Top
TRENDING TAGS :Coronavirusvaccination

बिहार के ये पांच अनमोल रत्न, जिन्होंने बढ़ाया देश दुनिया में मान

कुछ लोग ऐसा काम कर जाते हैं कि वो सिर्फ अपना नाम नहीं करते बल्कि परिवार समाज के साथ देश और राज्य का नाम भी ऊंचा करते हैं । ऐसे ही 5 सपुत हैं बिहार के सत्यम कुमार ,तुलसी अवतार तथागत, आनंद कुमार, आरके श्रीवास्तव और ऋतु जायसवाल  जो बिहार की कोख से पलकर अपने शैक्षणिक और सामाजिक कार्यो से बन चुके है लाखों युवायों के रोल मॉडल...

Suman

SumanBy Suman

Published on 21 July 2020 3:57 AM GMT

बिहार के ये पांच अनमोल रत्न, जिन्होंने बढ़ाया देश दुनिया में मान
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

पटना कुछ लोग ऐसा काम कर जाते हैं कि वो सिर्फ अपना नाम नहीं करते बल्कि परिवार समाज के साथ देश और राज्य का नाम भी ऊंचा करते हैं । ऐसे ही 5 सपुत हैं बिहार के सत्यम कुमार ,तुलसी अवतार तथागत, आनंद कुमार, आरके श्रीवास्तव और ऋतु जायसवाल जो बिहार की कोख से पलकर अपने शैक्षणिक और सामाजिक कार्यो से बन चुके है लाखों युवायों के रोल मॉडल...

यह पढ़ें...टंडन का अटल से ऐसा नाता, पार्षद से राज्यपाल तक, आसान नहीं था राजनीति का सफर

सत्यम कुमार

बिहार के साथ देश का नाम भी सत्यम ने रौशन किया है। इतनी छोटी उम्र में ही इतनी बडी उपलब्धि हासिल करना बहुत बडी बात है। मात्र 12 साल की उम्र में दुनिया का सबसे कठिन परीक्षा माना जाने वाला आई आईटी जेईई ( IIT JEE) को क्रैक कर पूरी दुनिया में तहलका मचा देने वाला बिहार का सत्यम बीते वर्ष में भी फ्रांस में इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए नजीर बन चुका था। 12 साल की नन्ही सी उम्र में आईआईटी के ऊंचे किले को फतह करने वाला सत्यम के कायल फ्रांस में इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स भी रह चुके हैं। सत्यम अपनी मेधा के कायल फ्रांसिसी छात्रों को भारतीय शिक्षा पद्धति का गुर सीखा चुके हैं। भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड के बखोरापुर निवासी रामलाल सिंह का पोता सत्यम कुमार भारत में खूब नाम कमा चुके थे। जब महज बारह वर्ष की उम्र में आईआईटी की प्रतियोगिता में बुलंदी का झड़ा गाड़ा था। फिलहाल सत्यम आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिकल ब्राच से बीटेक कर पास हो चुका है। वर्तमान में सत्यम ( The university of texas at austin )से पीएचडी की पढ़ाई कर रहे हैं।

आईआईटी कानपुर में पढ़ाई के दौरान फ्रांस में समर रिसर्च इन्टर्न के अवसर पर ‘ब्रेन कम्प्यूटर इन्टरफेसेज’ विषय पर रिसर्च के लिए सत्यम का चयन कर लिया गया था। उसका चयन फ्रांस के चार्पैक स्कॉलरशीप तथा भारत सरकार में ‘ए सर्विस ऑफ दी एम्बेसी’ के संयुक्त तत्वावधान में ‘टू प्रमोट हाईयर एजुकेशन इन फ्रांस’ के लिए भी हो चुका था। वही दुसरी तरफ फ्रांस के डीयू लैब के डायरेक्टर गिल्स कौपीन ने फोन से सत्यम से बात कर छात्रों को मोटीवेट करने का प्रस्ताव भी भेजा था जिस पर सत्यम ने अपनी सहमती भी दे दी । सत्यम फिलवक्त फ्रांस के ब्रीस्ट शहर में टेलिकॉम डी सी ब्रीटेग्नी में रिसर्च का काम डीयू के लैब निर्देशक गिल्स कौपीन व फ्रांसिस्को एन्ड्रयूली के सान्निध्य में भी कर चुके है।

