पूरी तरह बदलनी होगी शिक्षा व्यवस्था

कोरोना काल में सभी शिक्षण संस्थाएं बंद हैं। आगे पढ़ाई कैसे होगी ये बहुत बड़ा सवाल है। सरकार ने ई शिक्षा यानी ऑनलाइन पठन पाठन पर काफी ज़ोर दिया है और इसके लिए व्यापक इंजामों की घोषणा की है। अपना भारत ने शिक्षा के क्षेत्र में संभावित बदलावों पर कई प्रमुख नागरिकों से बात की।

Published by suman Published: May 29, 2020 | 10:45 pm

संदीप पाल

लखनऊ:  कोरोना काल में सभी शिक्षण संस्थाएं बंद हैं। आगे पढ़ाई कैसे होगी ये बहुत बड़ा सवाल है। सरकार ने ई शिक्षा यानी ऑनलाइन पठन पाठन पर काफी ज़ोर दिया है और इसके लिए व्यापक इंजामों की घोषणा की है। अपना भारत ने शिक्षा के क्षेत्र में संभावित बदलावों पर कई प्रमुख नागरिकों से बात की।

डिजिटल तकनीक का लेना होगा सहारा

कोरोना त्रासदी से हुई अप्रत्याशित तबाही के परिणामस्वरूप हमें सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए शैक्षिक संस्थानों की कार्यविधियों में आमूलचूल परिवर्तन करना पड़ेगा। उनमें डिजिटल तकनीक से ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली को व्यवहार में लाना पड़ेगा। अभी भारत की ग्रामीण व्यवस्था में ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली को लागू करने के लिए अपेक्षित ढांचा विकसित नहीं है। जब सिर पर आ ही पड़ी है तो कहीं न कहीं से इसकी शुरूआत तो करनी पड़ेगी। लोगों की मनःस्थिति में बदलाव लाना होगा। परीक्षा पैटर्न में बहुत बड़े बदलाव करने होंगे एवं डिजिटल विशेषज्ञों, शिक्षाविदों व मनोवैज्ञानिकों की मदद से पाठ्यक्रम निर्धारित करने पड़ेंगे। शैक्षणिक स्टाफ को डिजिटल तकनीक की बारीकियों का प्रशिक्षण देना पड़ेगा। अब भारत को नए सिरे से शैक्षिक अवदान प्रदान करने के लिए बहुप्रतीक्षित किंतु अब तक टलती आ रही डिजिटल लर्निंग को प्राथमिकता से लागू करना पड़ेगा।

–    डॉ. अमर सिंह (प्राध्यापक, स्नातकोत्तर महाविद्यालय छिंदवाड़ा)

 

 

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शिक्षक बनेंगे योद्धा

शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों में शिक्षकों को परिवर्तित व्यवस्था में योद्धा की तरह काम करना पड़ेगा। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में ऑनलाइन शिक्षा देने के लिए मूलभूत सुविधाओं में जमीन आसमान का अंतर है। सरकार को इसके लिए ढांचा तैयार करने के लिए आर्थिक मदद देनी होगी। अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर है उसपर ये नई आफत सिर मुड़ाते ही ओले पड़ने जैसी सिद्ध होगी। परम्परागत शिक्षण पद्धति से एकदम अलग हटकर डिजिटल तकनीक की स्वीकार्यता को भी वक़्त लगेगा। शिक्षा विभाग में आने वाली समस्याओं का सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ मिल बैठकर मजबूत कार्ययोजना तैयार करके समयगत सुधार करते जाने पड़ेंगे। हर त्रासदी अपने साथ बहुत से सुअवसर लेके भी आती है, उनको अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करना पड़ेगा। ऑनलाइन शिक्षा की नींव तो डालनी ही होगी।

–    पुष्पा सिंह (गृहणी छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश)

 

 

समय का सदुपयोग करें छात्र

महामारी के चलते शिक्षा प्रदान करने की समस्या का समाधान सभी को संयुक्त प्रयास से करना पड़ेगा। शासन प्रशासन को नई कार्य योजना बनानी होगी। अभी ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली का हमारे पास अनुभव नहीं है अतः सभी प्रदेशों के अनुभवों से भी सीखना पड़ेगा। छात्रों को शारीरिक दूरियां बनाने के साथ सामाजिक दूरियां न बनें, इस मनोविज्ञान पर भी काम करना पड़ेगा। शिक्षा प्राप्ति के साथ संक्रमण से दूर कैसे रहें, इस बात पर भी ध्यान देना पड़ेगा। फिलहाल जिंदगी की रफ्तार धीमी जरूर हुई है किंतु थमी नहीं है। हर काली रात के बाद चमकीला सवेरा होता है। छात्रों को अपने भविष्य की चिंता न कर वर्तमान समय पर फोकस करना चाहिए। हम इस संकट से अवश्य उबरेंगे किंतु बीता समय वापस नहीं आएगा। बुद्धिमानी इसी में है कि छात्र त्रासदी के खाली समय का सदुपयोग स्वाध्याय के लिए करें।

