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IPS अफसर की मदद से एक कैंसर पीड़िता बच्ची की जिंदगी हुई रोशन

उत्तर प्रदेश में बांदा जिले में कैंसर से जूझ रही एक छह साल की मासूम बच्ची के लिए  एक पुलिस ऑफिसर फरिश्ता साबित हुआ है। जानकारी के मुताबिक गरीबी की मार झेल रहे परिवार की 6 वर्षीया मासूम बच्ची आँख के कैंसर से पीड़ित थी।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 29 May 2019 11:51 AM GMT

IPS अफसर की मदद से एक कैंसर पीड़िता बच्ची की जिंदगी हुई रोशन
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बांदा: उत्तर प्रदेश में बांदा जिले में कैंसर से जूझ रही एक छह साल की मासूम बच्ची के लिए एक पुलिस ऑफिसर फरिश्ता साबित हुआ है। जानकारी के मुताबिक गरीबी की मार झेल रहे परिवार की 6 वर्षीया मासूम बच्ची आँख के कैंसर से पीड़ित थी। मां-बाप के लिए घर में दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना ही बहुत बड़ी बात थी ऐसे हालात में वे अपनी लाड़ली की आंख का इलाज कराने में असमर्थ थे। लेकिन मीडिया के कुछ लोगों ने मासूम की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी।

वहीं जब मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस को मासूम बच्ची के बारे में पता चला तो उन्होने दरियादिली दिखाते हुए बच्ची को ग्वालियर बुलवा लिया और अपने खर्चे से उसकी आंख के कैंसर का सफल ऑपरेशल कराया। आज इसी अधिकारी की बदौलत मासूम बच्ची की दुनिया भी रौशन हो गई है।

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जानिए पूरा मामला-

उत्तर प्रदेश के बांदा में एक 6 साल की मासूम की जिंदगी एक आईपीएस अधिकारी ने रौशन कर दी। दरअसल आपको बता दें कि जिले के महोखर गांव की छह साल की दलित बच्ची अंशिका को आंख और मस्तिष्क के बीच कैंसर हो गया था मासूम का परिवार बेहद गरीब है। तंगहाल जिंदगी जी रहे परिवार की इतनी हैसियत नहीं की वे 6 साल की मासूम के आंख के कैंसर का इलाज करा सके। गरीबी से बेबस परिवार ने बच्ची के इलाज के लिए बांदा के डीएम हीरालाल से भी मदद मांगी थी लेकिन डीएम साहब ने मदद करने से साफ इंकार कर दिया था। वहीं बता दें कि इसी पीड़ित बच्ची की बहन अंजली वर्मा को बांदा डीएम हीरालाल ने चुनाव आयोग की तरफ से इलेक्शन अम्बेसडर बना रखा था लेकिन जब मदद की बात आयी तो बाँदा डीएम ने खामोशी अख्तियार कर ली थी

समाजसेवी ने सोशल मीडिया पर बच्ची के इलाज संबंधित पोस्ट डाली थी

ऐसे में परिजन बच्ची के इलाज की आस छोड़ ही चुके थे। लेकिन इसी बीच एक समाजसेवी ने इसे ट्यूमर मानकर सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल दी और देश के लोगों से बच्ची के इलाज के लिए आर्थिक मदद का आह्वान किया। सोशल मीडिया की पोस्ट पढ़कर नोएडा के धनंजय सिंह ने बच्ची को दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन वहां चिकित्सकों ने कैंसर बताकर वापस कर दिया। बाद में धनंजय ने अपने चाचा राजाबाबू सिंह जो ग्वालियर के आईजी है उनसे बच्ची की तकलीफ के बारे में बात की।

आईजी ने बच्ची की आंख के इलाज का पूरा खर्चा उठाया-

वहीं मध्यप्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी और ग्वालियर रेंज के आईजी राजाबाबू सिंह को बच्ची की तकलीफ के बारे में पता चला तो उन्होने बच्ची का इलाज कराने की ठान ली। उन्होने मासूम को ग्वालियर बुलवाया और यहां बच्ची की आंख के कैंसर का न सिर्फ इलाज कराया बल्कि पूरा खर्चा भी उठाया।

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परिजन कर रहे आईजी की तारीफ-

आपको बता दें कि आज मासूम बच्ची अंशिका आईपीएस अधिकारी राजाबाबू सिंह की बदौलत अपनी आंखो से दुनिया की खूबसूरती देख सकती है। वहीं मासूम अंशिका के परिजन आईपीएस अधिकारी की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं उनका कहना है कि अधिकारी साहब की बदौलत उनकी आंख के कैंसर पीड़ित बच्ची को नई जिंदगी मिल गई। ।आपको बता दें कि मध्यप्रदेश कैडर के आईपीएस और वर्तमान मे ग्वालियर जोन मे तैनात आईजी राजाबाबू सिंह बाँदा जिले के पचनेही गाँव के निवासी है और क्षेत्र मे शैक्षिक और स्वास्थ्य विकास के लिये काफी समय से अभियान चला रहे है।

कोई भी कभी भी किसी परेशानी में कर सकता है संपर्क-

वहीं आईजी राजाबाबू सिंह ने बताया कि चिकित्सकों ने साफ कह दिया था कि ऑपरेशन के दौरान बच्ची की जान जा सकती है और आंख बचने का तो सवाल ही नहीं है। लेकिन सभी की दुआ और ईश्वर की कृपा से ऑपरेशन सफल हुआ और बच्ची की जान भी बच गई और आंख भी सुरक्षित है। आईजी राजाबाबू ने बुँदेलखण्ड के बाशिंदों से अपील भी की है कि ऐसी किसी भी परेशानी मे उनसे सम्पर्क करें और वह हर परेशान बुन्देलखंड के लोगों की पूरी मदद करेंगे।

Aditya Mishra

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