भारत ने नेपाल की अक्ल लगाई ठिकाने, गलती करने के बाद अब पछतावे का कर रहा दिखावा

बता दें कि स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल इस किताब में नेपाल ने बड़ी ही चालाकी के साथ भारत के तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों को अपने क्षेत्र की सीमा में दर्शाने का प्रयास किया था। इसमें नेपाल का संशोधित नक्शा भी शामिल था।

Nepal And China

पीएम नरेंद्र मोदी, केपी शर्मा ओली और शी जिनपिंग की फोटो(सोशल मीडिया)

भारत के कड़े तेवर के आगे एक बार फिर से नेपाल को झुकना पड़ा है। नेपाल की केपी ओली सरकार ने विवादित नक्शे वाली किताबों के वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है।

बता दें कि स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल इस किताब में नेपाल ने बड़ी ही चालाकी के साथ भारत के तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों को अपने क्षेत्र की सीमा में दर्शाने का प्रयास किया था। इसमें नेपाल का संशोधित नक्शा भी शामिल था।

जिसके बाद से भारत ने नेपाल के इस कदम पर कड़ा एतराज जताया था। इतना ही नहीं भारत ने नेपाल द्वारा हाल ही में किए गए प्रादेशिक दावों के कृत्रिम विस्तार को भी गलत ठहराया था।

मालूम हो कि नेपाल ने अपनी संसद में लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा क्षेत्रों की राजनीतिक मानचित्र को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है, जो कि भारत के उत्तराखंड राज्य के अंतर्गत आते हैं।

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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की फोटो(सोशल मीडिया)

संवेदनशील मुद्दों पर किताब का प्रकाशन सही नहीं

जहां तक इस किताब को बैन करने की बात है तो नेपाल की एक मीडिया रिपोर्ट में लिखा गया है कि विदेश मंत्रालय और भू प्रबंधन मंत्रालय ने कहा था कि इस किताब में कई तथ्याित्मेक खामियां और गलत कंटेट है, इस वजह से किताब के प्रकाशन पर रोक लगाई गई है।

कानून मंत्री शिव माया ने कहा कि हमने यह निष्क‍र्ष निकाला है कि किताब के वितरण पर रोक लगा दी जाए। कानून मंत्री ने माना है कि कई गलत तथ्योंन के साथ संवेदनशील मुद्दों पर किताब का प्रकाशन सही नहीं होगा।

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किताब की फोटो(सोशल मीडिया)

9 से 12 तक की कक्षाओं में पढ़ाई जानी थी ये किताबें

यहां ये भी बता दें नेपाल के भूमि सुधार और सहकारिता मंत्री जनक राज जोशी के प्रवक्ता ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय के पास नेपाल के भौगोलिक क्षेत्र को बदलने का अधिकार नहीं है और पुस्तक में कई तथ्यात्मक गल्तिया हैं।

उन्होंने कहा कि उच्च अधिकारियों को सुधारात्मक उपाय करने के लिए कहा गया है। उधर मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में शिक्षा मंत्रालय को निर्देशित किया गया है कि कक्षा 9 से 12 तक की पाठ्य पुस्तक की किसी भी किताब को वितरित और मुद्रित न किया जाए।

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