तुलसी अवतार तथागत

तथागत अवतार तुलसी जिसने महज 9 साल की उम्र में मैट्रिकुलेशन, 11 साल की उम्र में ही बीएससी और 12 साल की उम्र में एमएससी की डिग्री हासिल कर इतिहास रच दिया था। मात्र 22 साल की उम्र में ही आईआईटी, मुंबई में उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर बनने बनने का गौरव हासिल हुआ था। तुलसी आईआईटी के सबसे युवा प्रोफेसर माने जाते है। डा. तथागत अवतार तुलसी ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु से पीएचडी कर भारत के सबसे युवा पीएचडी होल्डर और सबसे कम पेज का (मात्र 33 पेज) पीएचडी थेसिस लिखने का रिकार्ड भी बनाया था। तथागत की उपलब्धियों पर ही 2002 में आई हॉलीवुड फिल्म ए ब्यूटीफुल माइंड प्रेरित थी। इस फिल्म को चार ऑस्कर पुरस्कार भी मिले थे। तथागत ने कहा कि आईआईटी, पटना ने मेरे ऑफर को ठुकरा दिया था। तुलसी को कनाडा की वाटरलू यूनिवर्सिटी ने भी अच्छे खासे पैकेज पर अपने यहां प्रोफेसर बनने का ऑफर दिया था लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया था क्योंकि वह देश में रहकर ही काम करना चाहते थे।उन्हें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस भोपाल ने भी नौकरी की पेशकश की थी। 2003 में उन्हें टाइम पत्रिका ने विश्व के सात सर्वाधिक चमत्कारिक युवाओं की लिस्ट में शामिल किया था।

यह पढ़ें...अशुभ साबित हुआ UP के राजनेताओं का मध्यप्रदेश का राज्यपाल बनना

आनंद कुमार

शिक्षा के क्षेत्र में पटना के आनंद कुमार और उनकी संस्था ‘सुपर 30’ को कौन नहीं जानता। हर साल आईआईटी रिजल्ट्स के दौरान उनके ‘सुपर 30’ की चर्चा अखबारों में खूब सुर्खियाँ बटोरती हैं। आनंद कुमार अपने इस संस्था के जरिए गरीब मेधावी बच्चों के आईआईटी में पढ़ने के सपने को हकीकत में बदलते हैं। सन् 2002 में आनंद सर ने सुपर 30 की शुरुआत की और तीस बच्चों को नि:शुल्क आईआईटी की कोचिंग देना शुरु किया। पहले ही साल यानी 2003 की आईआईटी प्रवेश परीक्षाओं में सुपर 30 के 30 में से 18 बच्चों को सफलता हासिल हो गई। उसके बाद 2004 में 30 में से 22 बच्चे और 2005 में 26 बच्चों को सफलता मिली। इसीप्रकार सफलता का ग्राफ लगातार बढ़ता गया। सन् 2008 से 2010 तक सुपर 30 का रिजल्ट सौ प्रतिशत रहा। आज आनंद कुमार राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय मंचों को संबोधित करते हैं। उनके सुपर 30 की चर्चा विदेशों तक फैल चुकी है। कई विदेशी विद्वान उनका इंस्टीट्यूट देखने आते हैं और आनंद कुमार की कार्यशैली को समझने की कोशिश करते हैं। आनंद कुमार को विश्व के प्रतिष्ठित विश्विद्यालय अपने यहाँ सेमिनार के लिए भी बुलाते है। आज आनंद कुमार का नाम पूरी दुनिया जानती है और इसमें कोई शक नहीं कि आनंद कुमार बिहार का गौरव है

यह पढ़ें..कोरोना वैक्सीन पर दुनिया को मिली बड़ी खुशखबरी, इस देश ने 10 करोड़ डोज…

आरके श्रीवास्तव

मशहूर शिक्षक मैथमेटिक्स गुरु फेम आरके श्रीवास्तव सिर्फ 1 रुपया गुरु दक्षिणा लेकर गणित पढाने के लिये मशहूर है। सैकड़ों आर्थिक रूप से गरीब स्टूडेंट्स को आईआईटी, एनआईटी, बीसीईसीई सहित देश के प्रतिष्ठित संस्थानो मे दाखिला दिलाकर उनके सपने को पंख लगा चुके है। जादुई तरीके से गणित पढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। कबाड़ की जुगाड़ से खिलौने बनाकर प्रैक्टिकल कर गणित पढाने का तरीका लाजवाब है। उनकी पढ़ाई की खासियत है कि वह बहुत ही स्पष्ट और सरल तरीके से समझाते है। सामाजिक सरोकार से गणित को जोड़कर, चुटकुले बनाकर सवाल हल करना आरके श्रीवास्तव की पहचान है। गणित के लिये इनके द्वारा चलाया जा रहा निःशुल्क नाईट क्लासेज अभियान पूरे देश मे चर्चा का विषय बना हुआ है । पूरे रात लगातार 12 घण्टे स्टूडेंट्स को गणित का गुर सिखाना कोई चमत्कार से कम नही,इस क्लास को देखने और उनका शैक्षणिक कार्यशैली को समझने के लिए कई विद्वान इनका इंस्टीटूट देखने आते है । नाईट क्लासेज अभियान हेतु स्टूडेंट्स को सेल्फ स्टडी के प्रति जागरूक करने और गणित को आसान बनाने के लिए यह नाईट क्लासेज अभियान अभिभावकों को खूब भा रहा ।

