वोडाफोन-आइडिया की नई दरें: होगी अप्रैल से लागू , यूजर्स पर बढ़ेगा दबाव

टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया ने मोबाइल डेटा के लिए शुल्क बढ़ाकर न्यूनतम 35 रुपये प्रति GB की दर तय करने की मांग की है। यह मौजूदा दर का करीब सात-आठ गुना है।

Published by suman Published: February 28, 2020 | 1:03 pm

नई दिल्ली टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया ने मोबाइल डेटा के लिए शुल्क बढ़ाकर न्यूनतम 35 रुपये प्रति GB की दर तय करने की मांग की है। यह मौजूदा दर का करीब सात-आठ गुना है। कंपनी ने इसके साथ ही एक निर्धारित मासिक शुल्क के साथ कॉल सेवाओं के लिए 6 पैसे प्रति मिनट की दर तय करने की भी मांग की है। कंपनी ने कहा है कि उसे  बकाया का भुगतान करने में सक्षम बनाने और उसके कारोबार को परिचालन योग्य बनाने के लिए एक अप्रैल से ये नई दरें लागू की जानी चाहिए।

 

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सरकार से कई मांग

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने एजीआर बकाए के भुगतान के लिए 18 साल की समयसीमा की मांग की है। इसके साथ ही कंपनी ने कहा है कि उसे ब्याज व जुर्माने के भुगतान से तीन साल की छूट भी मिलनी चाहिए। उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार, वोडाफोन आइडिया पर करीब 53 हजार करोड़ रुपये का एजीआर बकाया है। कंपनी ने अब तक दूरसंचार विभाग को महज 3500 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया है। एक अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर कहा, ‘वोडाफोन आइडिया ने परिचालन में बने रहने के लिए सरकार से कई मांगें की है। कंपनी चाहती है कि एक अप्रैल 2020 से मोबाइल डेटा का शुल्क न्यूनतम 35 रुपये प्रति गीगाबाइट (जीबी) और न्यूनतम 50 रुपये का मासिक कनेक्शन शुल्क निर्धारित हो। ये काफी कठिन मांगें हैं और इन्हें मान पाना सरकार के लिए समस्या है।

सेवाओं की दरें 50 प्रतिशत तक बढ़ी

खबरों के अनुसार, कॉल सेवाओं के लिए भी न्यूनतम छह पैसे प्रति मिनट की दर तय की जानी चाहिए। कंपनी ने ये मांगें ऐसे समय की है जब वह पहले ही पिछले तीन महीने के भीतर मोबाइल सेवाओं की दरें 50 प्रतिशत तक बढ़ा चुकी है। सूत्र ने कहा, ‘कंपनी के अनुसार, मोबाइल कॉल और डेटा की दरें बढ़ाने से उसे राजस्व का वह स्तर पाने में मदद मिलेगी जो 2015-16 में आइडिया और वोडाफोन अलग-अलग कमा पा रही थी।

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कंपनी ने कहा कि उसे राजस्व का वह स्तर पाने में तीन साल लगेंगे, इसी कारण उसने एजीआर जुर्माने व ब्याज के भुगतान में तीन साल की छूट की मांग की है।’ वोडाफोन आइडिया के एक प्रवक्ता ने इस बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सरकार दूरसंचार कंपनियों के राजस्व के आधार पर लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयाग शुल्क वसूलती है।