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कानून बनने के बाद भी इन राज्यों में नहीं लागू होगा CAA, जानें क्या है वजह...

केंद्र सरकार की पहल के बाद पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू हो गया है। हालाँकि देश के अलग अलग राज्यों व क्षेत्रों से इसका पुरजोर विरोध भी हो रहा है। केंद्र सरकार ने इसे लेकर शुक्रवार को नोटिफिकेशन जारी कर दिया। जारी अधिसूचना के मुताबिक़, 10 जनवरी 2020 से कानून लागू कर दिया गया। वैसे तो नागरिकता कानून पूरे देश में प्रभावित रहेगा, लेकिन कुछ राज्यों में इसे लागू नहीं किया गया है।

Shivani Awasthi

Shivani AwasthiBy Shivani Awasthi

Published on 11 Jan 2020 4:34 AM GMT

कानून बनने के बाद भी इन राज्यों में नहीं लागू होगा CAA, जानें क्या है वजह...
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दिल्ली: केंद्र सरकार की पहल के बाद पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू हो गया है। हालाँकि देश के अलग अलग राज्यों व क्षेत्रों से इसका पुरजोर विरोध भी हो रहा है। केंद्र सरकार ने इसे लेकर शुक्रवार को नोटिफिकेशन जारी कर दिया। जारी अधिसूचना के मुताबिक़, 10 जनवरी 2020 से कानून लागू कर दिया गया। वैसे तो नागरिकता कानून पूरे देश में प्रभावित रहेगा, लेकिन कुछ राज्यों में इसे लागू नहीं किया गया है।

क्या है CAA:

नागरिकता अधिनियम, 1955 में संसोधन के बाद सब इस कानून के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हुए हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दे दी जाएगी। कानून लागू होने से पहले इन्हें अवैध शरणार्थी माना जाता था।

CAA का इन राज्यों में नहीं रहेगा असर:

वैसे तो नागरिकता कानून को पूरे देश में लागू किया गया है लेकिन कुछ राज्यों में इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। इनमें असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर के कुछ इलाकें शामिल हैं।दरअसल, केंद्र सरकार ने इन जगहों पर 'इनर लाइन परमिट' जारी कर दिया है, इसके चलते यह कानून लागू नहीं होगा। बता दें पूर्वोत्तर के राज्यों खासकर कि असम, मणिपुर और मेघालय में इस कानून का जबरदस्त विरोध देखा गया।

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कई राज्यों में विरोध:

इसके अलावा सीएए का कई राज्यों में विरोध भी हो रहा है। बंगाल में इसका सबसे ज्यादा विरोध देखने को मिल रहा है। कुछ राज्यों में विरोध प्रदर्शनों में हिंसक घटनाएं भी सामने आई हैं। वहीं दिल्ली और मुंबई समेत कई राज्यों के शिक्षण संस्थानों के छात्र भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

क्यों हो रहा था विरोध:

सीएए का विरोध इसलिए हो रहा है, क्योंकि लोगों का मानना है कि यह कानून भारत के संविधान के खिलाफ है। इस कानून के दायरे में पड़ोसी देशों में पीड़ित मुसलमानों को भी शामिल करना चाहिए। उनका यह भी आरोप है कि जब देश में एनआरसी लागू होगा तो दस्तावेजों के अभाव में लाखों लोगों को नागरिकता साबित करने में मुश्किल आएगी या फिर डिटेंशन सेंटर में जाना पड़ेगा। चूंकि इस कानून में मुस्लिमों के अलावा छह धर्मों के लोगों को नागरिकता देने की बात की गई है ऐसे में बाकी को तो नागरिकता मिल जाएगी लेकिन सिर्फ मुसलमानों को इससे परेशानी होगी।

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मोदी सरकार लगाये कानून:

गौरतलब है कि नागरिकता अधिनियम, 1955 में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार संसद में संशोधन प्रस्ताव लेकर आई। दोनों सदनों में नागरिकता संशोधन बिल के बहुमत से पास होने के बाद 12 दिसंबर को राष्ट्रपति ने इस पर अपनी मुहर लगा दी। जिसके करीब एक महीने बाद सरकार ने अधिसूचना जारी कर इसे पूरे देश में लागू कर दिया है। सरकार द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद अब सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही इसे रद्द किया जा सकता है या फिर केंद्र सरकार ही इस कानून में कोई परिवर्तन कर सकती है।

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Shivani Awasthi

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