इनके नाम कई वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है

आरके श्रीवास्तव का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्डस , एशिया बुक ऑफ रिकार्ड्स , इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज हो चुका है ।आरके श्रीवास्तव गणित बिरादरी सहित पूरे देश मे उस समय चर्चा में आये जब इन्होंने क्लासरूम प्रोग्राम में बिना रुके पाइथागोरस थ्योरम को 50 से ज्यादा अलग – अलग तरीके से सिद्ध कर दिखाया ।आरके श्रीवास्तव ने कुल 52 अलग अलग तरीको से पाइथागोरस थ्योरम को सिद्ध कर दिखाया । जिसके लिए इनका नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड्स लंदन में दर्ज चुका है ।वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड्स लंदन के छपी किताब में यह जिक्र भी है कि बिहार के आरके श्रीवास्तव ने बिना रुके 52 विभिन्न तरीकों से पाइथागोरस थ्योरम को सिद्ध कर दिखाया ।

आरके श्रीवास्तव अपने पढ़ाई के दौरान टीबी की बीमारी के चलते नही दे पाये थे आईआईटी प्रवेश परीक्षा। उनकी इसी टिस ने बना दिया सैकड़ों स्टूडेंट्स को इंजीनयर। आर्थिक रूप से गरीब परिवार में जन्मे आरके श्रीवास्तव का जीवन भी काफी संघर्ष भरा रहा ।

ऋतु जायसवाल

सीतामढ़ी के गांवों की नई इबारत लिख रही हैं! दिल्ली में आईएएस के रूप में पदस्थापित अरूण कुमार जायसवाल की पत्नी ॠतु जायसवाल वर्तमान में बिहार के सीतामढ़ी के सोनवर्षा प्रखंड के सिंघवाहिनी पंचायत से मुखिया हैं। अपने प्रयास से ऋतु ने लोगों को समझाया कि अपना वोट मत बेचो। मुखिया को पंचायत में शौचालय व पानी की व्यवस्था करनी होती है इसलिए उन्हें चंद रुपयों की लोभ में वोट नहीं बेचना चाहिए। ऐसा करने से वे सुविधाओं से वंचित हो जाते थे और आजीवन बीमारी के शिकार होते थें। लोगों ने भी बात को समझा और उन्हें समर्थन देकर भारी मतों से जीत दिलाया।उनके प्रयास से आजादी के बाद पहली बार बिजली आई। कुछ एनजीओ की मदद से बच्चों के लिए ट्यूशन क्लास शुरू करवाई गई। असर यह हुआ कि इस बेहद पिछड़े गांव की 12 लड़कियां एक साथ मैट्रिक पास हुई हैं। गांव के लोगों के कहने पर ही उन्होंने चुनाव लड़ा और तमाम जातीय समीकरणों के बावजूद भारी मतों से जीत गईं।

गांव में रहकर ही गांव की तस्वीर बदलेंगी

वह कहती हैं कि जिस संकल्प को लेकर वे मुखिया का चुनाव लड़ी हैं उसे वह हर हाल में पूरा करेंगी। अब गांव में रहकर ही गांव की तस्वीर बदलेंगी। उन्होंने बताया कि उनके गांव में ना तो चलने के लिए सड़क है और ना ही पीने के लिए शुद्ध पानी। लोगों को शौचालय के बारे में भी पता नहीं था कि शौचालय क्या होता है। गांव के तक़रीबन अस्सी प्रतिशत लोग आज भी सड़कों पर शौच के लिए जाते हैं। बिजली सहित तमाम मूलभूत सुविधाओं से लोग अब भी कोसो दूर हैं। वह कहती हैं कि मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने के बाद विकास के काम पर ध्यान देंगी। विकास के लिए उन्होंने कृषि विभाग से बात किया है। विभाग यहां के लोगों को ट्रेंनिंग देगा जिससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा। यहां की भूमि कृषि योग्य है पर यहां के लोग अब बाहर जा रहे है कमाने के लिए।

