Amritsar News : सीएए पर भ्रम फैला रहे कई नेता

Published by seema Published: January 11, 2020 | 11:58 am
Modified: January 11, 2020 | 1:01 pm

दुर्गेश पार्थसारथी
अमृतसर। नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर देश में सियासी घमासान मचा हुआ है। जहां एक ओर कई दल इसका समर्थन कर रहे हैं वहीं कुछ दल इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन में लगे हुए हैं। इसके खिलाफ देश के कई हिस्सों में हिंसा की घटनाएं भी हुई हैं। देशभर में जारी धरना-प्रदर्शन और उपद्रव के बीच तमाम लोगों का मानना है कि इससे देश और देश में रह रहे मुसलमानों का कोई नुकसान नहीं है। आइए जानते हैं कि पाकिस्तान की सरहद से लगे पंजाब के सीमावर्ती जिले अमृतसर और पठानकोट के लोग सीएए को किस नजरिए से देखते हैं। लोगों का मानना है कि कई नेता सीएए पर भ्रम फैला रहे हैं।

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यह नागरिकता लेने वाला कानून नहीं: दर्शन कुमार
आरपीएफ से सेवानिवृत्त कमांडेंट दर्शन कुमार का मानना है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम से देश के किसी नागरिक को डरने की जरुरत नहीं है। खासकर किसी धर्म विशेष के लोगों को। यह कानून नागरिकता देने वाला है, लेने वाला नहीं। पता नहीं लोग कब समझेंगे। बिना सोचे समझे लोग नेताओं के बहकावे में आकर उनके पीछे चल पड़ते हैं। उनकी इस ना समझी का खामियाजा देश और खुद आंख बंद कर मौकापरस्त नेताओं के पीछे चलने वालों को उठाना पड़ता है।

कांग्रेस कर रही है दुष्प्रचार: साहिल शर्मा
युवा भाजपा सुजानपुर मंडल के उपाध्यक्ष साहिल शर्मा का कहना है कि विपक्ष खासकर कांग्रेस के लोग प्रोपगंडा फैला रहे हैं। इसमें पंजाब की कांग्रेस सरकार भी पीछे नहीं है। बेवजह मुसलमानों को गुमराह कर रही है। देश में सीएए लागू होने से भारत के मुसलमानों का कोई नुकसान नहीं होगा। यह बात मुसलमानों को समझना चाहिए। पंजाब और देश के तमाम लोगों को इस भेड़चाल का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। किसी भी चीज का विरोध करने से पहले उस विषय वस्तु को पहले जांच परख लेना चाहिए।

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नया कानून नहीं,सिर्फ संशोधन: जगमोहन सिंह
भाजपा मंडल अध्यक्ष जगमोहन सिंह का कहना है कि सीएए कोई नया कानून नहीं है। पुराने कानून में संशोधन भर किया गया है। पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए लोगों को 11 साल में नागरिकता मिल जाती थी मगर अब यह छह साल में मिलने लगेगी। बेवजह देशभर में बखेड़ा खड़ा किया जा रहा है। विपक्ष के नेता जनता को सही जानकारी देने की जगह गुमराह कर कानून के प्रति भड़काने का काम कर रहे हैं। जनता को भी बहकावे में आने की जगह सही बात को समझना चाहिए।

विरोध प्रदर्शन शर्मसार करने वाला: शमी ठाकुर
पठानकोट के रहने वाले छात्र शम्मी ठाकुर का कहना है कि पिछले दिनों देशभर में हुई घटनाएं देश को शर्मसार करने वाली हैं। पूरी दुनिया देख रही थी कि लोग बिना जाने समझे सड़कों पर उतरकर किस तरह उपद्रव कर रहे थे। इस तरह का विरोध किसी भी तरह से जायज नहीं है। प्रदर्शन करने का भी अपना तरीका होता है। देश की संपत्ति जलाकर प्रदर्शन करना किसी भी सूरत में सही नहीं है। देश को क्षति पहुंचाने वाले यह क्यों भूल जाते है कि इस संपत्ति का लाभ उन्हें भी मिलता है।

पंजाब में सीएए का विरोध समझ से परे: अमित
गोल्डन टेंपल अमृतसर के पास कारोबार करने वाले साहिल, अमित और करना का कहना है कि देश के अन्य राज्यों में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन तो समझ में आता है, लेकिन पंजाब में इसके खिलाफ प्रदर्शन समझ से परे है। पाकिस्तान में सबसे ज्यादा अविभाजित पंजाब के ही लोग प्रताडि़त हैं। अगर वहां हिंदू और सिखों के साथ कुछ होता है, यहां बैठे लोग झूठी हमदर्दी दिखाते हैं। यदि सच में उनके लिए कुछ हुआ है तो हाय तौबा मचाने की क्या जरुरत है।

