राम मंदिर विवाद: SC में दलीलों का आखिरी दिन, जानिए क्यों खफा हुए चीफ जस्टिस

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर विवाद पर आज यानी बुधवार को सुनवाई पूरी हो सकती है। देश की सर्वोच्च अदालत में हिंदू और मुस्लिम पक्ष अपनी-अपनी आखिरी दलील रखेंगे। अगर आज सुनवाई पूरी हो जाती है, तो यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई समयसीमा से एक दिन पहले पूरी होगी।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर विवाद पर आज यानी बुधवार को सुनवाई पूरी हो सकती है। देश की सर्वोच्च अदालत में हिंदू और मुस्लिम पक्ष अपनी-अपनी आखिरी दलील रखेंगे। अगर आज सुनवाई पूरी हो जाती है, तो यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई समयसीमा से एक दिन पहले पूरी होगी।

बता दें कि राम मंदिर विवाद पिछले करीब 70 साल से देश की अदालतों में चल रहा है। राम मंदिर विवाद की वजह से देश की राजनीति में कई उतार चढ़ाव देखने को मिले हैं। लेकिन अब लोगों को उम्मीद है कि सुनवाई पूरी होने के बाद अब राम मंदिर पर जल्द फैसला आएगा।

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सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को हिंदू पक्षकार अपनी आखिरी दलील रखेंगे, इसके बाद मुस्लिम पक्ष के वकील को जवाब देने के लिए एक घंटे का समय दिया जाएगा। हिंदू पक्ष के वकील सीएस. वैद्यनाथन को पक्ष रखने के लिए 45 मिनट मिलेंगे, इसके अलावा हिंदू पक्षकारों के अन्य वकीलों को भी इतना ही समय दिया जाएगा। इसके बाद मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को जवाब देने के लिए 1 घंटे का समय मिलेगा।

मंगलवार को रामलला विराजमान के वकील सी.एस. वैद्यनाथन ने कहा कि उन्हें दलील पूरी करने के लिए बुधवार को एक घंटे का और समय चाहिए। इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि बुधवार को 40वां दिन है और यह आप सभी की दलीलों का अंतिम दिन है। आपने लिखित दलीलें हमें दे रखी हैं।

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इसके बाद वैद्यनाथन ने कहा कि मामला गंभीर है और आपको सुनना चाहिए। इस पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताई और कहा कि इस तरह तो फिर दिवाली तक सुनवाई चलती रहेगी।

गौरतलब है कि राम मंदिर मामले पर 6 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई चल रही है। हिंदू और मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में लगातार अपनी-अपनी दलीलें रखीं।

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हिदू पक्ष के वकीलों ने कोर्ट में ASI की रिपोर्ट, पुराण, ग्रंथ, भावनाओं का हवाला दिया गया, तो वहीं मुस्लिम पक्ष ने ASI की रिपोर्ट, मौजूदा स्थिति और इस्लामिक इतिहास का हवाला देकर कोर्ट का रुख अपने पक्ष में करने की कोशिश की।

17 नवंबर को रिटायर होंगे चीफ जस्टिस

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होंगे। इसलिए उम्मीद है कि वह इससे पहले राम मंदिर मामले में फैसला सुना सकते हैं।