गांव में सिर्फ औरतें और बुजूर्ग हैं। बिजली विभाग से बात कर एक गांव में बिजली लाने में सफल हुईं। अपने गांव की फोटो खींच एक डॉक्युमेंटरी बनाई और एनजीओ को दिखाया। फिर वह काम करने के लिए तैयार हो गएं। वे बताती हैं कि दो साल में कई एनजीओ आए और गांव की महिलाओं और लड़कियों को सिलाई-कढ़ाई की ट्रेनिंग दिलाया गया। यह सारा फंड एनजीओ ही वहन करते थे। करीब दो साल पहले नरकटिया के बच्चों के लिए सामुहिक रूप से दो ट्यूटर लगवाए। वे कहती हैं गांव की हालत अब सुधर रही है लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। सामाजिक कार्य में रुची उन्हें पहले से थी पर गांव को देख रुची और ज्यादा बढ़ गया। वे कहती हैं कि इस गांव से एक लगाव सा हो गया।

एक बहुत बड़ी उपलब्धि

सिंघवाहिनी पंचायत में नरकटिया को मिलाकर 6 गांव हैं। नरकटिया की आबादी 2300 के आसपास है। बाकी सभी गांव इससे बड़े हैं। इससे पहले जितने भी मुखिया थे उन्होंने कुछ काम नहीं किया है। इस बार भी बहुत लोगों ने मुखिया पद के लिए पर्चा भरा था। चुनाव में उनको यहां के लोगों का तो साथ मिला ही साथ ही उनके पति का भी बहुत सहयोग रहा। क्षेत्र में उनके द्वारा किये अच्छे कामों, प्रयासों और लोकप्रियता का ही नतीजा था कि उन्होंने एक शांति रैली निकाली जिसका मकसद था लोगों को जागरुक करना जिसमें छह हजार लोग शामिल हुए जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी कि इस रैली में इतने लोग शामिल होंगे। सबसे बड़ी बात तो यह थी कि महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। उस रैली में ऐसी महिलाएं भी शामिल हुईं जो कभी घर से बाहर कदम भी नहीं रखी थीं। वह कदम से कदम मिलाकर चल रही थीं। यह उनके लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी

यह पढ़ें..पापड़ बेचने वाले आनंद कुमार और ऑटो रिक्शा वाले आरके श्रीवास्तव की ऐसी है कहानी

वे मुखिया का चुनाव दो हजार वोटों से जीतीं। यह जीत उन दो हजार लोगों के बदलते हुए समाज की जीत थी। ॠतु जयसवाल ने अपनी पढ़ाई वैशाली महिला महाविद्यालय, हाजीपुर से किया है। उन्होंने बीए की डीग्री अर्थशास्त्र में ली। शादी के बाद भी पढ़ाई जारी रखा। उनके दोनों बच्चे बैंगलोर के एक रेसीडेंशियल स्कूल में पढ़ते हैं। इसके लिए उनकी बेटी अवनि जो 7वीं में पढ़ती है उसने उनका बहुत सहयोग किया ताकि वे अपना ज्यादातर वक्त गांव में ही बीता सकें। वह अपने बेटी के बारे में कहती है कि जब उन्होंने अपनी बेटी से बात की तो वह बोली कि मैं तो होस्टल में रह लूंगी और आप बहुत सारे बच्चों की जिंदगी बदल पाएंगी। बेटी की इस बात से उन्हें बहुत हौसला मिला।

सारी सुख सुविधाओं को छोड़ सिर्फ समाज सेवा

शहर की सारी सुख सुविधाओं को छोड़ सिर्फ समाज सेवा के मकसद से गाँव की तस्वीर बदलने में लगी है। इसकी जितनी भी तारीफ किया जाए कम है। लोग तो सफलता मिलने के बाद गाँव को भूल ही जाते है, शहर को अपना घर बना लेते है और गाँव से अपना रिश्ता ही तोड लेते हैं मगर ऋतु जायसवाल ने न सिर्फ अपने पति और परिवार का नाम रौशन किया बल्कि अन्य लोगों के लिए भी एक आदर्श स्थापित करने का काम किया है। कई राष्ट्रीय अवॉर्ड से भी सम्मानित हो चुकी है। हमें इन पे गर्व होना चाहिए। ये समाज के लिये रोल मॉडल बन चुकी है

हमारे देश ने दुनिया को कई सारे महान व्यक्ति दिए है। उन्होंने अपने अपने क्षेत्र में काफी बड़ा योगदान दिया है। किसी ने कला और साहित्य को बढ़ाने का काम किया तो किसी ने खेल के क्षेत्र मे देश का नाम रोशन किया है। इसी तरह सत्यम कुमार, तुलसी अवतार तथागत, आनंद कुमार और आरके श्रीवास्तव , ऋतू जायसवाल अपने शैक्षणिक और सामाजिक कार्यशैली से बेहतर राष्ट्र निर्माण मे अपना योगदान दे रहे।

देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।

Suman

Suman

Next Story