इस डायरेक्टर ने जीते थे 1 दर्जन नेशनल अवार्ड, लेकिन ऐसी फिल्में बनाने पर मचा हंगामा

बॉलीवुड के बेहतरीन डायरेक्टर रितुपर्णो घोष  ने कई अच्छी फिल्में बनाई हैं। और नेशनल अवॉर्ड भी जीते हैं। उनका नाम देश के सबसे सफल फिल्म निर्देशकों में है। रितुपर्णो घोष अपनी फिल्मों के जरिए बेबाकी से समलैंगिक इशूज को रखने के लिए जाने जाते थे।

Published by suman Published: May 30, 2020 | 11:51 am

मुंबई: बॉलीवुड के बेहतरीन डायरेक्टर रितुपर्णो घोष  ने कई अच्छी फिल्में बनाई हैं। और नेशनल अवॉर्ड भी जीते हैं। बॉलीवुड के दिग्गज फिल्ममेकर रितुपर्णो घोष जो के एक इंडियन  फिल्म निर्देशक के साथ साथ, एक्टर, राइटर और गीतकार भी थे। आज ही के दिन बॉलीवुड के इस दिग्गज फिल्ममेकर रितुपर्णो घोष ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। बता दें कि  फ़िल्मकार रितुपर्णो घोष जिनका जन्म 31 अगस्त 1963, को कोलकाता में हुआ था। फिल्ममेकर रितुपर्णो घोष जो के बॉलीवुड के साथ ही साथ बंगाली फ़िल्मों के भी प्रसिद्ध निर्देशक, लेखक और अभिनेता थे। ‘चोखेर बाली’, ‘रेनकोट’ और ‘अबोहोमन’ जैसी फ़िल्मों के लिए ‘राष्ट्रीय पुरस्कार’ विजेता रितुपर्णो घोष की ख्याति राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जगत में थी। उन्होंने और उनकी फ़िल्मों ने रिकॉर्ड बारह ‘राष्ट्रीय पुरस्कार’ जीते थे।

LGBTQ कॉम्युनिटी का लीडिंग चेहरा

उनका नाम देश के सबसे सफल फिल्म निर्देशकों में है। रितुपर्णो घोष अपनी फिल्मों के जरिए बेबाकी से समलैंगिक इशूज को रखने के लिए जाने जाते थे। रितुपर्णो घोष अपनी पहचान को लेकर हमेशा से कन्फ्यूज रहे। उनकी जिंदगी किसी पहली से कम नहीं थी। वे इंडस्ट्री में( LGBTQ) कॉम्युनिटी का लीडिंग चेहरा थे और उनसे जुड़े विषयों पर फिल्में बनाने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने खुद भी एक्टिंग की और (LGBTQ) कैरेक्टर्स प्ले किए।

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गे फिल्ममेकर का रोल प्ले किया

उनकी आर्कती (Arekti Premer Golpo) नाम की बंगाली फिल्म साल 2010 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में रितुपर्णो ने एक गे फिल्ममेकर का रोल प्ले किया था फिल्म का निर्देशन कौशिक गांगुली ने किया था। फिल्म को नेशनल अवार्ड भी मिला था। इसके अलावा उन्होंने चित्रांगदा नाम की फिल्म बनाई थी, जिसका लेखन और निर्देशन दोनों ही रितुपर्णो ने किया था। इसके अलावा वे फिल्म में एक्टिंग करते भी नजर आए थे।  फिल्म में वे एक ऐसे कोरियोग्राफर के रोल में नजर आए थे जो अपनी आइडेंटिटी को लेकर कन्फ्यूज रहता है। बहुत लोगों का मानना था कि ये फिल्म उन्होंने खुद अपनी रियल लाइफ से प्रेरित होकर बनाई थी।

 

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नेशनल अवॉर्ड जीतें

वे अपने जीवन के अंतिम समय में वे काफी अकेले पड़ गए थे। सिनेमा की चकाचौंध के बावजूद, निजी जीवन में लोग भी काफी हैरान रहते थे कि पुरुषों जैसे दिखने वाले पैंट शर्ट पहनने वाले रितुपर्णो लड़कियों की सी वेशभूषा में नजर आने लग गए थे। वे सलवार कमीज पहनते और दुपट्टा भी लगाए रहते। उन्होंने अपने करीबियों से बातचीत करनी बंद कर दी थी। रितुपर्णो घोष को बारह बार नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड्स से नवाजा गया जो अपने आपमें एक इतिहास बना। जैसे अपना एक अलग इतिहास बना गए हैं दादा ऋतुपर्णो घोषर 30 मई 2013, को कोलकाता की अल-सुबह कोई साढ़े तीन बजे रितुपर्णो घोष ने आख़िरी सांस ली। दिल की गहराइयों से सेल्यूलाइड पर ज़िंदगी उतारने वाला ये दिग्गज फ़िल्मकार दिल के हाथों ही मात खा गया। दिल का दौरा पड़ा और 49 साल के रितुपर्णो घोष दिल में नए सिनेमा के न जाने कितने ख़्वाब दबाये हमसे दूर चले गए। एक अर्से से वे पैंक्रियाटाइटिस से पीड़ित थे।उन्हें डायबेटीज टाइप 2 थी और वे इनसॉमनिया का भी इलाज करा रहे थे।

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