–    ज्योति सिंह  (छात्रा, भोपाल विश्वविद्यालय)

 

 

घर को ही विद्यालय मानना पड़ेगा

कोरोना संक्रमण के स्थाई होने की दशा में शिक्षण और प्रशिक्षण विधियों में परिवर्तन करना पड़ेगा। शिक्षण को जीवंत बनाने की जरूरत पड़ेगी। मनोरंजन की सुविधाएं बढ़ानी पड़ेगी। संचार प्रौदयोगिकी का भरपूर इस्तेमाल करना पड़ेगा। छात्रों को घर पर रहकर रचनात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित करना पड़ेगा। छात्रों को अपना ध्यान परेशानियों से हटाकर मेक इन इंडिया के लक्ष्य पर फोकस करने के लिए जोर देना पड़ेगा। जब सभी सेक्टर्स के लोगों के जीवन में बदलाव आएगा तो हम भी तो अछूते नहीं रह सकते हैं। छात्र, शिक्षक व प्रशासन को एकसाथ मिलकर अनुशासन से  काम करना पड़ेगा। अभाव, ट्रैजेडी व दिक्कतें भी जीवन के जीवंत सबक सिखाने का काम करती हैं। खुले मन से विचार विमर्श भविष्य की रणनीति बनाकर संगठित होकर काम करना पड़ेगा। तभी जाकर कार्य कुशलता आएगी। घर को ही विद्यालय मानना पड़ेगा।

–    सपना सिंह (छात्रा, हैदराबाद)

 

ऑनलाइन शिक्षा का ही सहारा

शिक्षा व्यवस्था पर हमारे देश का भविष्य निर्भर है उसे कोविड-19 के प्रकोप के बीच सुदृढ़ बनाये रखने के लिये हमें ऑनलाइन शिक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है और उन्हें बीमार होने के लिये भी नहीं छोड़ा जा सकता है। इसलिए जबतक कि स्थिति सामान्य नहीं हो जाती है तब तक हमें शिक्षा के सभी आधुनिक तरीकों को अपनाना होगा। कोरोना का कहर कम होने पर पुनः शिक्षा व्यवस्था अपने पुराने स्वरूप में आ जायेगी। इस दौरान बच्चे शिक्षा के नये स्वरूप भली-भांति समझ चुके होंगे और उन्हें भविष्य में इसे अपनाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। वैसे भी देश में 20 से 25 प्रतिशत छात्र-छात्राओं को हमारे शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसे अब और आगे बढ़ाया जाएगा।

–    नरोत्तम मिश्रा (गृह एवं कानून मंत्री, मध्यप्रदेश सरकार)

 

गरीब परिवारों की पहुँच से दूर

कोरोना वायरस की महामारी से सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद हैं। छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है। ऐसे में सरकार ने शैक्षिक संस्थाओं को निर्देश दिये हैं कि आनलाइन कक्षायें शुरू की जायें जिससे बच्चों की पढ़ाई में कोई समस्या न आये। उत्तर प्रदेश में भी प्राइवेट समेत सभी सरकारी स्कूलों में आनलाइन कक्षायें शुरू की गयी हैं। मगर असल सवाल यह है कि जिन घरों में लॉकडाउन के चलते दो वक्त की रोटी का जुगाड़ भी मुश्किल हो गया है क्या उनके बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं में हिस्सा ले पायेंगे। क्या उन घरों में एंड्रायड फोन हैं, और हैं भी तो पहले से ही मुश्किलों में जी रहे ये घर क्या इंटरनेट चलाने की हालत में हैं। लेकिन ऑनलाइन शिक्षा पद्धति का ज्ञान में इस आधुनिक युग में जरूरी है। सरकार को कोई उपाय निकालना होगा।

–    पी एस पाल (प्रधानाचार्य, जीआईसी, इटावा)

