अपराजिता सिंह: एक एवरेज स्टूडेंट से ऐसे बनीं IAS ऑफिसर, जानें सफलता की कहानी

उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (PGIMS) से मेडिकल की पढ़ायी पूरी की।इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी का मन बनाया

कहते हैं कि अगर इंसान कोशिश करे तो हर चीज पा सकता है।अपनी मुश्किलों को आसान कर सकता है।हार को जीत में बदल सकता है।’ कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ‘ आज तक इसे बस सुना ही था लेकिन आज देख भी लिया। ऐसी ही एक कहानी है अपराजिता की जिसने इस कथन को सच कर दिखाया।अपराजिता का नाम उनके नाना-नानी ने रखा था।कहते है इंसान का नाम ही इंसान की किस्मत तय करता है।ऐसा ही कुछ इनके साथ भी हुआ।

दरअसल बचपन में अपराजिता शारीरिक रूप से काफी कमजोर थीं, जिससे उन्हें सामान्य काम करने में भी समस्या होती थी। लेकिन फिर भी वे हिम्मत नहीं हारती थीं और जब तक कार्य पूरा न हो जाये लगी रहती थीं। इसी वजह से उनके नाना ने उनका नाम अपराजिता रखा यानी कभी पराजित न होने वाली।अपराजिता ने जीवनभर अपने नाम को चरितार्थ किया और समस्या कैसी भी हो कभी घुटने नहीं टेके।आज जानते हैं अपराजिता के अपराजित होने की कहानी।

ये हैं नए लक्षण: ऐसे दिन-प्रति-दिन बदल रहा कोरोना, अब हुआ और घातक

मां-बाप के बिना बीता बचपन

अपराजिता के माता-पिता ने बहुत छोटी उम्र में ही उन्हें नाना-नानी के पास छोड़ दिया था। अपराजिता का पूरा बचपन यहीं बीता।यहां तक कि आगे की पढ़ायी भी उन्होंने नाना-नानी के घर पर ही पूरी की। उनको प्यार दुलार के साथ ही कठिन परिस्थितियों में हिम्म्त न हारने का संबल भी इन्हीं से मिला। चूंकि अपराजिता डॉक्टर्स की फैमिली को बिलांग करती हैं तो बचपन से आईएएस बनने का सपना देखने के बावजूद उन्होंने पहले मेडिकल का क्षेत्र चुना।

उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (PGIMS) से मेडिकल की पढ़ायी पूरी की।इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी का मन बनाया।कुछ समय तैयारी करने के बाद उन्होंने साल 2017 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी जिसमें उनका चयन नहीं हुआ। पर अपराजिता ने हिम्मत नहीं हारी और दोबारा कोशिश की।

जिला प्रशासन ने दिया ऐसा आदेश, कर्जदार बनने को मजबूर प्रवासी मजदूर

बचपन से देखा आईएएस बनने का सपना

एक बार अपराजिता अपने नाना के साथ कहीं जा रही थीं, जब उन्होंने पास से एक आईएएस ऑफिसर की गाड़ी को गुजरते देखा और अपने नाना से पूछा कि यह गाड़ी किसकी है।उनके नाना ने उन्हें बताया कि ये आईएएस ऑफिसर की गाड़ी है और ये लोग कैसे दूसरों की मदद कर सकते हैं। बस तभी से अपराजिता ने सोच लिया था कि वे भी एक दिन आईएएस ऑफिसर ही बनेंगी।हायर स्टडीज में पहुंचने के बाद जीवन में कुछ ऐसे घटनाक्रम हुये कि उन्हें पहले एमबीबीएस करना पड़ा पर सब कुछ सेटेल होते ही उन्होंने अपने सपने को पाने की ओर कदम बढ़ा दिया।हालांकि यह राह भी आसान नहीं थी उनके घरवालों ने कहा था कि वे चाहती हैं तो एक बार ट्राय कर सकती हैं क्योंकि परिवार में सबका झुकाव मेडिकल की तरफ ही था।

अपराजिता की कहानी हमे सिखाती है कि नामुमकिन कुछ भी नहीं।अगर दिल में ठान लो तो कुछ भी पाया जा सकता है।संघर्ष सबके जीवन में होता है बस प्रकार अलग होता है। तो ईश्वर ने आपके लिये जो संघर्ष चुना है उससे डरने के बजाय उसे अपना लीजिये, जीत आपकी होगी।

मौका मिलेगा तो भूमि-पूजन में जरूर जाऊंगी: उमा भारती

देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।

न्यूजट्रैक के नए ऐप से खुद को रक्खें लेटेस्ट खबरों से अपडेटेड । हमारा ऐप एंड्राइड प्लेस्टोर से डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें - Newstrack App