपुर कैंट के निवासी थे। वे यूपी के महराजगंज की लक्ष्मीपुर विधानसभा सीट से विधायक रहे।
बात 24 अक्टूबर 1996 की है। उस दिन वह गोलघर कार्यालय से अपने घर जा रहे थे, वे कैंट में एक लॉज के पास ठहरे हुए थे तो उनकी कार पर बदमाशों ने गोलियां दागना शुरू कर दिया।
इस दौरान वीरेंद्र शाही के पैर में गोली लगी थी। जबकि उनके गनर जयराम की मौके पर ही मौत हो गई थी।
इस खूनी वारदात में श्रीप्रकाश शुक्ला और राजन तिवारी समेत चार लोगों को आरोपी बनाया गया था। लेकिन आगे चलकर सबूतों के अभाव में राजन तिवारी को 2014 में जेल से बरी कर दिया गया था।
बीजेपी के महामंत्री सुनील बंसल के साथ राजन तिवारी की फोटो(सोशल मीडिया)
यूपी पुलिस के डर से भागना पड़ा बिहार
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस घटना के बाद यूपी पुलिस उनके पीछे हाथ धोकर पड़ गई थी। बाद में श्रीप्रकाश शुक्ला का एनकाउंटर कर दिया गया। इस बारे में जैसे ही सूचना राजन को मिली वे जान बचाकर बिहार भाग गये और वहीं पर रहने लगे। जिसके बाद से बिहार में ही फिर से उन्होंने अपनी गैंग तैयार कर ली।
यूपी पुलिस के डर से राजन तिवारी बिहार में रहकर ही अपने आतंक के साम्राज्य को चलाने लगे। उसी वक्त राजन तिवारी का नाम बिहार सरकार के मंत्री बृजबिहारी प्रसाद की हत्या में सामने आया।
इस हत्याकांड में राजन तिवारी को निचली अदालत से उम्र कैद की सजा भी हुई, लेकिन एक बार फिर सबूतों के अभाव में वह साल 2014 में पटना हाईकोर्ट से बरी हो गए।
राजन तिवारी ने 15 साल चार महीने बृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड में जेल में बिताया। लेकिन सियासत के गलियारे में उनका रसूख बनता चला गया।
इसकी वजह यह रही कि जेल जाने से पहले राजन तिवारी ने अपने ऊपर लगे दाग को छुपाने के लिए खादी पहन ली। वह राजनीति में सक्रिय हो गए थे। यही वजह है कि जेल जाने से पहले और रिहा होने के बाद भी राजनीति में सक्रिय रहे।
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बीजेपी की सदस्यता ग्रहण करते राजन तिवारी की फोटो(सोशल मीडिया)
दाग छुड़ाने के लिए राजनीति में आए राजन तिवारी
राजनीति के जानकार बताते हैं कि राजन तिवारी बिहार के गोविंदगंज क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। हालांकि लंबे समय तक जेल में रहने के चलते उनके रसूख में थोड़ी कमी जरूर आई है, लेकिन वह उसे दोबारा पाने में जुटे हुए हैं।
जेल से बाहर आने के बाद राजन तिवारी ने 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लखनऊ में बीजेपी की मेम्बरशिप ली थी।
जिसके बाद इसपर काफी हो हल्ला भी मचा था। जिसके बाद उन्हें पार्टी के अंदर किनारे कर दिया गया। अब जबकि बिहार में एक बार फिर से विधान सभा चुनाव होने हैं।
ऐसे में राजन एक बार फिर से बिहार विधानसभा चुनाव में सक्रिय होने के लिए जी जान से लगे हुए हैं।
इससे पहले उन्होंने 2016 में बसपा का दमन थमा था, लेकिन वहां से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने बीजेपी की तरफ मुंह कर लिया।
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राजन तिवारी की फोटो(सोशल मीडिया)
बीजेपी और एलजेपी के प्रति झुकाव दिखा रहे हैं राजन तिवारी
अभी तक जो जानकारी निकलकर सामने आई है उसके अनुसार बिहार विधानसभा चुनाव में राजन तिवारी बीजेपी और एलजेपी की तरफ भी टिकट के लिए नजरे गडाए हुए हैं।
यहां ये भी बता दें कि एक समय ऐसा भी था जब राजन तिवारी लालू प्रसाद यादव के बेहद करीब थे लेकिन आजकल वे तेजस्वी यादव की कमियां और एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान की तारीफ़ करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
इतना ही नहीं राजन तिवारी ये भी मानते हैं कि बीजेपी और एलजेपी की दोस्ती अटूट है।
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