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Vodafone-Idea ने सरकार को क्यों दिया 1000 करोड़, जानिए पूरा मामला

वोडाफोन-आइडिया ने समायोजित सकल आय (एजीआर) बकाए को लेकर दूरसंचार विभाग को एक हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया है। इससे पहले 17 फरवरी 2020 को भी कंपनी ने 2,500 करोड़ रुपये जमा किए थे।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 20 Feb 2020 10:11 AM GMT

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नई दिल्ली: वोडाफोन-आइडिया ने समायोजित सकल आय (एजीआर) बकाए को लेकर दूरसंचार विभाग को एक हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया है। इससे पहले 17 फरवरी 2020 को भी कंपनी ने 2,500 करोड़ रुपये जमा किए थे। इस बात की जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी। अभी भी वोडाफोन आइडिया पर 49,538 करोड़ रुपये बकाया है। जबकि पहले यह रकम 53,038 करोड़ रुपये थी।

एक रिपोर्ट में दूरसंचार विभाग के सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि टाटा टेलीसर्विसेज को भी एक से दो दिन में पूरे बकाए का भुगतान करने का नोटिस भेजा गया है। भुगतान के बाद वोडाफोन आइडिया के शेयर में बढ़त देखी गई है। दोपहर 2:05 बजे कंपनी का शेयर 3.57 फीसदी की बढ़त के बाद 4.35 के स्तर पर था। जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 4.20 के स्तर पर बंद हुआ था।

एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज ने भी किया था भुगतान

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद भारती एयरटेल ने एजीआर बकाए में से सरकार को 10,000 करोड़ रुपये जमा किए थे। इसके बाद वोडाफोन आइडिया और टाटा टेलीसर्विसेज ने कम्रशः 2,500 करोड़ और 2,190 करोड़ रुपये जमा किए थे।

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कौन सी कंपनी पर कितना बकाया

अक्टूबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को 90 दिनों के भीतर बकाया 92,000 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। कंपनियों पर एजीआर और ब्याज की रकम मिलाकर करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये बकाया है। गत 16 जनवरी को कोर्ट ने कंपनियों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका को खारीज कर दिया था।

वोडाफोन आइडिया- 49,538 करोड़ रुपये

रिलायंस जियो- 45,000 करोड़ रुपये

भारती एयरटेल- 25,586 करोड़ रुपये

टाटा टेलीकॉम- 11,633 करोड़ रुपये

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वोडाफोन आइडिया ने एजीआर का सांविधिक बकाया चुकाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे उच्चतम न्यायालय ने ठुकरा दिया था। वोडाफोन आइडिया ने कहा था कि कारोबार का भविष्य सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में संशोधन के लिए दायर याचिका के परिणाम पर निर्भर करेगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा था कि, क्या इस देश में कानून नाम की चीज बची है? क्या हम सुप्रीम कोर्ट बंद कर दें? जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने यह कहते हुए वोडाफोन-आइडिया, एयरटेल समेत सभी दूरसंचार कंपनियों के एमडी व सीएमडी के खिलाफ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों नहीं उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए?

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