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तेजप्रताप के तीखे तेवर से राजद में भूचाल, पार्टी में गंभीर मतभेद उजागर

प्रदेश अध्यक्ष पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने यहां तक कह डाला कि उनके पिता लालू प्रसाद यादव की बीमारी के लिए जगदानंद सिंह जैसे नेता ही जिम्मेदार हैं।

Roshni Khan
Published on: 14 Feb 2021 7:08 AM GMT
तेजप्रताप के तीखे तेवर से राजद में भूचाल, पार्टी में गंभीर मतभेद उजागर
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तेजप्रताप के तीखे तेवर से राजद में भूचाल, पार्टी में गंभीर मतभेद उजागर (PC: social media)

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की हार के बाद राजद में भी अंदरूनी उथल-पुथल का दौर चल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने शनिवार को जिस तरह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला, उससे पार्टी में गंभीर मतभेद होने के साफ संकेत मिले हैं।

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पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पर गंभीर आरोप

प्रदेश अध्यक्ष पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने यहां तक कह डाला कि उनके पिता लालू प्रसाद यादव की बीमारी के लिए जगदानंद सिंह जैसे नेता ही जिम्मेदार हैं।

tez-pratap-yadav tez-pratap-yadav (PC: social media)

जगदानंद सिंह को तेज प्रताप के छोटे भाई और बिहार में राजद के चेहरे तेजस्वी यादव का करीबी माना जाता है। तेज प्रताप के आरोपों के बाद माना जा रहा है कि पार्टी में अंदरूनी तौर पर सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है।

दूसरी ओर जगदानंद सिंह का कहना है कि यह पार्टी का अंदरूनी मामला है और जल्दी ही इसे सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि तेजप्रताप की नाराजगी की वजह पता की जाएगी और फिर हम उसे दूर करने में जुटेंगे।

इस कारण भड़के हुए हैं तेजप्रताप

जानकारों का कहना है कि तेजप्रताप की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण लालू प्रसाद यादव की रिहाई के लिए जारी आजादी अभियान में जगदानंद सिंह का साथ न देना है। गंभीर रूप से बीमार होकर इन दिनों दिल्ली एम्स में भर्ती लालू प्रसाद यादव की रिहाई के लिए तेजप्रताप ने आजादी पत्र लिखने का अभियान चलाया था।

बताया जा रहा है कि इस अभियान में जगदानंद सिंह का साथ नहीं मिला। इसके बाद तेजप्रताप का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

जनता से कटे रहते हैं प्रदेश अध्यक्ष

तेजप्रताप ने जगदानंद सिंह को घेरते हुए कहा कि लालू यादव की रिहाई के लिए उन्होंने आजादी पत्र नहीं लिखा है। उनके जैसे लोग ही लालू की बीमारी का सबसे बड़ा कारण हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मेरे यहां आने के बावजूद जगदानंद सिंह अपने चैंबर में बैठे हुए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का अध्यक्ष ऐसा होना चाहिए जो हमेशा जनता के बीच रहे।

यहां तो प्रदेश अध्यक्ष से मिलने के लिए विधायक तक को अर्जी देनी पड़ती है। इससे आसानी से समझा जा सकता है कि आम जनता की क्या स्थिति होती होगी। प्रदेश अध्यक्ष न तो विधायकों से मिलते हैं और न आम जनता के बीच में जाते हैं। वे अपनी ही पार्टी के नेताओं से दूरी बनाकर चलते हैं।

पार्टी को नष्ट करने का आरोप लगाया

उन्होंने कहा कि राजद गरीबों और आम लोगों से जुड़ी हुई पार्टी है। जगदानंद सिंह पार्टी का नाश करने में जुटे हुए हैं। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पर पार्टी को बर्बाद करने का आरोप भी लगाया।

उन्होंने कहा कि मैं हसनपुर से विधायक हूं और यहां पर एक घंटे से खड़ा हूं मगर अभी तक प्रदेश अध्यक्ष को मुझसे मिलने की फुर्सत नहीं मिली। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे के कार्यकाल में ऐसा नहीं होता था।

जब हम पार्टी ऑफिस जाते थे तो वे स्वागत के लिए गेट तक जरूर आते थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब भी मैं कोई कार्यक्रम करता हूं तो जगदानंद सिंह उस कार्यक्रम से दूरी बनाने में जुटे जाते हैं।

रक्षात्मक मुद्रा में दिखे प्रदेश अध्यक्ष

तेज प्रताप के तीखे तेवरों के बाद राजद प्रदेश अध्यक्ष रक्षात्मक मुद्रा में आ गए। उन्होंने कहा कि यह पार्टी का अंदरूनी मामला है और इसे सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी आजादी पत्रों को एक दिन में नहीं लिखा जा सकता। पत्र लिखने का काम चल रहा है और पार्टी इस काम को आगे बढ़ाने में जुटी हुई है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी को पार्टी की चिंता है तो यह निश्चित रूप से पार्टी के भविष्य के लिए अच्छी बात है। तेजप्रताप के मुलाकात न करने के आरोपों के संबंध में उन्होंने कहा कि मुझे उनके यहां आने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

RJD tez-pratap-yadav (PC: social media)

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तेजस्वी यादव के करीबी हैं जगदानंद

सियासी जानकारों का मानना है कि तेज प्रताप के तीखे तेवरों से राजद नेताओं के बीच तीखे मतभेद उभरते दिख रहे हैं। जगदानंद सिंह को तेजप्रताप के छोटे भाई और लालू प्रसाद यादव के बाद राजद के सबसे ताकतवर नेता माने जाने वाले तेजस्वी यादव का करीबी माना जाता है।

ऐसे में जगदानंद सिंह के खिलाफ तेज प्रताप का हमला कुछ अलग ही कहानी कहता नजर आ रहा है। हालांकि पार्टी के दूसरे नेता इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।

रिपोर्ट- अंशुमान तिवारी

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