जानिए मानद उपाधि के बारे में हर वो बात जो नहीं जानते होंगे आप

ऑनरेरी डिग्री देने का उद्देश्य यह है कि हम किसी ऐसे शख्स को सम्मानित करें, जिसने समाज में शानदार योगदान दिया हो। किसी विश्वविद्यालय द्वारा उस व्यक्ति को सम्मान देने से उस विश्वविद्यालय का ही सम्मान बढ़ता है।

नयी दिल्ली: उच्च शिक्षा संस्थानों के नियमन, निगरानी और मूल्यांकन की जिम्मेदारी संभालने वाले लोगों को विश्वविद्यालय एक नहीं कई-कई बार डाक्टरेट की मानद उपाधियों से नवाजते हैं जिनमें राजनेता, नौकरशाह और अन्य प्रभावशाली व्यक्ति शामिल हैं।

किसी शख्स को उसके उत्कृष्ट काम या समाज में बेहतरीन योगदान देने के लिए ऑनरेरी डिग्री (मानद उपाधि) दी जाती है। यह एक तरह से अकादमिक सम्मान है। मानद उपाधि देने की शुरुआत पंद्रहवीं शताब्दी में ऑक्सफोर्ड यूनवर्सिटी से हुई।

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हाल में प्रकाशित पुस्तक ‘ आरटीआई से पत्रकारिता, खबर पड़ताल असर’ में इस बात का खुलासा किया गया है कि किस तरह मानव संसाधन विकास मंत्रियों , विश्वविद्यालयों में शिक्षण, परीक्षा और शोध के मानकों की निगरानी करने वाले विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथा उच्च शिक्षा संस्थानों को रैंकिंग प्रदान करने वाली संस्था के अधिकारियों को डाक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की जाती रही है।

इन लोगों को मिलती है मानद उपाधि

बता दें कि दो तरह की मानद डिग्री होती है। एक वह, जो उन लोगों को दी जाती है, जिनके पास पहले से डिग्री या कोई बड़ा सम्मान मौजूद हो। मसलन, कोई नोबेल विजेता है, अगर उसे कोई विश्वविद्यालय मानद डिग्री देता है, तो यह उस विश्वविद्यालय के लिए अपने सम्मान की बात है।

ऑनरेरी डिग्री पानेवाले लोग अपने नॉम के आगे ‘डॉक्टर’ नहीं लगा सकते। या अगर लगाते हैं, तो उसके आगे ‘ऑनरेरी’ जरूर लिखते हैं। दूसरी तरह की मानद डिग्री उन लोगों के लिए होती है, जिन्होंने समाज के लिए बहुत बड़े काम किये हों और क्वाॅलिफिकेशन के तौर पर वे डॉक्टरेट न हों।

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इस तरह की उपाधि से किसी तरह का आर्थिक लाभ नहीं मिलता लेकिन यह उपाधि पाने वाले लोग अपने नाम के साथ डॉ लगा सकते हैं।

नेताओं को मिलती रही हैं मानद उपाधियां

विश्वविद्यालयों की गतिविधियों की निगरानी करने वाले प्रभारियों को मानद उपाधियों से नवाजा जाता रहा है। वर्ष 2010 से 2016 तक कृषि मंत्रालय में सचिव रहे एस. अयप्पन को पांच मानद उपाधियां प्रदान की गयी। उनके पूर्ववर्ती मंगला राय को दो मानद उपाधियां मिली। वर्ष 2005 से 2009 तक राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के अध्यक्ष रहे सैम पित्रोदा को पांच मानद उपाधियां प्रदान की गयीं। दस वर्ष तक योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे मोंटेक सिंह अहलूवालिया को उनके कार्यकाल के दौरान नौ मानद उपाधियां प्रदान की गयीं।

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मुरली मनाेहर जोशी तथा अर्जुन सिंह को दो दो बार मिली मानद उपाधि 

मानव संसाधन विकास मंत्रियों के रूप में कार्य करते हुये मुरली मनाेहर जोशी तथा अर्जुन सिंह को दो दो बार मानद उपाधि मिली। संप्रग सरकार में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रही डी. पुरंदेश्वरी को भी दाे मानद उपाधि प्रदान की गयी। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को उनके कार्यकाल के दौरान चार बार मानद उपाधि मिली। उनके बाद राज्य के मुख्यमंत्री बने मनोहर लाल खट्टर को दो बार मानद उपाधि मिल चुकी है।

ऑनरेरी डिग्री देने का उद्देश्य यह है कि हम किसी ऐसे शख्स को सम्मानित करें, जिसने समाज में शानदार योगदान दिया हो। किसी विश्वविद्यालय द्वारा उस व्यक्ति को सम्मान देने से उस विश्वविद्यालय का ही सम्मान बढ़ता है।