शिक्षकों ने स्वीकारी चुनौती

मूल्यपरक शिक्षा के लिए हमारे देश में अनेक शैक्षिक अभियान चलाए गए और चलाए जा रहे हैं। हमारी शिक्षा नीति अनेकानेक शैक्षिक प्रयोगों से निरंतर गुजर रही है लेकिन कोविड 19 ने हमारी शिक्षा नीति और अवधारणा को ही पूरी तरह बदल दी है। यह हमारे लिए गहन, चिंतन, मनन और चुनौतीपूर्ण कार्य है। अब केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा ऑनलाइन शिक्षा के विकल्प तलाशे गए हैं। यह देश व प्रदेश दोनों के लिये एक चुनौती है कि बच्चों की शिक्षा निरन्तर चालू रहे और उनका किसी प्रकार से कोई नुकसान न होने पाये। कोरोना योद्धाओं की तरह हमारे शिक्षकों ने भी इस चुनौती को स्वीकार किया है। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिये शिक्षकगण ने अपने को भी ऑनलाइन शिक्षा के लिये तैयार किया है। सभी अपने कार्य में जुट गये है, अब सफलता निश्चित है।

–    डॉ. डी एम त्रिपाठी (प्रोफेसर, केकेसी डिग्री कॉलेज)

 

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बाजार आधारित न हो व्यवस्था

शायद सरकार का असली मकसद अनुदान से मुक्ति पाना और उच्च शिक्षा को कार्पोरेट घरानों को सौंपना है जिससे उच्च शिक्षा भी मुनाफा बनाने वाली इंडस्ट्री बन सके। हमारे सँविधान में शिक्षा पर विशेष बल देने पर जोर दिया गया और माना गया कि जब तक शिक्षा देश के जन जन तक नहीं पहुँचेगी तब तक देश के सर्वांगीण विकास की परिकल्पना असम्भव है। इसके लिये शिक्षा सँस्थानों की स्वायत्तता और शिक्षा में सरकारी निवेश पर विशेष जोर देने की बात कही गयी। लेकिन दुर्भाग्य से शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी निवेश में लगातार कमी आयी है। खासतौर पर खुली अर्थव्यवस्था और भूमण्डलीकरण के दौर के आने के बाद। अचानक विश्व बैंक का दखल विभिन्न देशों की नीतियों को प्रभावित करने लगा। निजीकरण की बाढ़ सी आने लगी। मुनाफा आधारित अर्थव्यवस्था को सरकार से तरजीह मिलने लगी है।

– डॉ. रमेश बंसल (प्रिन्सिपल डीएवी अम्बाला कैण्ट)

 

नुकसानदेह है ऑनलाइन शिक्षा
ऑनलाइन एजुकेशन शार्टटर्म के लिये बहुत अच्छी है। लेकिन यह लांगटर्म के लिये बच्चों को बिल्कुल भी सूट नहीं करेगी।  ऑनलाइन एजुकेशन के दौरान बच्चों वैसा अटेंशन नहीं मिल सकता है जैसा कि क्लासरूम में मिलता है। ऑनलाइन एजुकेशन के चलते बच्चों के साथ परिवार के लोगों को भी उनके साथ लगना पड़ता है। जबकि स्कूल में बच्चों के साथ टीचर होते हैं। ऑनलाइन एजुकेशन के चलते बच्चों के सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उनकी आंख कमजोर हो सकती हैं। लगातार चेयर पैर बैठने से उनकी सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। भारत में ज्यादातर बच्चे जिस दशा में सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं वह किसी से छिपा नहीं है। कम्प्यूटर, स्मार्टफोन जैसी सेवायें ठीक प्रकार से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में इनका भविष्य क्या होगा। आप समझ सकते हैं।

–    विकास कोहली (प्रबन्धक, डीएवी अम्बाला)

 

सभी के लिए फायदेमंद तरीका

ऑनलाइन अध्ययन करने के फायदे और नुकसान हैं। यह सस्ता है और आप इसे कहीं से भी कर सकते इसके लिए अधिक आत्म-अनुशासन की आवश्यकता होती। यह प्रशिक्षण प्राप्त करने का एक नया तरीका है, आरामदायक है। बस एक लैपटॉप और इंटरनेट कनेक्शन होने पर हम किसी भी विषय या कोर्स की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर सकते हैं। यह छात्रों और प्रशिक्षण संगठनों दोनों के लिए फायदेमंद है। चूँकि हमें किसी केंद्र में जाने या किसी भी कार्यक्रम का पालन करने की आवश्यकता नहीं हैए इसलिए सीखने वाले व्यक्ति के लिए यह बहुत  आसान हो जाता है।

–    नीलम (टीचर, न्यू वे कॉलेज, लखनऊ)