नागरिकता कानून का विरोध सियासी नाटक: शोएब
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर निवासी हाफिज शोएब अंसारी का कहना है कि नागरिकता संशोधन कानून पूरी तरह से ठीक है और देश हित में है। इस कानून से किस मुसलमान का क्या अहित हो रहा है। सब सियासी नाटक है। सांसद ओवैसी देश का माहौल बिगाडऩा चाहता है। ऐसे मुसलमान पर लानत है।

विरोध की यह प्रवृत्ति गलत: प्रबोध चंद
पठानकोट जिले के गांव भरोली कला निवासी पूर्व सरपंच प्रबोध चंद कहते हैं कि देश में कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनकी आदत ही विरोध प्रदर्शन बन गई है। विरोध करने वलों को यही पता नहीं है कि वह किसी चीज का विरोध कर रहे हैं। कोई इसे एनआरसी बता रहा है तो कोई महंगाई बता कर विरोध करने चला आता है और हिंसक भीड़ का शिकार हो जाता है। विरोध की यह प्रवृत्ति गलत है। जो गलत चीजें हैं उनका विरोध होना चाहिए, लेकिन जो सही है उसका तो विरोध नहीं होना चाहिए।

भीड़ तंत्र का हिस्सा न बनें छात्र: निखिल
छात्र निखिल शर्मा का कहना है कि सीएए ही नहीं बल्कि किसी धरना प्रदर्शन में छात्रों को भीड़ तंत्र का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। छात्रों को पहले देश और अपना हित देखकर ही कोई कदम उठाना चाहिए। जेएनयू और एमयू के विद्यार्थियों का विरोध प्रदर्शन समझ से परे है। राजनेता अपना हित साधने के लिए हमेशा छात्रों का इस्तेमाल करते आए हैं। छात्रों को भी समझना होगा कि छात्र नाम आते ही उनको समाज का जागरुक इंसान समझ लिया जाता है, ऐसे में उनको अपनी समझदारी का परिचय देना चाहिए।

देश हित में है सीएए: सतीश कोछड़
अमृतसर के कारोबारी सतीश कोछड़ का कहना है कि सीएए देश हित में है। इससे भारत के नागरिकों के अधिकारों का हनन नहीं होता है। इससे किसी मुसलमान का अधिकार भी नहीं छीना जाता। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में रहने वाले हिंदू, सिख, जैन आदि बाहर से तो आए नहीं। वे पंजाब के ही रहने वाले हैं जो बंटवारे के समय पाकिस्तान और अफगानिस्तान में रह गए थे। अगर इनको भारत में नागरिकता मिलती है तो हर्ज क्या है। कांग्रेस का विरोध समझ में नहीं आता।

यह सब वोट बैंक की राजनीति: डॉ. तौहीद
गाजीपुर के ही बारचवर निवासी डॉ.तौहिद आलम कहते हैं कि लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। सीएए से मुसलमानों को डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि भारत सरकार ने जो कानून बनाया है, वो नागरिकता देने के लिए बनाया गया है। सरकार को चाहिए कि वो दंगा फैलाने वालों के खिलाफ सख्ती से पेश आए। अफवाह फैलाने वालों को चिन्हित कर सलाखों के पीछे भेजे। यह कानून बहुत पहले ही बन जाना चाहिए था। मैं सरकार के इस नये कानून का समर्थन करता हूं। कुछ पार्टियां इस पर भ्रम फैला रही हैं। ऐसे अफवाहों पर ध्यान देने की कोई जरूरत नहीं है।
थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं कि एनआरसी लागू भी होता है तो हमें या देश के अन्य नागरिकों को इससे डर कैसा। सब्सिडी या अन्य सरकारी सुविधाएं लेने के लिए दस्तावेज हम जमा करते हैं कि नहीं। उसी तरह एनआरसी के लिए भी करेंगे। यह सब वोट बैंक की राजनीति है। हम सभी को विपक्षी दलों की चालबाजी समझनी होगी। सीएए के खिलाफ भड़काने वालों से इससे हम लोगों को क्या नुकसान होगा इसके बारे में जानना होगा। बेहतर होगा की सभी लोग नए संशोधित कानून के के बारे में सही जानकारी जानें और ऐसा कोई काम न करें जिससे देश की संप्रभुता को ठेस पहुंचे।