मशहूर शायर अजमल सुल्तानपुरी का निधन, ये कहकर ठुकरा दिया था पाक का प्रस्ताव

मशहूर शायर अजमल सुल्तानपुरी का बुधवार को देर रात निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे और काफी समय से बीमार थे। विश्व विख्यात शायर अजमल सुल्तानपुरी का निधन उनके निवास पर हुआ। अपनी खास नज्म कहां है वो मेरा हिंदुस्तान जिसे मैं ढूंढ रहा हूं।

लखनऊ: मशहूर शायर अजमल सुल्तानपुरी का बुधवार को देर रात निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे और काफी समय से बीमार थे। विश्व विख्यात शायर अजमल सुल्तानपुरी का निधन उनके निवास पर हुआ। अपनी खास नज्म कहां है वो मेरा हिंदुस्तान जिसे मैं ढूंढ रहा हूं से उन्होंने विदेशों तक पहचान बनाई थी।

मेरे बचपन का हिंदुस्तान, न बंग्लादेश न पाकिस्तान, मेरी आशा मेरा अरमान, वो पूरा-पूरा हिंदुस्तान, मैं उसको ढूंढ़ रहा हूं मैं उसको ढूंढ़ रहा हूं’ जैसी रचनाओं से साहित्य जगत में अक अलग छाप छोड़ी।

अजमल का जन्म 1926 में कुड़वार विकास खंड के हरखपुर गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। 1967 में वे शहर के खैराबाद मुहल्ले में आकर बस गए। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। 2016 में उन्हें उप्र उर्दू अकादमी की ओर से लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया था।

यह भी पढ़ें…मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने SC से कहा, नमाज पढ़ने मस्जिद में जा सकती हैं महिलाएं

अजमल सुलतानपुरी ने अपनी रचनाओं के दम पर देश-विदेश में बड़े-बड़े कवि सम्मेलनों में शामिल हुए। एक बार उन्हें पाकिस्तान में कवि सम्मेलन में भाग लेने का प्रस्ताव मिला तो उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि जब पाकिस्तान हमसे अलग हो गया है, तो मैं वहां कैसे जा सकता हूं। बॉलीवुड से आए प्रस्ताव को भी उन्होंने खारिज कर दिया था।

यह भी पढ़ें…शरजील इमाम 5 दिन की पुलिस कस्टडी में, वकीलों ने की ये मांग

उनका मानना था कि किसी भी आर्टिस्ट का सरकार से कोई भी उम्मीदें रखने का मतलब है कि वो कोई रचनाकार नहीं बल्कि बनिया है। कोई भी आर्टिस्ट अगर किसी लालच के चलते कुछ रचता है तो उसकी कला में वो मौलिकता नहीं रहती है और वे मानते थे कि इससे पढ़ने वालों को भी उसमें बनावटीपन दिखता है और उसमें वो रस भी नहीं होता, जो कविता या शायरी में होना चाहिए।

न्यूजट्रैक के नए ऐप से खुद को रक्खें लेटेस्ट खबरों से अपडेटेड । हमारा ऐप एंड्राइड प्लेस्टोर से डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें - Newstrack App