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बदायूं की तीनों महिला सिपाही फंसी अपने ही बुने जाल में, अब हुआ तबादला

उत्तर प्रदेश के बदायूं में थानाध्यक्ष पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाने वाली तीनों महिला आरक्षी अपने बुने जाल में खुद ही फंस गई। जानकारी के मुताबिक महिला आरक्षियों द्वारा वीडियो वायरल किए जाने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 25 May 2019 9:51 AM GMT

बदायूं की तीनों महिला सिपाही फंसी अपने ही बुने जाल में, अब हुआ तबादला
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बदायूं: उत्तर प्रदेश के बदायूं में थानाध्यक्ष पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाने वाली तीनों महिला आरक्षी अपने बुने जाल में खुद ही फंस गई। जानकारी के मुताबिक महिला आरक्षियों द्वारा वीडियो वायरल किए जाने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था लेकिन एसपी सिटी द्वारा की गई जांच में सामने आया है कि तीनो महिला सिपाहियों ने एसओ पर झूठे आरोप लगाए थे। वहीं तीनों महिला कांस्टेबलों के झूठ का पर्दाफाश होने के बाद सजा के तौर पर उनका तबादला कर दिया गया है।

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जानिए पूरा मामला-

बीते दीनों बदायूं में तीन महिला सिपाहियों का वीडियो वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में तीनों महिला सिपाहियों ने एसओ पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं मामले को गंभीरता से लेते हे एसएसपी ने एसपी सिटी को जांच सौंप दी थी। वहीं एसपी सिटी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव जांच के तहत शुक्रवार को थाने पहुंचे थे। यहां उन्होने और सीओ उझानी ने तीनों महिला सिपाहियों और एसओ सहित पूरे स्टाफ के एक-एक कर बयान दर्ज किए थे। जिसके बाद बदायूं पुलिस ने ट्वीट कर जानकारी दी थी कि, एसएसपी बदायूं के आदेशानुसार एसपी सीटी एवं सीओ उझानी की संयुक्त टीम द्वारा मामले की जांच की गई है जिसमे थानाध्यक्ष पर लगाए गए आरोप असत्य व निराधार पाये गए। वहीं ड्यूटी न करने व अनुशासनहीनता बरते जाने पर संबंधित तीनो महिला सिपाहियों का स्थानांतरण जनपद के विभिन्न थानों में कर दिया गया है।

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ये था मामला-

दरअसल बदायूं जिले के कादर चौक थाने की तीन महिला कांस्टेबलों सरिता यादव, पूजा और पूनम ने थानाध्यक्ष और एक कांस्टेबल पर छेड़खानी करने और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे । ये तीनों महिला आरक्षी 22 मई को एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी से मिली थी और थानाध्यक्ष पर उत्पीड़न करने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं कादरचौक थाने के एसओ ने तीनों महिला सिपाहियों की अनुशासनहीनता संबंधी रिपोर्ट दी थी। साथ ही बताया था कि इन तीनो ने एक सिपाही को दो दिन पहले थप्पड भी मारा था। वहीं मामले की जांच की गई तो तीनो महिलाओं के सभी आरोप झूठे और निराधार पाए गए। जिसके बाद तीनो महिला आरक्षियों का तबादला कर दिया गया है।



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