आर्थिक मंदी का असर, इतने लाख लोगों को नहीं मिलेगा रोजगार, जानिए कैसे

वित्त वर्ष (2018-19) के मुकाबले इस साल (2019-20) रोजगार में लगभग 16 लाख अवसर घटने का अनुमान है। एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट ईकोरैप में यह आशंका जताई गई है। अर्थव्यवस्था में सुस्ती की वजह से रोजगार प्रभावित हो रहे हैं। असम, बिहार, राजस्थान, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में पैसे भेजने (रेमिटेंस) में कमी आने से पता चलता है

Published by suman Published: January 14, 2020 | 12:46 pm

मुंबई वित्त वर्ष (2018-19) के मुकाबले इस साल (2019-20) रोजगार में लगभग 16 लाख अवसर घटने का अनुमान है। एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट ईकोरैप में यह आशंका जताई गई है। अर्थव्यवस्था में सुस्ती की वजह से रोजगार प्रभावित हो रहे हैं। असम, बिहार, राजस्थान, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में पैसे भेजने (रेमिटेंस) में कमी आने से पता चलता है कि कॉन्ट्रैक्ट वाले काम घट रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 5 साल में उत्पादकता वृद्धि दर 9.4% से 9.9% के बीच रही। ऐसे में सालाना इंक्रीमेंट भी कम होने की आशंका है।

 

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प्रधानमंत्री मौनव्रत ना रखें

 

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि अगर इसी तरह बेरोजगारी बढ़ती रही और तनख्वाह कम होती रही, तो डर है कि युवाओं और छात्रों का गुस्सा भड़क उठेगा। देश पहले ही सीएए और एनपीआर के विरोध में है। महंगाई बढ़ना और अर्थव्यवस्था कमजोर होना देश के लिए और भी बड़ा खतरा है। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौनव्रत धारण कर जनता को भ्रम में नहीं डाल सकते। वे सामने आएं और महंगाई कम करने के लिए अगले 30 दिन का रोडमैप बताएं।

आंकड़ों के मुताबिक

ईपीएफओ के आंकड़ों के मुताबिक 2018-19 में देश में 89.7 लाख रोजगार बढ़े, लेकिन 2019-20 में इस आंकड़े में 15.8 लाख की कमी आ सकती है। ईपीएफओ के आंकड़ों में 15,000 रुपए तक वेतन वाले काम शामिल होते हैं। ईकोरैप रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से अक्टूबर 2019 तक 43.1 लाख नए कर्मचारी जुड़े। इस आधार पर वित्त वर्ष खत्म होने तक (मार्च तक) यह आंकड़ा 73.9 लाख रहने का अनुमान है।

 

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बेरोजगारी 45 साल में सबसे अधिक

इनमें सरकारी और प्राइवेट नौकरियां शामिल नहीं होतीं, क्योंकि इनकी गिनती नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) में होती है। लेकिन, मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए एनपीएस के तहत आने वाले रोजगारों में भी इस साल 39,000 मौके कम होने का अनुमान है।कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक बेरोजगारी पहले ही 45 साल में सबसे अधिक है। ऐसे में रोजगार घटने से सरकार की मुश्किलें और बढ़ेंगी। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक 2018 में आत्महत्या करने वालों में 12 हजार से ज्यादा लोग बेरोजगारी के परेशान थे।देश की जीडीपी ग्रोथ जुलाई-सितंबर तिमाही में घटकर सिर्फ 4.5% रह गई। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय का अनुमान है कि पूरे वित्त वर्ष (2019-20) में ग्रोथ सिर्फ 5% रहेगी। ऐसा हुआ तो यह 11 साल में सबसे कम होगी। इससे कम 3.1% ग्रोथ 2008-09 में दर्ज की गई थी, उस वक्त दुनियाभर में मंदी आई थी।

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