आइए जानें कोलन कैंसर को कैसे चकमा देते हैं साउथ इंडियंस?

सांभर में डाली जाने वाली काली हल्दी और मेथी को कोलन कैंसर के खतरे को कम करने वाला माना जाता है। यह सूजन को कम कर कॉलोनिक टिश्युे पर नेगेटिव स्ट्रेस को रोकता है।”

Published by Aditya Mishra Published: August 25, 2019 | 11:12 pm
Modified: August 26, 2019 | 10:20 am

लखनऊ: अगर आप कोलोन कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) से बचना चाहते है आप तो अपनी डाइट में सांभर को शामिल करें। ऐसा हम नहीं बल्कि हेल्थ एक्सपर्ट ये बात कह रहे है।इसके पीछे कारण और तर्क दोनों ही बताया गया है। तो आइए आज हम आपको इस विषय पर विस्तार से बताने जा रहे है।

उत्तर भारत में पाए गये 70 फीसदी मामले

दरअसल एक जानकारी के मुताबिक़ कोलन कैंसर के 70 फीसदी मामले सिर्फ उत्तर भारत में पाए गए हैं ।

ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उत्तर भारतीय गेहूं की रोटी खाते हैं जोकि कब्ज का कारण बनता है।

हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि सांभर सिर्फ मसाला नहीं है बल्कि कार्सिनोजन के विकास को रोकता है।

ऐसे में अगर आप कोलन कैंसर से बचना चाहते हैं तो अपनी डाइट में सांभर को जरुर शामिल करे।

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स्त्रियों में पाया जाने वाला दूसरा आम कैंसर

कोलन कैंसर के संभावित कारणों में आनुवांशिक कारण भी शामिल है।

कोलन कैंसर को जिसे हम बड़ी आंत के कैंसर के नाम से भी जानते है। यह कैंसर स्त्रियों में पाया जाने वाला दूसरा आम कैंसर है।

मल में ब्लड आना, एनीमिया, पेट में दर्द, भूख न लगना, पेट फूलना और वजन कम होना भी इसके लक्षण है।

इसके अलावा स्मोहकिंग, रेड मीट और जंक फूड्स इस कैंसर के खतरे को बढ़ाते है।

लक्षण दिखने पर फौरन डाक्टर को दिखाए

लगातार लंबे वक्त तक कब्ज का बने रहना भी कोलोन का कारण बन सकता है।

आजकल के खानपान के चलते पेट में गड़बड़ी होना बहुत आम हो गया है।

लेकिन अगर इस तरह के लक्षण आपको लंबे समय तक दिखाई दें तो तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाएं।

कैंसर से बचना है तो डाइट में सांभर को करे शामिल : रिसर्च

ले‍किन क्या आप जानती हैं कि अपनी डाइट में सांभर को शामिल कर आप इस कैंसर से बच सकती हैं।

शायद आपको विश्वास नहीं हो होगा लेकिन यह सच है कि अगर आप अपनी डाइट में सांभर को शामिल करते है तो आप कैंसर से बच सकती हैं।

मणिपाल यूनिवर्सिटी द्वारा किया गये एक शोध में ये बात निकलकर सामने आई है।

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि सांभर पाउडर में मौजूद मसालों का मिश्रण इसकी प्रभावशीलता में योगदान देता है।

गरमा-गरम सांभर को अक्सर परिवार के बुजुर्गों द्वारा विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए एक घरेलू उपाय की तरह लेने की सलाह दी जाती है।

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कोलन कैंसर से बचने के लिए सांभर ही क्यों?

सांभर एक मसालेदार डिश नहीं है, इसलिए यह आंत के अस्तर को प्रभावित नहीं करता है।

वास्तव में डाइमिथाइल हाइड्राजाइन के विकास को रोकता है, जो पेट के कैंसर का एक कारक है।

सांभर पाउडर में एंटी-ट्यूमरजेनिक गुण होते हैं, जो कि ट्यूमर को बनने से रोकता है।

सांभर पाउडर में धनिया के बीज, मेथी के बीज, हल्दी, काली मिर्च, करी पत्ते, जीरा और हींग शामिल होते हैं।

अगर ठीक से बनाया जाए तो सांबर एक बहुत ही पौष्टिक डिश है।

‘मसाले के गुणों का उपयोग मल त्याग में हेल्प करता है, जिससे पेट के कैंसर का खतरा कम होता है।

टाटा मेमोरियल इंस्टीट्यूट, मुंबई के कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआआई) ने भारतीय फूड्स में हल्दीं की मौजूदगी का कीमो-निवारक में इस्तेमाल में अध्ययन किया।

“सांभर को समग्र रूप से लेने के बजाय, अगर हम इसे घटकों में विभाजित करते हैं, तो हम इसमें इस्तेमाल की जाने वाली सभी सामग्रियों के कई लाभों को देखते हैं।

सभी घटक अच्छे पाचन की सुविधा प्रदान करते हैं जो पेट के कैंसर को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।”

क्या कहते है एक्सपर्ट

उत्तर भारत में पेट के कैंसर के केस ज्यादा देखने को मिलते हैं।

मेडिकल एक्सपर्ट का दावा है कि इसका कारण प्रचलित आहार है, जिसमें अधिक गेहूं शामिल होता है और जिसके कारण कब्ज होती है।

जबकि दक्षिण भारत में डाइट में चावल और करी शामिल होती है जो मल त्याग में मदद करते है।

ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉक्टरों का कहना हैं, ”कोलन कैंसर के सत्तर प्रतिशत मामले उत्तर भारत में हैं।

हल्दी, जो सांभर पाउडर में एक सक्रिय घटक है, इसमें कैंसर विरोधी गुण होते हैं।

यह फ्री-रेडिकल्स के निर्माण को रोकता है जो कैंसरकारी हो सकते हैं।

दक्षिण भारतीय करी और विशेष रूप से सांभर, मुख्य रूप से मसालों का उपयोग करके पकाया जाता है।

उत्तर भारत में, हम ग्रील्ड फूड्स को ज्यादा देखते हैं जिसकी तैयारी के तरीके के कारण टार और फ्री-रेडिकल्स हैं।”

सांभर में मौजूद हल्दी भी है गुणकारी

हल्दी कोलन कैंसर में कैसे हेल्प करती हैं इस बारे में हमने स्वामी परमानंद प्राकृतिक चिकित्सालय योग और अनुसन्धान केंद्र (एसपीपीसी) की आयुर्वेदिक डॉक्टर दिव्या शरद से बात की थी तब उन्होंंने हमें बताया ”हल्दी एक मसाला ही नहीं है बल्कि हर्ब भी है।

हल्दी के फायदेमंद गुणों के कारण सदियों से इसका इस्तेमाल हर्बल दवाओं में किया जा रहा है।

यूं तो हल्दी हर तरह के कैंसर से बचाने में हेल्प करती हैं।

लेकिन कोलन कैंसर से बचाव में हल्दी अधिक प्रभावी होती है।

हल्दी में मौजूद करकुमीन एक शक्तिशाली एंटी ऑक्सीडेंट है और यह कैंसर सेल्स को मारने में प्रभावी होता है।

साथ ही कोलन कैंसर होने से भी रोकता है। आप हल्दी को अपनी डाइट में शामिल कर सकती हैं।

गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट ने भी माना सेहत के लिए फायदेमंद

सांभर में विशेष रूप से, गाजर, करेला, भिंडी, ड्रम स्टिक, टमाटर और जैसी अन्यर कई सब्जियों का इस्तेमाल होता है, और इन सभी के अपने हेल्थम बेनिफिट्स होते हैं।

इसके अलावा इसमें प्रोटीन से भरपूर दालें भी होती हैं। मसालों और अन्य सामग्रियों के मिश्रण से फैट का अवशोषण

ज्यादा होता है जो गतिशीलता को बढ़ाता है और इस तरह से कोलन कैंसर को रोक सकता है।” जबकि फैट से भरपूर और कम फाइबर वाली डाइट अक्सर कोलन कैंसर के खतरे को बढ़ाती है।

सांभर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट द्वारा न केवल मसालों के लिए, बल्कि इसमें डाली जाने वाली सब्जियों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट कहते हैं, ”भारतीय भोजन हमेशा से ही फाइबर से भरपूर होता है।

सांभर के हेल्थ बेनिफिट्स को नहीं किया जा सकता नजरंदाज

सांभर में डाली जाने वाली काली हल्दी और मेथी को कोलन कैंसर के खतरे को कम करने वाला माना जाता है। यह सूजन को कम कर कॉलोनिक टिश्युे पर नेगेटिव स्ट्रेस को रोकता है।”

न्यूट्रीशनिस्ट का कहना हैं कि ”हालांकि यह स्टडी बहुत प्रारंभिक है, लेकिन सांभर के हेल्थ बेनिफिट्स को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। यही कारण है कि यह एक फेमस डिश है।

सहजन के फायदे जान रहे जायेंगे हैरान

कैलाश नैचुरोपैथी हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के चिकित्साण प्रभारी, डॉक्टर उमाशंकर शर्मा के मुताबिक़ ”सांभर में अगर आप सहजन की फली यानि ड्रम स्टिक डालकर खाते हैं तो यह कोलन कैंसर के खतरे को कम कर सकता है।

क्योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इसके अलावा सहजन में कई तरह के एंटी कैंसर कंपाउंड पाए जाते हैं जैसे कैमफेरोल, रैह्मनेटिन और आइसो क्वेरसेटिन आदि। जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते है।

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